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Kannauj News: छह हिस्ट्रीशीटरों का अपराध खाका नष्ट
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तिर्वा। शासन के निर्देश पर बुधवार को कोतवाली क्षेत्र के छह हिस्ट्रीशीटर अपराधियों के अपराध खाके जलाकर नष्ट कर दिए गए। इन सभी अपराधियों का निधन हो चुका है। यह कार्रवाई सीओ कुलवीर सिंह की मौजूदगी में संपन्न हुई।
क्षेत्र के जिन अपराधियों के नाम हिस्ट्रीशीट में दर्ज थे, उनमें जय सिंह निवासी हरचंदापुर, अर्जुन गिहार निवासी बौद्ध नगर, राजवीर उर्फ अनिल निवासी मनीपुरवा, समर बहादुर निवासी पुरसा, राजबहादुर उर्फ बहादुर निवासी कुलिया किराया और विवेक निवासी बलनपुर शामिल थे। ये सभी तिर्वा कोतवाली क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर के रूप में सूचीबद्ध थे।
सीओ कुलवीर सिंह ने बताया कि यह प्रक्रिया अभिलेखों के अद्यतन और नियमानुसार निस्तारण के तहत की गई है। शासन के निर्देशानुसार, मृत अपराधियों के रिकॉर्ड को समाप्त करने की यह एक औपचारिक कार्रवाई थी। इस प्रक्रिया में उनके अपराध से संबंधित सभी दस्तावेजों को जलाकर नष्ट किया गया। ऐतिहासिक रिकॉर्ड का निस्तारण इस प्रकार की कार्रवाई से पुलिस रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने में मदद मिलती है। पुराने और अप्रचलित रिकॉर्ड को हटाने से अभिलेखों का प्रबंधन सरल हो जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि केवल सक्रिय और प्रासंगिक जानकारी ही रिकॉर्ड में बनी रहे। इस मामले में, सभी छह हिस्ट्रीशीटरों की मृत्यु हो चुकी थी, इसलिए उनके अपराध खाकों को नष्ट करना नियमानुसार था।
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क्षेत्र के जिन अपराधियों के नाम हिस्ट्रीशीट में दर्ज थे, उनमें जय सिंह निवासी हरचंदापुर, अर्जुन गिहार निवासी बौद्ध नगर, राजवीर उर्फ अनिल निवासी मनीपुरवा, समर बहादुर निवासी पुरसा, राजबहादुर उर्फ बहादुर निवासी कुलिया किराया और विवेक निवासी बलनपुर शामिल थे। ये सभी तिर्वा कोतवाली क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर के रूप में सूचीबद्ध थे।
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सीओ कुलवीर सिंह ने बताया कि यह प्रक्रिया अभिलेखों के अद्यतन और नियमानुसार निस्तारण के तहत की गई है। शासन के निर्देशानुसार, मृत अपराधियों के रिकॉर्ड को समाप्त करने की यह एक औपचारिक कार्रवाई थी। इस प्रक्रिया में उनके अपराध से संबंधित सभी दस्तावेजों को जलाकर नष्ट किया गया। ऐतिहासिक रिकॉर्ड का निस्तारण इस प्रकार की कार्रवाई से पुलिस रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने में मदद मिलती है। पुराने और अप्रचलित रिकॉर्ड को हटाने से अभिलेखों का प्रबंधन सरल हो जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि केवल सक्रिय और प्रासंगिक जानकारी ही रिकॉर्ड में बनी रहे। इस मामले में, सभी छह हिस्ट्रीशीटरों की मृत्यु हो चुकी थी, इसलिए उनके अपराध खाकों को नष्ट करना नियमानुसार था।
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