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Kannauj News: यूपी सिडको के बर्खास्त जेई पर प्राथमिकी दर्ज
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कन्नौज। यूपी सिडको में टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। अमर उजाला की खबरों के बाद आरोपी जेई कमल बाबू पर गुरुवार को प्राथमिकी दर्ज की गई है। उस पर पीएमश्री स्कूल की प्रधानाध्यापिका से 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है।
इस भ्रष्टाचार को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद एक्सईएन संजय गंगवार को निलंबित किया गया था। जेई कमल बाबू को बर्खास्त कर प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। पांच दिन बाद भी प्राथमिकी दर्ज न होने पर 20 अक्तूबर को अमर उजाला ने फिर से खबर छापी। बुधवार रात प्रभारी सहायक अभियंता शिवानंद दुबे की तहरीर पर जेई पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई। शासन स्तर से विभागीय जांच के निर्देश दिए गए थे। जांच में कमल बाबू के खिलाफ ठोस डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। इसमें व्हाट्सएप चैट और ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग शामिल हैं।
रिश्वत का दबाव
जांच में प्रमाणित हुआ कि अवर अभियंता कमल बाबू प्रधानाध्यापिका पर दबाव बना रहा था। वह निर्माण कार्य के सत्यापन के एवज में 20 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा था। प्रधानाध्यापिका ने स्वयं इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जेई सत्यापन रिपोर्ट रोककर बार-बार रुपये की मांग कर रहा था।
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मंत्री के निर्देश और आगे की जांच
समाज कल्याण राज्यमंत्री असीम अरुण ने 14 अक्तूबर को भ्रष्टाचार की शिकायतों पर संज्ञान लिया था। उन्होंने अधिशासी अभियंता संजय गंगवार को निलंबित किया था और जेई कमल बाबू को बर्खास्त कर प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। आरोपी जेई के अन्य निर्माण कार्यों की भी जांच चल रही है। यदि अनियमितताएं मिलीं तो कार्रवाई का दायरा बढ़ाया जाएगा। मंत्री असीम अरुण ने कहा कि प्रदेश सरकार भ्रष्टाचारियों को बख्शेगी नहीं।
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इस भ्रष्टाचार को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद एक्सईएन संजय गंगवार को निलंबित किया गया था। जेई कमल बाबू को बर्खास्त कर प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। पांच दिन बाद भी प्राथमिकी दर्ज न होने पर 20 अक्तूबर को अमर उजाला ने फिर से खबर छापी। बुधवार रात प्रभारी सहायक अभियंता शिवानंद दुबे की तहरीर पर जेई पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई। शासन स्तर से विभागीय जांच के निर्देश दिए गए थे। जांच में कमल बाबू के खिलाफ ठोस डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। इसमें व्हाट्सएप चैट और ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग शामिल हैं।
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रिश्वत का दबाव
जांच में प्रमाणित हुआ कि अवर अभियंता कमल बाबू प्रधानाध्यापिका पर दबाव बना रहा था। वह निर्माण कार्य के सत्यापन के एवज में 20 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा था। प्रधानाध्यापिका ने स्वयं इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जेई सत्यापन रिपोर्ट रोककर बार-बार रुपये की मांग कर रहा था।
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मंत्री के निर्देश और आगे की जांच
समाज कल्याण राज्यमंत्री असीम अरुण ने 14 अक्तूबर को भ्रष्टाचार की शिकायतों पर संज्ञान लिया था। उन्होंने अधिशासी अभियंता संजय गंगवार को निलंबित किया था और जेई कमल बाबू को बर्खास्त कर प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। आरोपी जेई के अन्य निर्माण कार्यों की भी जांच चल रही है। यदि अनियमितताएं मिलीं तो कार्रवाई का दायरा बढ़ाया जाएगा। मंत्री असीम अरुण ने कहा कि प्रदेश सरकार भ्रष्टाचारियों को बख्शेगी नहीं।