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मुझ पर मेहरबानी रसूल की है...
अमर उजाला ब्यूरो/कन्नौज
Updated Wed, 04 May 2016 12:03 AM IST
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कव्वाली सुनाते फतेहपुर के शकील ताज।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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क्षेत्र के गांव सतौरा में चांद कमेटी की ओर से आयोजित हजरत सदन शाह बाबा रहमतुल्लाह अलैह के 26वें उर्स को धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान बाबा की मजार पर गागर और चादर चढ़ाने का दौर चला। रात में जवाबी कव्वाली के मुकाबले का आयोजन किया गया। इसमें बाहर से आए कलाकारों ने पूरी रात कव्वालियां सुनाकर लोगों का मन मोह लिया। कव्वाली सुनने के लिए आसपास गांवों की भारी भीड़ उमड़ी।
उर्स में प्रतापगढ़ से आईं कव्वाल शबनम नाज ने मेरे हाथों में कमली वालों के कदमों की धूल है, मुझ पर मेहरबानी रसूल की है, क्या बिगाड़ेंगे जमाने वाले, मेरे ख्वाजा हैं मुझको बनाने वाले, सुनाकर वाहवाही बटोरी। उन्होंने अजमेर नगर के राजा जी, मेरे वली के ख्वाजा जी हैं, ख्वाजा जी मेरी सुनने वाला, कव्वाली भी सराही गई। फतेहपुर से आए कव्वाज शकील ताज ने जमादार मिलेंगे न जमींदार मिलेंगे, जन्नत में भले ही वफादार मिलेंगे।
दिल की लगी है क्या, ये जरा दिल लगाकर देख, आंसू बहाकर देख, ये राज जानना है तो खुद को जलाकर देख कव्वाली पर खूब तालियां बजीं। वहीं दूर पर्वत से जा रहा है कोई, ऐसा लगता है बुला रहा है कोई, और चश्म बड़े नमकीन हो जाएं, ईद से पहले ईद हो जाए, जो भी देखे मेरे सैय्यद बाबा का मुरीद हो जाए, कव्वाल भी सराही गई। उर्स देखने के लिए गांव सुजानसराय, गदनापुर, भूड़पुरवा, अलीनगर, छोछापुर, मतौली, पचोर, सीहपुर समेत कई गांवों के लोग पहुंचे।
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कार्यक्रम स्थल पर तमाम तरह की दुकानें लगीं, जिस पर लोगों ने जमकर खरीदारी की। सुबह के वक्त मौलानाओं ने फातिहा पढ़कर मुल्क में अमनचैन कायम रहने की दुआ मांगी। आयोजक अकील खां, कमेटी के अध्यक्ष हसमुद्दीन, खजांची आफताब, मुनीश, इकराम, देवेंद्र सिंह, धनेश पाल, संतोष प्रजापति, मंगली, असलम, शरीफ खां, मुकेश सिंह, बाबू खां आदि ने व्यवस्थाएं संभालीं।
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उर्स में प्रतापगढ़ से आईं कव्वाल शबनम नाज ने मेरे हाथों में कमली वालों के कदमों की धूल है, मुझ पर मेहरबानी रसूल की है, क्या बिगाड़ेंगे जमाने वाले, मेरे ख्वाजा हैं मुझको बनाने वाले, सुनाकर वाहवाही बटोरी। उन्होंने अजमेर नगर के राजा जी, मेरे वली के ख्वाजा जी हैं, ख्वाजा जी मेरी सुनने वाला, कव्वाली भी सराही गई। फतेहपुर से आए कव्वाज शकील ताज ने जमादार मिलेंगे न जमींदार मिलेंगे, जन्नत में भले ही वफादार मिलेंगे।
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दिल की लगी है क्या, ये जरा दिल लगाकर देख, आंसू बहाकर देख, ये राज जानना है तो खुद को जलाकर देख कव्वाली पर खूब तालियां बजीं। वहीं दूर पर्वत से जा रहा है कोई, ऐसा लगता है बुला रहा है कोई, और चश्म बड़े नमकीन हो जाएं, ईद से पहले ईद हो जाए, जो भी देखे मेरे सैय्यद बाबा का मुरीद हो जाए, कव्वाल भी सराही गई। उर्स देखने के लिए गांव सुजानसराय, गदनापुर, भूड़पुरवा, अलीनगर, छोछापुर, मतौली, पचोर, सीहपुर समेत कई गांवों के लोग पहुंचे।
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कार्यक्रम स्थल पर तमाम तरह की दुकानें लगीं, जिस पर लोगों ने जमकर खरीदारी की। सुबह के वक्त मौलानाओं ने फातिहा पढ़कर मुल्क में अमनचैन कायम रहने की दुआ मांगी। आयोजक अकील खां, कमेटी के अध्यक्ष हसमुद्दीन, खजांची आफताब, मुनीश, इकराम, देवेंद्र सिंह, धनेश पाल, संतोष प्रजापति, मंगली, असलम, शरीफ खां, मुकेश सिंह, बाबू खां आदि ने व्यवस्थाएं संभालीं।