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Kannauj News: सहकारी समितियों पर तीन दिन से लटके ताले
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कन्नौज। जिले में तीन दिनों से साधन सहकारी समितियों पर ताले लटके हैं। रबी सीजन होने के बावजूद कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जिससे किसानों की बोआई काफी प्रभावित हो रही है। अन्नदाता खाद-बीज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
जिले की 57 समितियों पर हड़ताल का असर है। सदर, छिबरामऊ, तिर्वा और तालग्राम क्षेत्र की अधिकांश समितियों के बाहर रोजाना किसानों की भीड़ लग रही है, लेकिन सचिव नदारद हैं। किसान सुबह से शाम तक इंतजार कर बिना खाद के लौट रहे हैं। समय से डीएपी, यूरिया, एनपीके और बीज न मिलने से गेहूं, चना, मटर और सरसों की बोआई पिछड़ रही है। किसानों का आरोप है कि समितियों के सचिव वेतन न मिलने का हवाला देकर हड़ताल पर हैं, लेकिन इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
मजबूरी में किसानों को निजी दुकानों से डीएपी महंगे दामों में खरीदनी पड़ रही है। कई जगह ओवर-रेटिंग की खुली लूट हो रही है। किसान विजय, रामकिशोर, राशिद, मनोज कटियार, दिनेश ने बताया कि रबी सीजन में 15 नवंबर तक बोआई पूरी हो जानी चाहिए। समितियां बंद होने से 30 फीसदी बोआई भी नहीं हो पाई है। वहीं, किसानों ने चेतावनी दी कि यदि दो दिन में समितियां नहीं खुलीं तो वह कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन करेंगे।
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समिति कर्मियों की हड़ताल से मायूस लौट रहे अन्नदाता
सौरिख। 22 अक्तूबर से कर्मचारी नियमितीकरण और वेतन विसंगति को लेकर लखनऊ ईको गार्डन में धरने पर हैं, जिससे समितियों पर ताले लटके हैं। किसान संजू यादव, योगेंद्र सिंह, लालचंद ने बताया कि समिति बंद होने से बाजार से महंगी डीएपी खरीदनी पड़ रही है। यूरिया, पोटाश भी महंगे मिल रहे हैं। लागत बढ़ने से बोआई प्रभावित हो रही है। 15 दिन बाद गेहूं की बोआई शुरू होने पर संकट और बढ़ेगा। ब्लॉक अध्यक्ष सुखवीर सिंह ने कहा कि हड़ताल खत्म होने के बाद ही वितरण शुरू होगा।
वर्जन
जिले में तीन पीसीएफ और दो उपभोक्ता समितियां खुली हैं। सचिवों की कलम बंद हड़ताल कब तक चलेगी यह जानकारी नहीं है। - उदय शंकर, एआर कोऑपरेटिव
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जिले में खाद का पर्याप्त स्टॉक है। डीएपी, यूरिया की कोई कमी नहीं। किसान समितियों व निजी दुकानों से बिल लेकर खाद खरीदें। ओवर-रेटिंग की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। - संतलाल गुप्ता, जिला कृषि अधिकारी
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जिले की 57 समितियों पर हड़ताल का असर है। सदर, छिबरामऊ, तिर्वा और तालग्राम क्षेत्र की अधिकांश समितियों के बाहर रोजाना किसानों की भीड़ लग रही है, लेकिन सचिव नदारद हैं। किसान सुबह से शाम तक इंतजार कर बिना खाद के लौट रहे हैं। समय से डीएपी, यूरिया, एनपीके और बीज न मिलने से गेहूं, चना, मटर और सरसों की बोआई पिछड़ रही है। किसानों का आरोप है कि समितियों के सचिव वेतन न मिलने का हवाला देकर हड़ताल पर हैं, लेकिन इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
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मजबूरी में किसानों को निजी दुकानों से डीएपी महंगे दामों में खरीदनी पड़ रही है। कई जगह ओवर-रेटिंग की खुली लूट हो रही है। किसान विजय, रामकिशोर, राशिद, मनोज कटियार, दिनेश ने बताया कि रबी सीजन में 15 नवंबर तक बोआई पूरी हो जानी चाहिए। समितियां बंद होने से 30 फीसदी बोआई भी नहीं हो पाई है। वहीं, किसानों ने चेतावनी दी कि यदि दो दिन में समितियां नहीं खुलीं तो वह कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन करेंगे।
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समिति कर्मियों की हड़ताल से मायूस लौट रहे अन्नदाता
सौरिख। 22 अक्तूबर से कर्मचारी नियमितीकरण और वेतन विसंगति को लेकर लखनऊ ईको गार्डन में धरने पर हैं, जिससे समितियों पर ताले लटके हैं। किसान संजू यादव, योगेंद्र सिंह, लालचंद ने बताया कि समिति बंद होने से बाजार से महंगी डीएपी खरीदनी पड़ रही है। यूरिया, पोटाश भी महंगे मिल रहे हैं। लागत बढ़ने से बोआई प्रभावित हो रही है। 15 दिन बाद गेहूं की बोआई शुरू होने पर संकट और बढ़ेगा। ब्लॉक अध्यक्ष सुखवीर सिंह ने कहा कि हड़ताल खत्म होने के बाद ही वितरण शुरू होगा।
वर्जन
जिले में तीन पीसीएफ और दो उपभोक्ता समितियां खुली हैं। सचिवों की कलम बंद हड़ताल कब तक चलेगी यह जानकारी नहीं है। - उदय शंकर, एआर कोऑपरेटिव
जिले में खाद का पर्याप्त स्टॉक है। डीएपी, यूरिया की कोई कमी नहीं। किसान समितियों व निजी दुकानों से बिल लेकर खाद खरीदें। ओवर-रेटिंग की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। - संतलाल गुप्ता, जिला कृषि अधिकारी