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Kannauj News: सौरिख व कायमपुर में भी मिली 1.20 करोड़ शत्रु संपत्ति
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छिबरामऊ। पाकिस्तान गई मोहल्ला बिरतिया की बीबी हलीमा की जमीनों की जांच शुरू होते ही अन्य शत्रु संपत्तियां सामने आ गई हैं। सौरिख से भी पाकिस्तान गए तीन लोगों की 1.20 करोड़ की जमीनें मिली हैं। लेखपालों की रिपोर्ट मिलने के बाद इन्हें राज्य सरकार में दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सौरिख के मोहम्मद हुसैन व मासूम अली देश विभाजन के बाद परिवार के साथ पाकिस्तान चले गए थे। राजस्व विभाग की जांच में मोहम्मद हुसैन के नाम गाटा संख्या 1222 में 0.1548 हेक्टेयर व गाटा संख्या 1227 में 0.7333 हेक्टेयर जमीन मासूम अली के नाम दर्ज है। क्षेत्रीय लेखपाल औरंगजेब ने बताया कि इन जमीनों की कीमत 1.20 करोड़ रुपये है। हालांकि यह जमीन खाली पड़ी है। इनकों चिह्नित कर रिपोर्ट शनिवार को उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी। वहीं, सौरिख क्षेत्र के कायमपुर गांव से गाटा संख्या 978 के मिले जुले नंबर एवं गाटा संख्या 3.5 बीघा जमीन साबिर अली पुत्र मसूल अली के नाम पर दर्ज है। साबिर अली भी पाकिस्तान जा चुके हैं। इन सभी का कोई वारिस इलाके में नहीं है।
77 सालों तक सोता रहा प्रशासन
देश की आजादी के बाद पाकिस्तान गए लोगों की संपत्तियों को शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया गया था। आजाद भारत के 77 साल बीत चुके हैं, इसके बाद भी जनपद के अफसरों ने तहसील क्षेत्र की शत्रु संपत्तियों को लेकर सुध नहीं ली। अफसरों की लापरवाही का परिणाम है कि मोहल्ला बिरतिया निवासी बीबी हलीमा की करोड़ों की संपत्ति पर रिहायशी मकान बन चुके हैं। साथ ही भू-माफियाओं ने फर्जी अभिलेखों का सहारा लेकर इनकी बेशकीमती जमीनों को बिक्री कर दिया। भाकियू (औनू) के पूर्व प्रदेश महासचिव गोपाल दुबे की शिकायत पर बीबी हलीमा की जमीनों की जांच शुरू होते ही शत्रु संपत्तियां सामने आने लगी हैं। छिबरामऊ में भी बीबी हलीमा के अलावा मोहल्ला बिरतिया के ही महफूज अली की छिबरामऊ देहात के गाटा संख्या 448 व 460 में जमीन राजस्व अभिलेखों में दर्ज मिली हैं। उनके दो पुत्र मोहम्मद रजा व मोहसिन थे। बंटवारे के बाद मोहम्मद रजा पाकिस्तान चले गए थे। मोहसिन राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर भाई के हिस्से की संपत्ति को बिक्री कर चुके हैं।
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सौरिख के मोहम्मद हुसैन व मासूम अली देश विभाजन के बाद परिवार के साथ पाकिस्तान चले गए थे। राजस्व विभाग की जांच में मोहम्मद हुसैन के नाम गाटा संख्या 1222 में 0.1548 हेक्टेयर व गाटा संख्या 1227 में 0.7333 हेक्टेयर जमीन मासूम अली के नाम दर्ज है। क्षेत्रीय लेखपाल औरंगजेब ने बताया कि इन जमीनों की कीमत 1.20 करोड़ रुपये है। हालांकि यह जमीन खाली पड़ी है। इनकों चिह्नित कर रिपोर्ट शनिवार को उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी। वहीं, सौरिख क्षेत्र के कायमपुर गांव से गाटा संख्या 978 के मिले जुले नंबर एवं गाटा संख्या 3.5 बीघा जमीन साबिर अली पुत्र मसूल अली के नाम पर दर्ज है। साबिर अली भी पाकिस्तान जा चुके हैं। इन सभी का कोई वारिस इलाके में नहीं है।
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77 सालों तक सोता रहा प्रशासन
देश की आजादी के बाद पाकिस्तान गए लोगों की संपत्तियों को शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया गया था। आजाद भारत के 77 साल बीत चुके हैं, इसके बाद भी जनपद के अफसरों ने तहसील क्षेत्र की शत्रु संपत्तियों को लेकर सुध नहीं ली। अफसरों की लापरवाही का परिणाम है कि मोहल्ला बिरतिया निवासी बीबी हलीमा की करोड़ों की संपत्ति पर रिहायशी मकान बन चुके हैं। साथ ही भू-माफियाओं ने फर्जी अभिलेखों का सहारा लेकर इनकी बेशकीमती जमीनों को बिक्री कर दिया। भाकियू (औनू) के पूर्व प्रदेश महासचिव गोपाल दुबे की शिकायत पर बीबी हलीमा की जमीनों की जांच शुरू होते ही शत्रु संपत्तियां सामने आने लगी हैं। छिबरामऊ में भी बीबी हलीमा के अलावा मोहल्ला बिरतिया के ही महफूज अली की छिबरामऊ देहात के गाटा संख्या 448 व 460 में जमीन राजस्व अभिलेखों में दर्ज मिली हैं। उनके दो पुत्र मोहम्मद रजा व मोहसिन थे। बंटवारे के बाद मोहम्मद रजा पाकिस्तान चले गए थे। मोहसिन राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर भाई के हिस्से की संपत्ति को बिक्री कर चुके हैं।
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