{"_id":"5a3aa5e94f1c1b4e718ba634","slug":"cold-in-the-grip-and-104-children","type":"story","status":"publish","title_hn":"ठंड की चपेट में आए और 104 बच्चे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ठंड की चपेट में आए और 104 बच्चे
अमर उजाला/कन्नौज
Updated Wed, 20 Dec 2017 11:33 PM IST
विज्ञापन
मेडिसीन वार्ड में मरीजों का उपचार करते डा. मृदुल भूषण।
- फोटो : amar ujala
राजकीय मेडिकल कालेज में दूसरे दिन भी ठंड से पीड़ित बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ। बाल रोग विभाग में ठंड से पीड़ित 104 बच्चे पहुंचे। अधिकांश बच्चों में कोल्ड फीवर की समस्या मिली। कई बच्चों में शीतलहर के प्रकोप के कारण त्वचा रोग भी मिला। मंगलवार को भी मेडिकल कालेज में ठंड की चपेट में आने से 96 बच्चों का उपचार हुआ था। दो दिनों में मेडिकल कालेज में 200 बच्चों का इलाज हो चुका है।
बाल रोग विभाग के एचओडी डा. एसजी मिश्रा ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से चल रही शीतलहर के कारण बच्चे कोल्ड फीवर से ग्रसित हो रहे हैं। इस कारण बाल रोग विभाग में मरीजों की तादाद बढ़ रही है। बुधवार को ओपीडी के दौरान उनके अलावा बाल रोग विशेषज्ञ डा. मारकंडे, डा. नरेंद्र सिंह, डा. नीतू व डा. अभिषेक ने बच्चों का उपचार किया। पूरे दिन में ठंड से पीड़ित 104 बच्चों का इलाज किया गया है।
साथ ही अभिभावकों को बच्चों को ठंड से बचाने के उपाय भी बताए गए हैं। उन्हें बताया गया है कि बच्चों को नहलाने के दौरान गर्म पानी का इस्तेमाल करें, स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए विशेष सावधानी बरतें, उन्हें ताजा भोजन व उबला पानी दें। बच्चों को ऐसे कपड़े पहनाएं, जिससे उनके सारे अंग ढके रहें। नवजात या फिर तीन साल तक के बच्चों को खुले स्थान पर ले जाने से बचें।
विज्ञापन
विज्ञापन
बाल रोग विभाग के एचओडी डा. एसजी मिश्रा ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से चल रही शीतलहर के कारण बच्चे कोल्ड फीवर से ग्रसित हो रहे हैं। इस कारण बाल रोग विभाग में मरीजों की तादाद बढ़ रही है। बुधवार को ओपीडी के दौरान उनके अलावा बाल रोग विशेषज्ञ डा. मारकंडे, डा. नरेंद्र सिंह, डा. नीतू व डा. अभिषेक ने बच्चों का उपचार किया। पूरे दिन में ठंड से पीड़ित 104 बच्चों का इलाज किया गया है।
विज्ञापन
साथ ही अभिभावकों को बच्चों को ठंड से बचाने के उपाय भी बताए गए हैं। उन्हें बताया गया है कि बच्चों को नहलाने के दौरान गर्म पानी का इस्तेमाल करें, स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए विशेष सावधानी बरतें, उन्हें ताजा भोजन व उबला पानी दें। बच्चों को ऐसे कपड़े पहनाएं, जिससे उनके सारे अंग ढके रहें। नवजात या फिर तीन साल तक के बच्चों को खुले स्थान पर ले जाने से बचें।
विज्ञापन