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जिले भर के अभियंताओं ने ठप किया कामकाज
अमर उजाला कन्नाैैज
Updated Thu, 29 Jan 2015 12:03 AM IST
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उत्तर प्रदेश डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के बैनर तले बुधवार को जिले भर के विभिन्न विभागों के अभियंता सामूहिक अवकाश पर रहे। इस दौरान कामकाज पूरी तरह ठप रहा। अभियंताओं ने पूरे दिन लोकनिर्माण विभाग के प्रांतीय खंड कार्यालय में धरना दिया और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। गुरुवार को भी सामूहिक अवकाश और आंदोलन का सिलसिला चलता रहेगा।
डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के जिलाध्यक्ष आरके सिंह के नेतृत्व में लोकनिर्माण विभाग प्रांतीय खंड, पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड, निर्माण खंड एक, जल निगम, जल निगम निर्माण खंड, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, राजकीय निर्माण निगम और बिजली विभाग के अभियंता शामिल हुए। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह 11 बजे लोकनिर्माण विभाग कार्यालय में अभियंताओं की भीड़ उमड़ पड़ी। यहां कई घंटे तक प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी का दौर चलता रहा।
इस मौके पर महासंघ के जिलाध्यक्ष आरके सिंह ने कहा कि शासन से कई बार वार्ता के बावजूद इंजीनियरों के हितों की अनदेखी की जा रही है। प्रदेश सरकार की वादाखिलाफी से आजिज आकर अभियंता आंदोलन के लिए उतरे हैं। जूनियर इंजीनियर को प्रारंभिक ग्रेड वेतन का 4800 रुपया मिलना चाहिए, लेकिन ऐसा न करके अन्याय किया जा रहा है।
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इंजीनियर सुनील आनंद ने कहा कि प्रदेश के सभी जेई एकजुट हैं। प्रारंभिक वेतन, पुरानी पेंशन व्यवस्था नहीं मानी गई तो आने वाली 27 फरवरी को विधानसभा का घेराव किया जाएगा। इसमें जनपद के इंजीनियर भी भारी तादात में शामिल होकर लखनऊ कूच करेंगे।
इंजीनियर सोमलता व्यास, राम मिलन, श्यामल सिंह, अनिल सचान, एके सिंह ने कहा कि जेई अपने हक को लेकर आरपार का संघर्ष करेंगे। इंजीनियर रामप्रकाश पाल, मकरंद सिंह यादव, ओमपाल, वीके शुक्ला, दीपक कुशवाहा ने कहा कि इंजीनियरों को वेतन देने में सौतेला व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बिजली विभाग के जेई विशाल वर्मा व दीपचंद्र ने भी प्रदर्शन में शामिल होकर सांकेतिक तौर पर समर्थन दिया। इस दौरान सुनील सचान, अंकुर सक्सेना, राहुल यादव, शीशपाल, प्रभात गुप्ता, योगेंद्र पाल, राकेश, कौशल किशोर, जमुना प्रसाद, अंजनी गौतम, मुन्नापाल, राजीव, विनोद यादव, गुरुचरन सिंह, महेश गौड़, अशोक सिंह, अमर वर्मा, नंदलाल यादव, अरुण, संदीप, पंकज पांडेय आदि मौजूद रहे।
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संयुक्त परिषद ने भी दिया समर्थन
इंजीनियरों के आंदोलन को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने भी अपना समर्थन दिया है। बुधवार को धरना स्थल पर संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष डा. अशोक सविता, शिवमूर्ति पांडेय और रामकिशोरी त्रिपाठी ने पहुंचकर प्रदर्शनकारियों की हौसलाफजाई की। परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि इंजीनियरों को उनका हक मिलना ही चाहिए। जरूरत पड़ी तो परिषद भी इंजीनियरों के कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग देगी।
मेडिकल कालेज पदाधिकारी भी शामिल
राजकीय मेडिकल कालेज यूनियन के पदाधिकारी भी डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के प्रदर्शन में शामिल हुए। मेडिकल कालेज कर्मचारी नेता धीरज सिंह, अशोक गिरि अपने कई साथियों के साथ धरनास्थल पर पहुंचे। इंजीनियरों के संघर्ष को जायज ठहराया। हक पाने के लिए चल रही उनकी लड़ाई में हर तरह का सहयोग करने का भरोसा दिलाया।
दफ्तरों में काम ठप, साइट पर सन्नाटा
जूनियर इंजीनियरों के आंदोलन का असर जिले में निर्माणाधीन विभिन्न विकास योजनाओं पर सीधे तौर पर पड़ा। सड़क निर्माण व मरम्मत का कार्य बुधवार को ठप रहा। जेई साइट पर नजर नहीं आए। वहीं जेई के कामकाज ठप रहने के कारण आला अफसरों ने पेंच कसे तो कुछ जगहों पर सहायक अभियंताओं ने जाकर कागजी कोरम पूरा किया।
जल निगम की पानी टंकियों के निर्माण व हैंडपंप स्थापना के कार्य पर भी प्रदर्शन का विपरीत असर पड़ा। यही हाल राजकीय निर्माण निगम की तरफ से विभिन्न भवनों के निर्माण की प्रक्रिया पर पड़ा।
जल निगम अधिशासी अभियंता से नोकझोंक
