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Kannauj News: तीन साल बाद भी पशु अस्पताल नहीं बना
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हसेरन। सरकार से बजट मंजूर होने के बावजूद नादेमऊ में राजकीय पशु चिकित्सालय का भवन अब तक नहीं बन सका है। वर्ष 2023 में निर्माण के लिए 17.03 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई थी और कार्यदायी संस्था भी नामित कर दी गई, लेकिन धरातल पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। ऐसे में क्षेत्र के पशुपालक सरकारी पशु चिकित्सा सुविधा से वंचित हैं और बीमार मवेशियों के इलाज के लिए भटकने को मजबूर हैं।
नादेमऊ-शेरपुर मार्ग स्थित जमीन राजकीय पशु चिकित्सालय के नाम दर्ज है। गांव के सत्यपाल वर्मा, दुर्विजय पाल, वीरू प्रताप, आनंद राठौर, रमेश, सर्वेश, अमित, सुरेश और गीता का आरोप है कि इस जमीन पर वर्षों से खेती की जा रही है। अस्पताल भवन न होने के कारण पशुपालकों को पशुओं के इलाज के लिए निजी और झोलाछाप का सहारा लेना पड़ता है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि राजकीय पशु चिकित्सालय के भवन निर्माण के लिए वर्ष 2023 में 17 लाख तीन हजार रुपये की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति दी गई थी। निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण एवं श्रम विकास सहकारी संघ लिमिटेड (यूपीसीएलडीएफ) को सौंपी गई थी। इसके बावजूद अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब बजट स्वीकृत हो चुका था तो भवन निर्माण में देरी क्यों हो रही है और स्वीकृत धनराशि का क्या हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल भवन के अभाव में पशुपालकों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता और पशुपालकों की परेशानी और बढ़ जाती है।
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जिम्मेदार बोले-जानकारी नहीं
वर्जन
इस तरह के मामले की जानकारी नहीं है। शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।-डॉ. सर्दूल सिंह, जिला पशु चिकित्साधिकारी
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नादेमऊ-शेरपुर मार्ग स्थित जमीन राजकीय पशु चिकित्सालय के नाम दर्ज है। गांव के सत्यपाल वर्मा, दुर्विजय पाल, वीरू प्रताप, आनंद राठौर, रमेश, सर्वेश, अमित, सुरेश और गीता का आरोप है कि इस जमीन पर वर्षों से खेती की जा रही है। अस्पताल भवन न होने के कारण पशुपालकों को पशुओं के इलाज के लिए निजी और झोलाछाप का सहारा लेना पड़ता है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
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ग्रामीणों ने बताया कि राजकीय पशु चिकित्सालय के भवन निर्माण के लिए वर्ष 2023 में 17 लाख तीन हजार रुपये की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति दी गई थी। निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण एवं श्रम विकास सहकारी संघ लिमिटेड (यूपीसीएलडीएफ) को सौंपी गई थी। इसके बावजूद अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब बजट स्वीकृत हो चुका था तो भवन निर्माण में देरी क्यों हो रही है और स्वीकृत धनराशि का क्या हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल भवन के अभाव में पशुपालकों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता और पशुपालकों की परेशानी और बढ़ जाती है।
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जिम्मेदार बोले-जानकारी नहीं
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इस तरह के मामले की जानकारी नहीं है। शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।-डॉ. सर्दूल सिंह, जिला पशु चिकित्साधिकारी