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अगरबत्ती बनाने के नाम पर पीसा जाता था बारूद

Sun, 23 May 2021 11:28 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 23 May 2021 11:28 PM IST
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Gunpowder used to be brewed in the name of making incense sticks
कन्नौज/मानीमऊ। फैक्टरी में अगरबत्ती निर्माण के नाम पर बारूद पीसे जाने की जानकारी घायल कर्मचारी मुकेश ने दी है। उसने बताया कि फैक्टरी में प्रतिदिन बारूद पीसा जाता है। शनिवार को फैक्टरी मालिक आए थे। कर्मचारियों से कहा था कि 100 बोरी बारूद पीसकर तैयार कर दें। सुबह जाना है। इस पर कर्मचारी चक्की चलाकर बारूद पीस रहे थे। 85 बोरी माल पिस चुका था।
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इसी दौरान चक्की से निकली चिंगारी ने कुछ ही सेकेंड में पूरे हाल को आगोश में ले लिया। जो कर्मचारी काम कर रहे थे, उनको भी निकलने का मौका नहीं मिला। किसी तरह वह लोग बाहर निकले। गेट की ओर होने से वह सबसे पहले निकला इससे वह कम झुलसा। अन्य लोग अंदर थे, इसीलिए अधिक घायल हो गए।
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कर्मचारी के अनुसार फैक्टरी में किसी दिन भी अगरबत्ती का निर्माण नहीं किया गया है। कच्चा माल आता है। इसमें अधिकतर केमिकल होता है। उनको भी कुछ कच्चे माल की जानकारी नहीं है। गुजर-बसर करने के लिए वह काम करते रहते हैं। अक्सर ट्रक से माल आता और जाता रहता है। फैक्टरी में बाहरी व्यक्ति को घुसने की इजाजत नहीं है। आसपास के लोग भी फैक्टरी में नहीं घुस सकते थे।
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उधर, जिला अस्पताल में भर्ती तीन कर्मचारियों को जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार देने के बाद कानपुर रेफर कर दिया गया। मुकेश को जिला अस्पताल में भर्ती रखा गया है। आग लगने की घटना के बाद भी न तो कोई कर्मचारी फैक्टरी में पहुंचा न ही मालिक। इससे आग से कितना नुकसान हुआ, इसकी जानकारी नहीं हो सकी। उधर, फैक्टरी मालिक से इस संबंध में बात करने का प्रयास किया तो फोन बंद मिला।
दमकल कर्मियों ने जब आग पर पानी डालने लगे तो तेज धमाके होने लगे। इस पर कर्मचारी भागने लगे। जैसे ही आग की तेज लपटों पर पानी की बौछार डालते धमाका होने लगता। एक दमकल से आग पर काबू नहीं पाए तो दूसरी दमकल मंगाई। करीब पांच घंटे बाद आग पर काबू पाया जा सका। तब तक फैक्टरी की गोदाम में रखा सारा सामान जलकर राख हो गया।
अगरबत्ती फैक्टरी में आग लगने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी पांच बार आग लग चुकी है। हर बार दमकल को सूचना मिलती थी तो वह मौके पर पहुंच कर आग पर काबू पा लेती थी। किसी अधिकारी ने यह जानने का प्रयास नहीं किया कि आखिर फैक्टरी में आग क्यों लग रही है। इस बार की आग कुछ अलग थी, जिससे चार कर्मचारी चपेट में आ कर झुलस गए।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी एमपी सिंह ने बताया कि हरदोई रोड पर इतनी बड़ी अगरबत्ती फैक्टरी चलने के बाद भी दमकल विभाग से एनओसी नहीं ली गई थी। खास बात यह है कि फैक्टरी में किसी फर्म का बोर्ड भी नहीं लगाया गया है, जिससे यह पता चल सके कि इसमें किस चीज का उत्पादन किया जाता है। गेरू से दीवार पर अगरबत्ती फैक्टरी लिखा गया है। अन्य किसी तरह के प्रमाण नहीं हैं। फैक्ट्री में आग बुझाने का कोई उपाय भी कहीं नहीं दिखा।
बाहरी व्यक्ति का फैक्टरी में प्रवेश निषेध
अगरबत्ती फैक्टरी में किसी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश निषेध है। इस कारण यह भी पता नहीं चलता कि फैक्टरी में क्या तैयार किया जा रहा है। मुख्य गेट तभी खुलता है जब माल बाहर जाना हो या बाहर से आने वाला कच्चा माल फैक्टरी में रखना हो। मुख्य गेट के निकट एक छोटा गेट भी है। जिस पर हर समय कर्मचारी मौजूद रहता है। यह गेट भी हर समय बंद रहता है।

आखिर क्या तैयार होता था फैक्ट्री में
अगरबत्ती फैक्टरी में आखिर क्या तैयार किया जाता था कि आग लगने के बाद जब दमकल कर्मी पानी की बौछार डालते तो तेज धमाके होने लगते। इससे कर्मचारी भयभीत थे। उनको खौफ था कि कहीं तेज धमाका होने से आग की चपेट में आने से वह खुद न झुलस जाएं। यह धमाका बाहर व अंदर लगी बोरी के ढेर से हो रहे थे। पानी की बौछार डालने के बाद भी आग शांत नहीं हो सकी। जब पूरा मैटेरियल जल कर राख हुआ तभी आग बुझ पाई।
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