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आलू उत्पादन में बाधा बनेगा झुलसा रोग

Sun, 04 Jan 2015 12:00 AM IST
अमर उजाला, ब्यूरो, कन्नौज
अमर उजाला, ब्यूरो, कन्नौज Updated Sun, 04 Jan 2015 12:00 AM IST
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Bacterial blight in potato production will be a hurdle
करीब एक पखवाड़े से खराब मौसम के चलते आलू की फसल में झुलसा रोग तेजी से फैल रहा है। कीटनाशक दवाओं का भी इस पर कोई असर नहीं हो रहा है। वहीं बारिश से भी आलू की फसल को काफी हद तक नुकसान पहुंचाया है। इसके चलते आलू किसान उत्पादन कम होने की आशंका जता रहे हैं।
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कोहरे के कारण पड़ने वाला पाला आलू के लिए सबसे अधिक घातक है। करीब पंद्रह दिनों तक घने कोहरे के कारण खेतों में खड़ी आलू की फसल में झुलसा रोग तेजी के साथ फैल गया। किसानों ने झुलसा रोग से फसल को बचाने के लिए कीटनाशक दवाओं का प्रयोग किया, लेकिन उसका कुछ खास असर नजर नहीं आया।
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नववर्ष की पहली सुबह से शुरू हुई बारिश ने बाकी कसर पूरी कर दी। इससे आलू की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा राई की फसल में माहू रोग तेजी के साथ फैल रहा है। मटर में पाउडरी मिलडयू रोग के फैलने की संभावना है।
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जिला कृषि अधिकारी अभिनंदन सिंह यादव ने कहा कि झुलसा रोग अधिक पाले में सबसे अधिक फैलता है। यह रोग आलू की फसल के लिए सबसे अधिक घातक साबित होता है। एक बार किसी खेत में इस रोग के फैलने पर उसको नियंत्रित कर पाना कठिन होता है।

उन्होंने सभी किसानों को सलाह दी कि वह कीटनाशक दवाओं का छिड़काव समय-समय पर करते रहें। कहा कि धूप नहीं निकलने से किसानों को काफी हद तक राहत है। यदि धूप चटक निकल आई तो परपरा रोग के भी फैलने की आशंका है। इन रोगों के लगने पर उत्पादन काफी गिरावट आ जाती है।
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झुलसा रोग पर नहीं कारगर दवा
किसान रामप्रकाश निवासी मियागंज, इस्लाम मढ़हरपुर, सुरेंद्र सिंह यादव गाजीपुर्वा, अजय सिंह भदौरिया बहादुरपुर उज्जैना का कहना है कि झुलसा रोग खेतों में तेजी के साथ फैल रहा है। कीटनाशक दवाओं से रोग की रोकथाम के लिए छिड़काव किया जा रहा है, लेकिन उसका कोई खास असर नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा कि बारिश भी इसमें बाधा बन रही है। छिड़काव के बाद होने वाली बारिश से दवा का प्रभाव कम हो जाता है।
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रोगों के चलते घटेगा उत्पादन
आलू की फसल इस बार नवंबर माह के मौसम को देखते हुए सबसे अच्छी बताई जा रही थी, लेकिन दिसंबर माह में मौसम ने ऐसी करवट ली, जिससे आलू की फसल कई रोगों से ग्रसित हो गई है। किसान गिरजेश पाठक, कन्हैया तिवारी, राधा किशन वर्मा, दौलतराम कटियार का कहना है कि आलू तमाम बीमारियों से ग्रसित हो चुका है। ऐसे में खुदाई के दौरान आलू सही सलामत निकल आए, यही सबसे बड़ी बात है।

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छोटे किसानों को नहीं मिलेगा लाभ
पिछले तीन सालों से मौसम की खराबी के चलते करीब 20 से 25 फीसदी आलू के उत्पादन में गिरावट आ रही है। जिसका सीधा लाभ कहीं न कहीं आलू किसानों को मिल रहा है। उत्पादन कम होने से शीतगृहों में आलू भंडारित करने में भी कोई मारा-मारी नहीं होती है। हालांकि इसका लाभ छोटे किसान नहीं उठा पाते हैं। अगली फसल बोने के चक्कर में अधिकतर छोटे किसान आलू की बिक्री कर देते हैं। जिसका सीधा लाभ व्यापारी उठाते हैं।
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