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दीपावली: चीन की झालरों को टक्कर देंगे मिट्टी के डिजाइनर दीपक

Thu, 28 Oct 2021 12:09 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 28 Oct 2021 12:09 AM IST
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Diwali: Designer lamps of clay will give competition to the skirts of China
सलेमपुर में चाक से दीपक बनाते शिवनाथ। - फोटो : KANNAUJ
तालग्राम(कन्नौज)। इस बार दीपावली पर डिजाइनर स्वदेशी दीपकों से घर जगमग होंगे। इलाके के कुम्हार इन्हें बनाने में जुटे हैं। इनका मकसद चीन की आयातित झालरों, मोम और मिट्टी के दीपकों को टक्कर देना है। यह डाई मशीन और चाक से दीपक, कुल्हड़, मिट्टी के बर्तन तैयार कर रहे हैं। दूसरे शहरों में भी सप्लाई दी जा रही है।
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कस्बे के मोहल्ला कायस्थान निवासी दीपक प्रजापति भाई, मां, पत्नी के साथ कुम्हारी कला का काम करते हैं। यह बताते हैं कि लोग चीन की झालर, मोमबत्ती और बल्ब न खरीदें। इससे डाई मशीन से इको फ्रेंडली दीपक तैयार कर रहे हैं। मशीन से कुल्हड़, लस्सी के गिलास के अलावा 12 प्रकार के दीपक तैयार कर रहे हैं। इन्होंने बताया कि कमल, पंचमुखी, पान पत्ती, स्टैंड टाइप, स्टार, कोनेदार, के आकार के मिट्टी के दीपकों की खूब मांग है। गुरसहायगंज, छिबरामऊ, तिर्वा के अलावा दूसरे जिलों में 25 हजार दीपकों की आपूर्ति की योजना है। एक दो दिन में काम और जोर पकड़ लेगा।
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मेहनत, लागत और बिक्री तक लड़ना पड़ता
इलाके के बिधीपुर्वा, सीतापुर्वा, रनवां, कैथनपुर्वा, सलेमपुर, सकरवारा समेत करीब 20 गांवों के कई परिवार कुम्हारी कला से जुड़े हैं। यह मिट्टी के बर्तन तैयार कर दूसरे शहरों में सप्लाई करते हैं। विधीपुर्वा के रतीराम प्रजापति, तालग्राम के हरिप्रकाश प्रजापति, सलेमपुर के शिवनाथ प्रजापति ने बताया कि मिट्टी के आइटम में मेहनत, लागत और बिक्री तक लड़ने की जरूरत पड़ती है। किसी एक में कमी आने पर नुकसान हो जाता है। सादा दीपक 30 से 40 पैसे का पड़ता है। यह एक रुपये में बिक जाता है।
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मांग कम होने पर बदली डिजाइन
तालग्राम के दीपक प्रजापति बताते हैं कि पहले चाक से दीपक, मटकी, गुल्लक, सुराही, घड़ा, बनाते थे। मांग कम होने पर डिजाइन बदल दी है। आठ हजार की डाई लाए हैं। इससे इको फ्रेंडली और डिजाइनर मिट्टी के बर्तन बना रहे हैं। सरकार से कोई मदद नहीं मिली। सरकार मदद करें तो कुम्हारी कला में और निखार आ सकता है।
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