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Kannauj News: प्रति सिलिंडर प्रशासनिक एवं होम डिलीवरी शुल्क बढ़ाने की मांग
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कन्नौज। एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन ने शनिवार को अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को प्रति सिलिंडर प्रशासनिक एवं होम डिलीवरी शुल्क बढ़ाने की मांग की है। इसके लिए भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को संबोधित ज्ञापन भी भेजा गया है।
एसोसिएशन ने बताया कि यह आंदोलन ऑल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में देशभर में एक साथ चलाया जा रहा है। जिले के वितरकों ने अपनी क्षेत्रीय इकाई के माध्यम से यह मांग पत्र अतिरिक्त मजिस्ट्रेट देवेंद्र सिंह के जरिए केंद्र सरकार तक पहुंचाया है। वितरकों के अनुसार, वर्ष 2019 तक शुल्क की नियमित समीक्षा होती थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण वर्ष 2020-21 में यह प्रक्रिया रुक गई थी। वर्ष 2022 में मामूली वृद्धि के बावजूद, मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में यह शुल्क अपर्याप्त है।
एसोसिएशन का कहना है कि बढ़ती महंगाई, परिचालन खर्च और कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि के चलते डिलीवरी लागत कई गुना बढ़ चुकी है। इसलिए, शुल्क बढ़ाना अब आवश्यक हो गया है। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो वितरक चरणबद्ध आंदोलन करेंगे। इस कार्यक्रम के तहत 29 अक्तूबर को विरोध रैली एवं सांकेतिक धरना दिया जाएगा और 6 नवंबर को नो मनी, नो इंडेंट के सिद्धांत पर कार्य बहिष्कार किया जाएगा। वितरकों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ कंपनियों के अधिकारी उन पर अनुचित दबाव बना रहे हैं, जिससे उनके बीच असंतोष बढ़ रहा है। इस अवसर पर जिले के सभी वितरकों ने कहा कि हमारा उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा देना है, किंतु वर्तमान परिस्थितियों में यह संभव नहीं है। जब तक सरकार व तेल कंपनियां हमारी जायज मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेतीं, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। इस मौके पर जिले के सभी कंपनियों के वितरक मौजूद रहे।
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एसोसिएशन ने बताया कि यह आंदोलन ऑल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में देशभर में एक साथ चलाया जा रहा है। जिले के वितरकों ने अपनी क्षेत्रीय इकाई के माध्यम से यह मांग पत्र अतिरिक्त मजिस्ट्रेट देवेंद्र सिंह के जरिए केंद्र सरकार तक पहुंचाया है। वितरकों के अनुसार, वर्ष 2019 तक शुल्क की नियमित समीक्षा होती थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण वर्ष 2020-21 में यह प्रक्रिया रुक गई थी। वर्ष 2022 में मामूली वृद्धि के बावजूद, मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में यह शुल्क अपर्याप्त है।
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एसोसिएशन का कहना है कि बढ़ती महंगाई, परिचालन खर्च और कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि के चलते डिलीवरी लागत कई गुना बढ़ चुकी है। इसलिए, शुल्क बढ़ाना अब आवश्यक हो गया है। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो वितरक चरणबद्ध आंदोलन करेंगे। इस कार्यक्रम के तहत 29 अक्तूबर को विरोध रैली एवं सांकेतिक धरना दिया जाएगा और 6 नवंबर को नो मनी, नो इंडेंट के सिद्धांत पर कार्य बहिष्कार किया जाएगा। वितरकों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ कंपनियों के अधिकारी उन पर अनुचित दबाव बना रहे हैं, जिससे उनके बीच असंतोष बढ़ रहा है। इस अवसर पर जिले के सभी वितरकों ने कहा कि हमारा उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा देना है, किंतु वर्तमान परिस्थितियों में यह संभव नहीं है। जब तक सरकार व तेल कंपनियां हमारी जायज मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेतीं, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। इस मौके पर जिले के सभी कंपनियों के वितरक मौजूद रहे।
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