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Kannauj News: स्कूलों के तालों में कैद आंगनबाड़ी केंद्र
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कन्नौज। जिले में आंगनबाड़ी व्यवस्था गंभीर सवालों के घेरे में है। नौनिहालों के पोषण और शुरुआती शिक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले सैकड़ों केंद्र बंद मिले। शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद ग्रीष्मकालीन अवकाश में यह स्थिति है।
जिले में कुल 1615 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें से 1031 केंद्र परिषदीय विद्यालयों के परिसरों में चल रहे हैं। स्कूलों की छुट्टियां शुरू होते ही इन केंद्रों की गतिविधियां ठप हो गई हैं। बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा और पोषाहार वितरण प्रभावित हो रहा है। गर्भवती व धात्री महिलाओं को मिलने वाली सुविधाएं भी बाधित हैं। संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में कई केंद्रों पर ताले लटके मिले। तालग्राम के रजलामऊ और उमर्दा के ठठिया में केंद्र बंद पाए गए। मझिला और भजुरिया में भी विद्यालय बंद होने से आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले लटके थे। अप्रैल और मई का राशन भी कई केंद्रों पर नहीं पहुंचा है। जिले के सिर्फ 263 केंद्रों के पास ही विभाग के अपने भवन हैं।
जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेश वर्मा से सवाल करने पर वह नाराज हो गए। उन्होंने फोन पर जानकारी देने से इन्कार कर दिया। कार्यालय आकर बात करने को कहा। हालांकि, बाद में उन्होंने विभागीय जानकारी उपलब्ध कराई। वहीं डीएम जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने मामले की जांच कराने की बात कही। उन्होंने कहा कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी। अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बच्चों और लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कराया जाएगा।
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नौनिहालों के भविष्य की अनदेखी
जिले की यह तस्वीर सिर्फ अव्यवस्था नहीं, बल्कि उस सिस्टम पर सवाल है जो कागजों में बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की बातें करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर उनके हिस्से में ताले और इंतजार छोड़ देता है। आखिर नौनिहालों के भविष्य की इस अनदेखी का जिम्मेदार कौन है।
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जिले में कुल 1615 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें से 1031 केंद्र परिषदीय विद्यालयों के परिसरों में चल रहे हैं। स्कूलों की छुट्टियां शुरू होते ही इन केंद्रों की गतिविधियां ठप हो गई हैं। बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा और पोषाहार वितरण प्रभावित हो रहा है। गर्भवती व धात्री महिलाओं को मिलने वाली सुविधाएं भी बाधित हैं। संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में कई केंद्रों पर ताले लटके मिले। तालग्राम के रजलामऊ और उमर्दा के ठठिया में केंद्र बंद पाए गए। मझिला और भजुरिया में भी विद्यालय बंद होने से आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले लटके थे। अप्रैल और मई का राशन भी कई केंद्रों पर नहीं पहुंचा है। जिले के सिर्फ 263 केंद्रों के पास ही विभाग के अपने भवन हैं।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेश वर्मा से सवाल करने पर वह नाराज हो गए। उन्होंने फोन पर जानकारी देने से इन्कार कर दिया। कार्यालय आकर बात करने को कहा। हालांकि, बाद में उन्होंने विभागीय जानकारी उपलब्ध कराई। वहीं डीएम जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने मामले की जांच कराने की बात कही। उन्होंने कहा कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी। अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बच्चों और लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कराया जाएगा।
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नौनिहालों के भविष्य की अनदेखी
जिले की यह तस्वीर सिर्फ अव्यवस्था नहीं, बल्कि उस सिस्टम पर सवाल है जो कागजों में बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की बातें करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर उनके हिस्से में ताले और इंतजार छोड़ देता है। आखिर नौनिहालों के भविष्य की इस अनदेखी का जिम्मेदार कौन है।