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24 घंटे में एक दर्जन से अधिक मवेशियों की मौत
अमर उजाला/कन्नौज
Updated Mon, 01 Aug 2016 12:02 AM IST
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cattle smuggler
- फोटो : Getty Images
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विकास खंड तालग्राम के गांव विचपुर्वा में विचित्र बीमारी के चलते एक दर्जन पशुओें की मौत हो गई। कई बीमारी की चपेट में हैं। इधर, पशु चिकित्साधिकारी के अनुसार मवेशियाें की मौत बीमारी से नहीं, बल्कि जहरीली घास खाने से हुई है। गांव विचपुर्वा निवासी राजेंद्र पाल ने बताया कि गांव में 24 घंटे से कम समय में मवेशियों के कांपने के बाद कुछ ही मिनटों में एक के बाद एक लगातार दम तोड़ रहे हैं।
इसमें गांव के अमरपाल, सोभरन पाल, महेंद्र ठाकुर, सुनील वर्मा, राजबहादुर, की भैंसो ने अचानक दम तोड़ दिया। वहीं गांव के छेदीलाल के मवेशियों के दो बच्चे, रामनिवास, राजीव, छन्नूलाल की एक-एक बछिया ने दम तोड़ दिया। गांव के प्रभुदयाल, दीना, लालाराम, राजकुमार, ह्दयराम, कुंवर सिंह, राजीव, ओमकार व सुनील सहित दर्जनों ग्रामीणों के मवेशी बीमार हैं।
पड़ोसी गांव टिकुरियनपुर्वा के शंकर लाल की भैंस व उसका बच्चा बीमारी के चलते मर गया। गांव मवइया के अशोक शाक्य की भैंस भी चपेट में आकर मर गई। ग्राम प्रधान की सूचना पर पशु चिकित्साधिकारी तालग्राम डा. विकराल, अपनी पूरी चिकित्सकोें की टीम के साथ गांव पहुंच गए।
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उन्होेंने मवेशियों का टीकाक रण करवाया है। इधर, तालग्राम के पशु चिकित्साधिकारी डा. विकराल ने बताया कि मवेशियो की मौत बीमारी से नहीं हुई है। खेतों में उगी घास को खत्म करने के लिए किसानों द्वारा डाली गई जहरीली दवा पड़ी हुई घास को खाने से मवेशियों की मौत हुई है।
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इसमें गांव के अमरपाल, सोभरन पाल, महेंद्र ठाकुर, सुनील वर्मा, राजबहादुर, की भैंसो ने अचानक दम तोड़ दिया। वहीं गांव के छेदीलाल के मवेशियों के दो बच्चे, रामनिवास, राजीव, छन्नूलाल की एक-एक बछिया ने दम तोड़ दिया। गांव के प्रभुदयाल, दीना, लालाराम, राजकुमार, ह्दयराम, कुंवर सिंह, राजीव, ओमकार व सुनील सहित दर्जनों ग्रामीणों के मवेशी बीमार हैं।
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पड़ोसी गांव टिकुरियनपुर्वा के शंकर लाल की भैंस व उसका बच्चा बीमारी के चलते मर गया। गांव मवइया के अशोक शाक्य की भैंस भी चपेट में आकर मर गई। ग्राम प्रधान की सूचना पर पशु चिकित्साधिकारी तालग्राम डा. विकराल, अपनी पूरी चिकित्सकोें की टीम के साथ गांव पहुंच गए।
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उन्होेंने मवेशियों का टीकाक रण करवाया है। इधर, तालग्राम के पशु चिकित्साधिकारी डा. विकराल ने बताया कि मवेशियो की मौत बीमारी से नहीं हुई है। खेतों में उगी घास को खत्म करने के लिए किसानों द्वारा डाली गई जहरीली दवा पड़ी हुई घास को खाने से मवेशियों की मौत हुई है।