{"_id":"61969bbf32fe4873a56e3bc4","slug":"business-will-flourish-with-incense-sticks-made-of-jute-dung-kannauj-news-knp664786313","type":"story","status":"publish","title_hn":"जूट, गोबर से बनी अगरबत्ती से महकेगा कारोबार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जूट, गोबर से बनी अगरबत्ती से महकेगा कारोबार
विज्ञापन
कारखाने में ऑटोमेटिक मशीन से अगरबत्ती बनाते कर्मचारी।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। अब नारियल के जूट और गोबर से धूपबत्ती और अगरबत्ती का कारोबार महकेगा। कारोबारियों को सहूलियत और बढ़ावा देने के लिए एफएफडीसी ने नारियल के जूट और गोबर को सुखाकर कच्चा माल तैयार करने पर शोध किया है। इसके पाउडर से बनी धूपबत्ती और अगरबत्ती के धुआं से नुकसान नहीं होगा। अगरबत्ती कारोबारियों को इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। अभी शहर से सालाना 400 करोड़ का कारोबार होता है। यह टर्न ओवर घरेलू और निर्यात बाजार से है।
मौजूदा समय शहर में करीब 40 धूप-अगरबत्ती कारखाने संचालित हैं। 600 से अधिक ऑटोमेटिक मशीनों से धूप-अगरबत्ती बनाई जाती है। इस कारोबार से करीब तीन हजार परिवार जुड़े हैं। सालाना 400 करोड़ कारोबार है। कई उद्यमी धूप-अगरबत्ती निर्यात करते हैं। सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र (एफएफडीसी) ने नारियल के जूट और गाय के गोबर से धूप-अगरबत्ती बनाने पर शोध किया है। इन्हें सुखाकर पाउडर बनाने के बाद अन्य कच्चे माल का मिश्रण कर अगरबत्ती, धूपबत्ती और हवन-पूजन सामग्री तैयार की जाएगी। इसमें लागत कम आएगी। 20 से 30 फीसदी बचत होगी।
एफएफडीसी के निदेशक शक्ति विनय शुक्ला ने बताया कि यह धूप-अगरबत्ती ईको फ्रेंडली होगी। इसके धुआं से नुकसान नहीं होगा। कारोबारी मनमाफिक इत्र का प्रयोग कर सकेंगे। जल्द शहर के धूप-अगरबत्ती कारोबारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
मौजूदा समय शहर में करीब 40 धूप-अगरबत्ती कारखाने संचालित हैं। 600 से अधिक ऑटोमेटिक मशीनों से धूप-अगरबत्ती बनाई जाती है। इस कारोबार से करीब तीन हजार परिवार जुड़े हैं। सालाना 400 करोड़ कारोबार है। कई उद्यमी धूप-अगरबत्ती निर्यात करते हैं। सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र (एफएफडीसी) ने नारियल के जूट और गाय के गोबर से धूप-अगरबत्ती बनाने पर शोध किया है। इन्हें सुखाकर पाउडर बनाने के बाद अन्य कच्चे माल का मिश्रण कर अगरबत्ती, धूपबत्ती और हवन-पूजन सामग्री तैयार की जाएगी। इसमें लागत कम आएगी। 20 से 30 फीसदी बचत होगी।
विज्ञापन
एफएफडीसी के निदेशक शक्ति विनय शुक्ला ने बताया कि यह धूप-अगरबत्ती ईको फ्रेंडली होगी। इसके धुआं से नुकसान नहीं होगा। कारोबारी मनमाफिक इत्र का प्रयोग कर सकेंगे। जल्द शहर के धूप-अगरबत्ती कारोबारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
विज्ञापन