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अफसरों के गले की फांस बना बस हादसा, विमल बस सर्विस के संचालन में फंस सकते हैं अफसर

Fri, 17 Jan 2020 12:27 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jan 2020 12:27 AM IST
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aphasaron ke gale kee phaans bana bas haadasa, vimal bas sarvis ke sanchaalan mein phans sakate hain aphasar
एडीएम गजेंद्र सिंह। - फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। जिले में विमल बस सर्विस का संचालन अफसरों के गले की फांस बन गया है। डीएम रवींद्र कुमार के एडीएम को सौंपी गई मजिस्ट्रेटी जांच में इन बसों के संचालन के अलावा गुरसहायगंज और छिबरामऊ कोतवाली पुलिस की भूमिका भी जांच के घेरे में है। जांच अधिकारी ने हर बिंदु पर गंभीरता से जांच करने की बात कही है। उधर, मजिस्ट्रेटी जांच के दूसरे दिन भी किसी ने जांच अधिकारी के सामने प्रस्तुत होकर अपने बयान दर्ज नहीं कराए हैं।
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एआरटीओ संजय कुमार झा और आरआई जितेंद्र सिंह की 10 बिंदुओं की जांच से स्पष्ट हो चुका है कि बस मानक के मुताबिक नहीं थी। इमरजेंसी दरवाजा नहीं था, बस की लंबाई बढ़ाई गई थी, बस के पिछले हिस्से में कांच की जगह स्टील की चादर लगाई गई थी। बस के दरवाजे की चौड़ाई को भी घटाया गया था। इससे हादसे के बाद सभी यात्री बस से उतर नहीं सके। अंदर फंस जाने से कई की मौत हो गई। जिन 10 बिंदुओं पर एआरटीओ कन्नौज ने जांच की थी, उनमें से छह बिंदुओं पर बस मानक विहीन मिली।
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एआरटीओ और आरआई की संयुक्त जांच रिपोर्ट 13 जनवरी को आरटीओ कानपुर संजय सिंह को भेज दी गई थी। यानी एआरटीओ की जांच रिपोर्ट खुद कह रही है कि बस मानक विहीन थी। ऐसे में सवाल उठता है कि फिर बस का संचालन जिले में कैसे हो रहा था। जिम्मेदार अफसरों ने कार्रवाई क्यों नहीं की। क्या कारण रहा कि बस संचालन के लिए अफसरों की हरी झंडी मिलती रही।
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एआरटीओ संजय कुमार झा का तर्क है कि उन्हें बस हादसे से कुछ दिन पहले परिवहन निगम के अफसरों ने जिन अवैध बसों की सूची सौंपी थी, उसमें हादसे का शिकार बस नहीं थी। इसके अलावा बस को फर्रुखाबाद से फिटनेस प्रमाणपत्र जारी हुआ था। ऐसे में बस का संचालन कैसे रोका जा सकता है। इन सबके बीच यह सवाल भी खड़ा होता है कि जब बस में इमरजेंसी दरवाजा होने का नियम है तो एआरटीओ को फिटनेस प्रमाणपत्र चेक करते समय यह क्यों नहीं दिखा। बस के पीछे के हिस्से को कांच की जगह स्टील की चादर से ढक दिया गया था। यह क्यों नजर नहीं आया।
इन सबके अलावा टूरिस्ट परमिट पर बस लंबे समय से गुरसहायगंज और छिबरामऊ में फिक्स प्वाइंट से सवारियों को भर और उतार रही थी। टूरिस्ट परमिट पर ऐसा करना नियमों के विपरीत है। एआरटीओ कन्नौज को यह भी नजर नहीं आया। गुरसहायगंज और छिबरामऊ पुलिस पर भी बस के संचालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनकी भूमिका भी संदेह के घेरे में है। सूत्र बताते हैं कि दोनों कोतवाली की पुलिस हाथ गरम कर बस का संचालन करा रही थी। इतने सब बिंदु होने के बाद जांच में इन्हें नजरअंदाज करना बेहद मुश्किल दिखता है।

पूरे मामले में हर किसी की भूमिका की गंभीरता से जांच की जा रही है। 20 जनवरी तक लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे। जांच में कई बिंदु शामिल किए गए हैं। बिना किसी दबाव के जांच होगी। रिपोर्ट जिलाधिकारी के स्तर से शासन को भेजी जाएगी। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होना तय है।
-गजेंद्र कुमार, उपजिलाधिकारी कन्नौज।
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