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Kannauj News: 57 समितियों में से 22 ताला, हड़ताल से खाद संकट गहराया

Tue, 27 Oct 2026 10:31 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 27 Oct 2026 10:31 PM IST
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Fertilizer crisis deepens as 22 out of 57 cooperatives remain shut due to strikes
कन्नौज। आलू और रबी की बोआई के अहम समय में 57 सहकारी समितियों के सचिवों की हड़ताल किसानों पर भारी पड़ रही है। 22 अक्तूबर से लगातार सहकारी समितियों पर ताले लटके हैं। इससे डीएपी और यूरिया खाद के लिए किसानों की परेशानी बढ़ गई है। खेत तैयार होने के बावजूद खाद नहीं मिलने से सरसों, आलू और गेहूं की बोआई प्रभावित होने लगी है।
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किसान रामकिशोर, मनोज कुमार, आलोक तिवारी, कमलकांत कटियार आदि किसानों का कहना है कि सुबह से ही समितियों पर पहुंच जाते हैं पर सचिव नहीं मिलते। समिति बंद होने से सरकारी दर पर खाद नहीं मिल पा रही। मजबूरन निजी दुकानों का रुख करना पड़ रहा है। वहां पर 1350 रुपये वाली डीएपी 1450-500 रुपये में है।
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किसानों ने बताया कि समय पर बोआई न हुई तो पैदावार पर असर पड़ेगा। छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। कारण है कि महंगी खाद खरीदने में असमर्थ हैं। कई गांवों में किसान खाली हाथ लौट रहे हैं। एआर कोऑपरेटिव उदय शंकर का कहना है कि सचिवों की मांगों को लेकर वार्ता चल रही है। जल्द हड़ताल समाप्त कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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फोटो :10: किसान विनीत तोमर।
जलालाबाद ब्लॉक के ग्राम मूसरी के किसान विनीत तोमर ने बताया कि रबी की बोआई के लिए खेत तैयार है लेकिन समिति पर ताला लगा होने से डीएपी नहीं मिल रही। सचिव हड़ताल पर हैं। कई दिनों से चक्कर काट रहे हैं। मजबूरन निजी दुकान से महंगे दाम पर खाद लेनी पड़ रही है। समय पर बोआई न हुई तो फसल प्रभावित होगी।
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फोटो :11: किसान रमेश जाटव।
जलालाबाद के किसान रमेश जाटव ने बताया कि रबी सीजन की बोआई का समय निकल रहा है लेकिन खाद नहीं मिल रही। सचिव हड़ताल पर हैं। सरकारी खाद न मिलने से निजी दुकानों पर 150 रुपये अधिक देना पड़ रहा है। छोटे किसान महंगी खाद खरीदने में असमर्थ हैं और बोआई प्रभावित हो रही है।

मांगें पूरी होने तक डटे रहेंगे सचिव, लखनऊ में जारी है धरना
सहकारी समितियों के सचिवों की हड़ताल खत्म होने के आसार नहीं हैं। उत्तर प्रदेश सहकारी समिति कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह ने बताया कि जब तक हमारी मांगे नहीं मानी जाएंगी। तब तक हम ऐसे ही बैठे रहेंगे। डीएपी-यूरिया के लिए किसान परेशान हैं और रबी की बोआई प्रभावित हो रही है।
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