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अनदेखी के चलते बंद होने की कगार पर काऊ मिल्क प्लांट

Tue, 23 Aug 2022 11:24 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 23 Aug 2022 11:24 PM IST
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Cow Milk Plant on the verge of closure
कन्नौज। अफसरों की अनदेखी के चलते देश का इकलौता काऊ मिल्क प्लांट बंद होने की कगार पर है। एक लाख लीटर पैकेजिंग की क्षमता वाले प्लांट में महज 10 हजार लीटर दूध की पैकेजिंग का काम चल रहा है। घाटे में चल रहे इस प्लांट में श्रमिकों का भुगतान और अन्य खर्च बचाने के लिए 48 घंटे में सिर्फ एक बार चलाया जाता है।
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गौ पशु पालन को बढ़ावा देकर पशुओं को लाभांवित करने के लिए उमर्दा बढ़नपुर वीरहार में 2018 में 140.39 करोड़ की लागत से काऊ मिल्क प्लांट लगाया गया था। एक लाख लीटर पैकेजिंग की क्षमता वाले इस प्लांट से सिर्फ गाय के दूध से पनीर, घी, मक्खन, दही, मट्ठा और दूध की पैकेजिंग शुरू की गई थी। प्रदेश के 14 जनपदों में 150 मिल्क कूलर स्थापित कर दुग्ध संघ केंद्रों से दूध की बड़े पैमाने पर खरीद होने लगी थी। अफसरों की अनदेखी के चलते पशु पालकों का भुगतान नहीं हुआ। इससे धीरे-धीरे दूध की आवक कम हो गई। पनीर, मट्ठा, घी, मक्खन और दही बनना बंद हो गया। मौजूदा समय सिर्फ 10 हजार लीटर दूध की पैकेजिंग कर कानपुर, कन्नौज और फर्रुखाबाद में आपूर्ति की जा रही है।
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प्लांट में मौजूदा समय 65 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी कार्यरत है। दूध की कम आवक के चलते दो दिन में सिर्फ एक बार खर्च बचाने के लिए प्लांट चलाया जाता है। अफसरों की अनदेखी और समय पर भुगतान न होने के कारण काऊ मिल्क प्लांट बंद होने की कगार है।
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काऊ मिल्क प्लांट के जनरल मैनेजर मनीष चौधरी का कहना है कि प्रतिमाह प्लांट संचालित करने में करीब 60 लाख का खर्च आ रहा है। कम आवक के चलते प्लांट घाटे में है। शासन से बजट की मांग की गई है। अगर जल्द बजट न मिला, तो प्लांट संचालन करना मुश्किल हो जाएगा।
गाय की जगह मिश्रित दूध की पैकेजिंग
काऊ मिल्क प्लांट का मुख्य उद्देश्य था कि सिर्फ गाय के दूध से ही कई तरह के उत्पाद तैयार किए जाएंगे। पर्याप्त मात्रा में गाय का दूध न मिलने से यह योजना परवाना नहीं चढ़ पाई। मौजूदा समय मिश्रित दूध की पैकेजिंग की जाती है।

नहीं शुरू हो सका अल्ट्रा हाई टंपरेचर प्लांट
काऊ मिल्क प्लांट में हाई टंपरेचर प्लांट स्थापित है। इस प्लांट में पॉलिथीन दूध की पैकिंग की गुणवत्ता 90 दिन तक और केन की क्षमता 180 है। बजट के अभाव में यह अल्ट्रा टंपरेचर प्लांट निर्माण कार्य के बाद से शुरू भी नहीं हो सका।
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