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Kannauj News: चातुर्मास 29 जून से, मांगलिक कार्यक्रमों पर विराम
Sun, 25 Jun 2023 11:36 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
Updated Sun, 25 Jun 2023 11:36 PM IST
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तालग्राम। इस बार 29 जून से चातुर्मास शुरू हो रहा है। इस वर्ष चातुर्मास चार नहीं, बल्कि पांच माह का होगा। चातुर्मास में इस बार सावन दो माह का होगा। इसलिए चातुर्मास में सीधे एक माह का इजाफा हो रहा है।
मान्यता के अनुसार, चातुर्मास में सृष्टि के पालनहार कहे जाने वाले भगवान विष्णु क्षीरसागर में विश्राम करते हैं। ऐसे में 29 जून से लेकर 23 नवंबर तक यानी 148 दिनों तक शादी-ब्याह समेत किसी भी तरह के मांगलिक कार्य नहीं होंगे। आचार्य पंडित कामिनी प्रसाद शुक्ला ने बताया कि समस्त मांगलिक कार्य भगवान विष्णु के जागृत अवस्था में ही किए जाते हैं। इस समय विष्णु भगवान के शयन करने से विवाह, वर वरण, कन्या वरण, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार, महायज्ञ का शुभारंभ, कर्णवेध, मुंडन आदि कार्यों का निषेध किया गया है। लेकिन, कुछ कार्य इस समय भी किए जाते हैं। इनमें पुंसवन, प्रसूति स्नान, इष्टिका दहन, नामकरण, अन्नप्राशन, शिव भोले की प्राण प्रतिष्ठा आदि किए जा सकते हैं। चातुर्मास के पहले महीने सावन में हरी सब्जी, भादो में दही, आश्विन मास में दूध और कार्तिक में दाल नहीं खानी चाहिए। साथ ही इस दौरान पान- मसाला, सुपारी, मांस और मदिरा का सेवन भी वर्जित होता है।
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मान्यता के अनुसार, चातुर्मास में सृष्टि के पालनहार कहे जाने वाले भगवान विष्णु क्षीरसागर में विश्राम करते हैं। ऐसे में 29 जून से लेकर 23 नवंबर तक यानी 148 दिनों तक शादी-ब्याह समेत किसी भी तरह के मांगलिक कार्य नहीं होंगे। आचार्य पंडित कामिनी प्रसाद शुक्ला ने बताया कि समस्त मांगलिक कार्य भगवान विष्णु के जागृत अवस्था में ही किए जाते हैं। इस समय विष्णु भगवान के शयन करने से विवाह, वर वरण, कन्या वरण, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार, महायज्ञ का शुभारंभ, कर्णवेध, मुंडन आदि कार्यों का निषेध किया गया है। लेकिन, कुछ कार्य इस समय भी किए जाते हैं। इनमें पुंसवन, प्रसूति स्नान, इष्टिका दहन, नामकरण, अन्नप्राशन, शिव भोले की प्राण प्रतिष्ठा आदि किए जा सकते हैं। चातुर्मास के पहले महीने सावन में हरी सब्जी, भादो में दही, आश्विन मास में दूध और कार्तिक में दाल नहीं खानी चाहिए। साथ ही इस दौरान पान- मसाला, सुपारी, मांस और मदिरा का सेवन भी वर्जित होता है।
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