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एक्सप्रेस-वे के छिबरामऊ में 19.75 करोड़ का गोलमाल
अमर उजाला ब्यूराो/कन्नौज
Updated Sun, 23 Apr 2017 12:09 AM IST
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आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सपा सरकार की अति महत्वाकांक्षी परियोजना आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहण में यहां बड़ा घपला हुआ है। छिबरामऊ में अधिग्रहण से पहले लैंड यूज बदलकर सर्किल रेट के नियमों को ताक पर रखकर ज्यादा मुआवजा बांटा गया। मार्च में अ़ॉडिट करने वाले महालेखाकार (आर्थिक एवं राजस्व लेखा परीक्षा) ने छिबरामऊ तहसील क्षेत्र में मुआवजे की 19.75 करोड़ की धनराशि को अनुचित माना है। इसकी रिपोर्ट यूपीडा को सौंपकर सिफारिश की है कि एसडीएम व तहसीलदार को सर्किल रेट का पुनरीक्षण कराते हुए किसानों से रिकवरी कराई जाए।
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तहसील में यूपीडा (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी) के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी राम सिंहासन प्रेम ने यहां जिला प्रशासन को पत्र भेज कर अवगत कराया है कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे कई किसानों ने बैनामा करने से पहले लेखपालों की साठगांठ से अपनी भूमि को व्यावसायिक और आबादी में परिवर्तित करा लिया। इससे उनकी मुआवजे की धनराशि बढ़ गई।
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तहसील क्षेत्र में लगभग 250 किसान ऐसे हैं, जिन्हें सर्किल रेट के नियमों को ताक पर रखकर करीब19.75 करोड़ का अतिरिक्त मुआवजा दिया गया। किसानों ने सर्किल रेट की सामान्य दर से बैनामा किया था। नियम के मुताबिक अधिग्रहण से एक साल पहले की श्रेणी परिवर्तन वाली भूमि को ही स्वीकृत किया जाएगा। यदि किसी काश्तकार का खेत रोड से सटा हुआ है तो उसका सर्किल रेट अधिक होगा। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे में लेखपालों ने उन किसानों को भी उतना ही मुआवजा दिया, जिनका सर्किल रेट रोड साइड जमीन से कम था। अकेले तालग्राम देहात ग्राम पंचायत में 21 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा किसानों को दिया गया, जबकि यह 19 लाख प्रति हेक्टेयर की दर से देना चाहिए था।
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इसी तरह अमोलर, रनवां, बेहटा खास, भीखमपुर सानी, नगला वीरभान, बहादुरपुर मझिगवां, बझेड़ी समेत लगभग 21 ग्राम पंचायतों में सर्किल रेट से अधिक दर पर अतिरिक्त मुआवजा दे दिया गया। दरों में अंतर होने के कारण महालेखाकर ने इसे अनुचित माना है और यूपीडा को सर्किल रेट सहित मुआवजे की धनराशि का किसानवार डाटा मांगा है। यूपीडा ने एसडीएम व तहसीलदार से सर्किल रेट का पुनरीक्षण कर अतिरिक्त धनराशि की रिकवरी के आदेश दिए हैं। एसडीएम उदयवीर सिंह ने राजस्व निरीक्षकों से अधिग्रहीत जमीन के सर्किल रेट के पुनरीक्षण की रिपोर्ट मांगी है। नायब तहसीलदार अवनीश कुमार ने बताया कि तहसील क्षेत्र में लगभग 40 किलोमीटर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे बनाया गया, जिसमें 29 ग्राम पंचायतों के ढाई हजार से अधिक किसानों की भूमि अधिग्रहीत की गई थी। तालग्राम, छिबरामऊ और सौरिख ब्लॉकों से होकर यह इटावा जिले में प्रवेश कर जाता है। मुआवजे को लेकर लगभग आधा सैकड़ा याचिकाएं हाईकोर्ट इलाहाबाद में लंबित हैं।
इस बाबत एसडीएम उदयवीर सिंह ने बताया कि भूमि अधिग्रहण के समय वह यहां तैनात नहीं थे। मुआवजा किस आधार पर बांटा गया, इसके लिए यूपीडा के निर्देश पर राजस्व निरीक्षकों से सर्किल रेट का पुनरीक्षण कराया जा रहा है। साथ ही उस समय के लेखपालों की भूमिका की जांच भी कराई जाएगी। इसमें जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डीएम के निर्देश पर तहसीलदार व नायब तहसीलदार को भी मामले की जांच सौंपी गई है।