जल निगम में सामूहिक अवकाश के बावजूद जेई को प्रदर्शन स्थल पर न आने देने व कई तरह से प्रताड़ित करने की बातें सामने आने पर डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के पदाधिकारी भड़क गए। इंजीनियर वृजेंद्र मोहन, सूरवीर, ओमपाल, हेमवीर आदि के साथ दर्जनों इंजीनियर जल निगम कार्यालय पहुंच गए। हो-हल्ला मचने पर अधिशासी अभियंता से नोकझोंक हुई। बाद में जलनिगम के जेई भी आंदोलन में आकर शामिल हुए।
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डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के जिलाध्यक्ष आरके सिंह के नेतृत्व में लोकनिर्माण विभाग प्रांतीय खंड, पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड, निर्माण खंड एक, जल निगम, जल निगम निर्माण खंड, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, राजकीय निर्माण निगम और बिजली विभाग के अभियंता शामिल हुए। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह 11 बजे लोकनिर्माण विभाग कार्यालय में अभियंताओं की भीड़ उमड़ पड़ी। यहां कई घंटे तक प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी का दौर चलता रहा।
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इस मौके पर महासंघ के जिलाध्यक्ष आरके सिंह ने कहा कि शासन से कई बार वार्ता के बावजूद इंजीनियरों के हितों की अनदेखी की जा रही है। प्रदेश सरकार की वादाखिलाफी से आजिज आकर अभियंता आंदोलन के लिए उतरे हैं। जूनियर इंजीनियर को प्रारंभिक ग्रेड वेतन का 4800 रुपया मिलना चाहिए, लेकिन ऐसा न करके अन्याय किया जा रहा है।
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इंजीनियर सुनील आनंद ने कहा कि प्रदेश के सभी जेई एकजुट हैं। प्रारंभिक वेतन, पुरानी पेंशन व्यवस्था नहीं मानी गई तो आने वाली 27 फरवरी को विधानसभा का घेराव किया जाएगा। इसमें जनपद के इंजीनियर भी भारी तादात में शामिल होकर लखनऊ कूच करेंगे।
इंजीनियर सोमलता व्यास, राम मिलन, श्यामल सिंह, अनिल सचान, एके सिंह ने कहा कि जेई अपने हक को लेकर आरपार का संघर्ष करेंगे। इंजीनियर रामप्रकाश पाल, मकरंद सिंह यादव, ओमपाल, वीके शुक्ला, दीपक कुशवाहा ने कहा कि इंजीनियरों को वेतन देने में सौतेला व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बिजली विभाग के जेई विशाल वर्मा व दीपचंद्र ने भी प्रदर्शन में शामिल होकर सांकेतिक तौर पर समर्थन दिया। इस दौरान सुनील सचान, अंकुर सक्सेना, राहुल यादव, शीशपाल, प्रभात गुप्ता, योगेंद्र पाल, राकेश, कौशल किशोर, जमुना प्रसाद, अंजनी गौतम, मुन्नापाल, राजीव, विनोद यादव, गुरुचरन सिंह, महेश गौड़, अशोक सिंह, अमर वर्मा, नंदलाल यादव, अरुण, संदीप, पंकज पांडेय आदि मौजूद रहे।
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संयुक्त परिषद ने भी दिया समर्थन
इंजीनियरों के आंदोलन को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने भी अपना समर्थन दिया है। बुधवार को धरना स्थल पर संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष डा. अशोक सविता, शिवमूर्ति पांडेय और रामकिशोरी त्रिपाठी ने पहुंचकर प्रदर्शनकारियों की हौसलाफजाई की। परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि इंजीनियरों को उनका हक मिलना ही चाहिए। जरूरत पड़ी तो परिषद भी इंजीनियरों के कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग देगी।
मेडिकल कालेज पदाधिकारी भी शामिल
राजकीय मेडिकल कालेज यूनियन के पदाधिकारी भी डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के प्रदर्शन में शामिल हुए। मेडिकल कालेज कर्मचारी नेता धीरज सिंह, अशोक गिरि अपने कई साथियों के साथ धरनास्थल पर पहुंचे। इंजीनियरों के संघर्ष को जायज ठहराया। हक पाने के लिए चल रही उनकी लड़ाई में हर तरह का सहयोग करने का भरोसा दिलाया।
दफ्तरों में काम ठप, साइट पर सन्नाटा
जूनियर इंजीनियरों के आंदोलन का असर जिले में निर्माणाधीन विभिन्न विकास योजनाओं पर सीधे तौर पर पड़ा। सड़क निर्माण व मरम्मत का कार्य बुधवार को ठप रहा। जेई साइट पर नजर नहीं आए। वहीं जेई के कामकाज ठप रहने के कारण आला अफसरों ने पेंच कसे तो कुछ जगहों पर सहायक अभियंताओं ने जाकर कागजी कोरम पूरा किया।
जल निगम की पानी टंकियों के निर्माण व हैंडपंप स्थापना के कार्य पर भी प्रदर्शन का विपरीत असर पड़ा। यही हाल राजकीय निर्माण निगम की तरफ से विभिन्न भवनों के निर्माण की प्रक्रिया पर पड़ा।
जल निगम अधिशासी अभियंता से नोकझोंक
जल निगम में सामूहिक अवकाश के बावजूद जेई को प्रदर्शन स्थल पर न आने देने व कई तरह से प्रताड़ित करने की बातें सामने आने पर डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के पदाधिकारी भड़क गए। इंजीनियर वृजेंद्र मोहन, सूरवीर, ओमपाल, हेमवीर आदि के साथ दर्जनों इंजीनियर जल निगम कार्यालय पहुंच गए। हो-हल्ला मचने पर अधिशासी अभियंता से नोकझोंक हुई। बाद में जलनिगम के जेई भी आंदोलन में आकर शामिल हुए।
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