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Kannauj News: गुगरापुर ब्लॉक के इस्माइलपुर में बनेगा पक्षी विहार
Tue, 19 May 2026 01:04 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
Updated Tue, 19 May 2026 01:04 AM IST
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गुगरापुर (कन्नौज)। जिले में आर्द्रभूमि (नम भूमि) के संरक्षण की कवायद तेज हो गई है। इसके लिए ब्लॉक क्षेत्र के इस्माइलपुर गांव में नमभूमि पर पक्षी विहार बनाया जाएगा, यहां पक्षियों के प्रवास एवं प्रजनन के लिए प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। वन विभाग के अधिकारियों ने इसके लिए परीक्षण भी किया है और इसको अधिसूचित करने की तैयारी भी चल रही है।
गुगरापुर क्षेत्र के इस्माइलपुर व इसके आसपास की भूमि को वेटलैंड के रूप में जाना जाता है। यहां नमभूमि के अलावा पक्षियों के प्रजनन व प्रवास के लिए प्राकृतिक वातावरण भी है। इसके अलावा भोजन की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता रहती है। हालांकि राजस्व विभाग ने जिले में करीब 100 वेटलैंड चिह्नित किए हैं, इसमें इस्माइलपुर, निगोह खास व असेह प्रमुख हैं। इन क्षेत्रों की कैडेस्ट्रल और जीआईएस मैपिंग के साथ प्रस्ताव तैयार करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
वेटलैंड्स भूमि के गुर्दे की तरह प्रदूषकों को अवशोषित कर जल की गुणवत्ता सुधारती हैं और वायुमंडल से बड़ी मात्रा में कार्बन संग्रहित कर ग्रीनहाउस गैसों के प्रभाव को कम करने में सहायक होती हैं। उन्होंने बताया कि आर्द्रभूमि विभिन्न जीव-जंतुओं और पक्षियों का प्राकृतिक आवास भी हैं। इनके संरक्षण से जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में जल संकट से निपटने में मदद मिलेगी।
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डॉ. हेमंत कुमार सेठ, प्रभागीय वनाधिकारी
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गुगरापुर क्षेत्र के इस्माइलपुर व इसके आसपास की भूमि को वेटलैंड के रूप में जाना जाता है। यहां नमभूमि के अलावा पक्षियों के प्रजनन व प्रवास के लिए प्राकृतिक वातावरण भी है। इसके अलावा भोजन की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता रहती है। हालांकि राजस्व विभाग ने जिले में करीब 100 वेटलैंड चिह्नित किए हैं, इसमें इस्माइलपुर, निगोह खास व असेह प्रमुख हैं। इन क्षेत्रों की कैडेस्ट्रल और जीआईएस मैपिंग के साथ प्रस्ताव तैयार करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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वेटलैंड्स भूमि के गुर्दे की तरह प्रदूषकों को अवशोषित कर जल की गुणवत्ता सुधारती हैं और वायुमंडल से बड़ी मात्रा में कार्बन संग्रहित कर ग्रीनहाउस गैसों के प्रभाव को कम करने में सहायक होती हैं। उन्होंने बताया कि आर्द्रभूमि विभिन्न जीव-जंतुओं और पक्षियों का प्राकृतिक आवास भी हैं। इनके संरक्षण से जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में जल संकट से निपटने में मदद मिलेगी।
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डॉ. हेमंत कुमार सेठ, प्रभागीय वनाधिकारी