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अस्पताल मालिक समेत तीन डाक्टरों पर हत्या की रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो कन्नौज
Updated Sun, 20 Sep 2015 11:20 PM IST
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कस्बा स्थित स्वाती नर्सिंग होम में शनिवार रात जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में मृतका के पति ने नर्सिंग होम के संचालक समेत तीन डाक्टरों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप लगाया कि उसकी पत्नी को जहरीला इंजेक्शन देकर मारा गया।
कोतवाली में मृतका के पति अनुज कुमार राजपूत निवासी कमलेपुरवा संचालक पीसी दीक्षित, डा. वीपी सिंह, डा. कौशी सिंह और डा. किरन गुप्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। बताया कि उसने पत्नी सीता राजपूत (22) की डिलीवरी कराने के लिए उसे 18 सितंबर की शाम छह बजे नर्सिंग होम में भर्ती कराया था।
वहां तैनात उक्त डाक्टरों ने प्रसूता का मेडिकल परीक्षण करने के बाद बताया कि हालत चिंताजनक है। डिलीवरी सर्जरी के जरिए होगी। साथ ही 15 हजार रुपये जमा कराए। रविवार दोपहर एक बजे उसे फिर बुलाया। कहा कि केस सीरियस है। 15 हजार रुपये और जमा करो। रुपये जमा करने के बाद सीता को आपरेशन थिएटर ले गए।
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शाम 4 बजे के करीब डाक्टरों ने बताया कि मृत बच्चा पैदा हुआ है। डिलीवरी के बाद प्रसूता को डाक्टरों ने कुछ इंजेक्शन दिए। इंजेक्शन लगाते ही उसकी हालत बिगड़ गई। शाम 6:30 बजे सीता की मौत हो गई। अनुज ने आरोप लगाया कि डाक्टरों ने पूरे प्रकरण में लापरवाही बरती। उसे आशंका जताई कि पत्नी को जहरीला इंजेक्शन दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
मामले में कोतवाली प्रभारी श्यामवीर सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच पड़ताल की जा रही है। नर्सिंग होम के संचालक समेत सभी चिकित्सक व स्टाफ गायब है। नामजदों की गिरफ्तारी कर जल्द जेल भेजा जाएगा। शवों का पोस्टमार्टम कराया गया है।
रजिस्ट्रेशन की होगी पड़ताल
क्षेत्राधिकारी सुरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि इस पूरे प्रकरण में यह तथ्य सामने आया है कि नर्सिंग होम के बाहर काम करने वाले डाक्टरों के जो बोर्ड लगे हैं इनमें तीनों चिकित्सक की शैक्षिक योग्यता सिर्फ एमबीबीएस दर्शाई गई है। कोई भी चिकित्सक एमएस नहीं है। बिना सर्जन के आपरेशन कैसे किया गया? इसकी भी गहराई से पड़ताल की जाएगी। नर्सिंग होम का रजिस्ट्रेशन है या नहीं ? इसके लिए सीएमओ को पत्र लिखा गया है।
सघन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा
तिर्वा। एसडीएम उदयवीर सिंह का कहना है कि तिर्वा तहसील क्षेत्र में चल रहे नर्सिंग होम के खिलाफ जल्द ही सघन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। इसमें जांच की जाएगी कि इन नर्सिंग होम व प्राइवेट क्लीनिकों का रजिस्ट्रेशन है या नहीं? प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की शैक्षिक योग्यता क्या है? साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर रहे झोलाछाप के खिलाफ भी स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से अभियान चलाया जाएगा।
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कोतवाली में मृतका के पति अनुज कुमार राजपूत निवासी कमलेपुरवा संचालक पीसी दीक्षित, डा. वीपी सिंह, डा. कौशी सिंह और डा. किरन गुप्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। बताया कि उसने पत्नी सीता राजपूत (22) की डिलीवरी कराने के लिए उसे 18 सितंबर की शाम छह बजे नर्सिंग होम में भर्ती कराया था।
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वहां तैनात उक्त डाक्टरों ने प्रसूता का मेडिकल परीक्षण करने के बाद बताया कि हालत चिंताजनक है। डिलीवरी सर्जरी के जरिए होगी। साथ ही 15 हजार रुपये जमा कराए। रविवार दोपहर एक बजे उसे फिर बुलाया। कहा कि केस सीरियस है। 15 हजार रुपये और जमा करो। रुपये जमा करने के बाद सीता को आपरेशन थिएटर ले गए।
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शाम 4 बजे के करीब डाक्टरों ने बताया कि मृत बच्चा पैदा हुआ है। डिलीवरी के बाद प्रसूता को डाक्टरों ने कुछ इंजेक्शन दिए। इंजेक्शन लगाते ही उसकी हालत बिगड़ गई। शाम 6:30 बजे सीता की मौत हो गई। अनुज ने आरोप लगाया कि डाक्टरों ने पूरे प्रकरण में लापरवाही बरती। उसे आशंका जताई कि पत्नी को जहरीला इंजेक्शन दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
मामले में कोतवाली प्रभारी श्यामवीर सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच पड़ताल की जा रही है। नर्सिंग होम के संचालक समेत सभी चिकित्सक व स्टाफ गायब है। नामजदों की गिरफ्तारी कर जल्द जेल भेजा जाएगा। शवों का पोस्टमार्टम कराया गया है।
रजिस्ट्रेशन की होगी पड़ताल
क्षेत्राधिकारी सुरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि इस पूरे प्रकरण में यह तथ्य सामने आया है कि नर्सिंग होम के बाहर काम करने वाले डाक्टरों के जो बोर्ड लगे हैं इनमें तीनों चिकित्सक की शैक्षिक योग्यता सिर्फ एमबीबीएस दर्शाई गई है। कोई भी चिकित्सक एमएस नहीं है। बिना सर्जन के आपरेशन कैसे किया गया? इसकी भी गहराई से पड़ताल की जाएगी। नर्सिंग होम का रजिस्ट्रेशन है या नहीं ? इसके लिए सीएमओ को पत्र लिखा गया है।
सघन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा
तिर्वा। एसडीएम उदयवीर सिंह का कहना है कि तिर्वा तहसील क्षेत्र में चल रहे नर्सिंग होम के खिलाफ जल्द ही सघन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। इसमें जांच की जाएगी कि इन नर्सिंग होम व प्राइवेट क्लीनिकों का रजिस्ट्रेशन है या नहीं? प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की शैक्षिक योग्यता क्या है? साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर रहे झोलाछाप के खिलाफ भी स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से अभियान चलाया जाएगा।