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Kannauj News: बुखार से बुजुर्ग महिला की जान गई, मरीजों की संख्या भी बढ़ी
Tue, 03 Oct 2023 01:03 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
Updated Tue, 03 Oct 2023 01:03 AM IST
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कन्नौज। संक्रामक बीमारियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। मतौली गांव में बुखार की चपेट में आने से एक दिन पहले दो की मौत हुई थी। अब गौरियापुर गांव में एक बुजुर्ग महिला की बुखार की चपेट में आने से जान चली गई। यहां 100 से ज्यादा लोग बुखार की चपेट में आकर बीमार हो चुके हैं। ग्रामीणों को मुताबिक घर-घर में डेंगू संक्रमित मरीज है। कुछ लोग जिला से बाहर डेंगू का इलाज करवा रहे हैं।
बदलते मौसम में ग्रामीण इलाकों में बुखार का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। गांव-गांव लोग बुखार से तप रहे हैं। निजी अस्पतालों से लेकर सरकारी अस्पतालों में बुखार, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड के मरीजों की भरमार है। आलम यह है कि मतौली और गौरियापुर गांव में 100 से ज्यादा लोग बुखार से पीड़ित है। वहीं, ग्रामीणों की माने तो ज्यादा तर लोगों की जांच में डेंगू की पुष्टि हो रही है। हर घर में कोई न कोई डेंगू संक्रमित मिल रहे है।
रविवार को मतौली गांव की रहने वाली नर्सिंग की छात्रा नित्या पांडेय और राजपाल की बुखार की चपेट में आने से मौत हो गई थी। वहीं लगातार दूसरे दिन सोमवार को पड़ोसी गांव गौरियापुर में 90 वर्षीय रामसुखी की मौत हो गई। पुत्र ईश्वर चंद्र ने बताया कि मां को करीब तीन दिनों से बुखार आ रहा था। गुरसहायगंज में निजी चिकित्सक के पास उनका इलाज चल रहा था। जहां ब्लड जांच में डेंगू होने की बात सामने आई थी।
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इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि उनका पूरा परिवार डेंगू से पीड़ित है। गांव में भी अधिकांश लोग डेंगू संक्रमित है। ज्यादातर लोग निजी चिकित्सक के पास इलाज करवा रहे हैं। ग्रामीणों ने फॉगिंग, दवा का छिड़काव और स्वास्थ्य शिविर लगाए जाने की मांग की है।
सोमवार को मतौली गांव में मोबाइल यूनिट ने पहुंचकर ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाएं वितरित की। टीम ने पूरन लाल, गौरी, सचिन, कुसमा, रामेश्वर दयाल, सुमित, रूकमणी, श्याम सुंदर, अरविंद शिवा, नेहा समेत 55 लोगों का चेकअप कर दवाएं दीं। साथ ही 25 लोगों के ब्लड का सैंपल जांच के लिए इकट्ठा किया।
बुखार की चपेट में आकर लोग अपनी जान गवां रहे हैं। उसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग संचारी रोग नियंत्रण के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है। जबकि स्वास्थ्य विभाग कागजों में संचारी रोग नियंत्रण के नाम पर लाखों रुपये खर्च कर देता है।
मतौली गांव निवासी 22 वर्षीय नित्या पांडेय की एक अक्तूबर और 41 वर्षीय राजपाल की 30 सितंबर की रात मौत हो गई। दो अक्तूबर को गौरियापुर गांव निवासी रामसुखी (90) की मौत हुई। इसके ठीक पहले छिबरामऊ के नौगाई गांव निवासी सुनीता (25) , हरिहरपुर गांव निवासी मंजू (45), अमोलर गांव निवासी रविंद्र सिंह (40), इंदरगढ़ के घनापुरवा गांव निवासी गुड्डी (40), सुल्तानपुर गांव निवासी पतिराम (60) और संजू (20) समेत करीब 30 से ज्यादा लोगों की बुखार की चपेट में आने से मौत हो चुकी है।
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बदलते मौसम में ग्रामीण इलाकों में बुखार का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। गांव-गांव लोग बुखार से तप रहे हैं। निजी अस्पतालों से लेकर सरकारी अस्पतालों में बुखार, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड के मरीजों की भरमार है। आलम यह है कि मतौली और गौरियापुर गांव में 100 से ज्यादा लोग बुखार से पीड़ित है। वहीं, ग्रामीणों की माने तो ज्यादा तर लोगों की जांच में डेंगू की पुष्टि हो रही है। हर घर में कोई न कोई डेंगू संक्रमित मिल रहे है।
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रविवार को मतौली गांव की रहने वाली नर्सिंग की छात्रा नित्या पांडेय और राजपाल की बुखार की चपेट में आने से मौत हो गई थी। वहीं लगातार दूसरे दिन सोमवार को पड़ोसी गांव गौरियापुर में 90 वर्षीय रामसुखी की मौत हो गई। पुत्र ईश्वर चंद्र ने बताया कि मां को करीब तीन दिनों से बुखार आ रहा था। गुरसहायगंज में निजी चिकित्सक के पास उनका इलाज चल रहा था। जहां ब्लड जांच में डेंगू होने की बात सामने आई थी।
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इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि उनका पूरा परिवार डेंगू से पीड़ित है। गांव में भी अधिकांश लोग डेंगू संक्रमित है। ज्यादातर लोग निजी चिकित्सक के पास इलाज करवा रहे हैं। ग्रामीणों ने फॉगिंग, दवा का छिड़काव और स्वास्थ्य शिविर लगाए जाने की मांग की है।
सोमवार को मतौली गांव में मोबाइल यूनिट ने पहुंचकर ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाएं वितरित की। टीम ने पूरन लाल, गौरी, सचिन, कुसमा, रामेश्वर दयाल, सुमित, रूकमणी, श्याम सुंदर, अरविंद शिवा, नेहा समेत 55 लोगों का चेकअप कर दवाएं दीं। साथ ही 25 लोगों के ब्लड का सैंपल जांच के लिए इकट्ठा किया।
बुखार की चपेट में आकर लोग अपनी जान गवां रहे हैं। उसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग संचारी रोग नियंत्रण के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है। जबकि स्वास्थ्य विभाग कागजों में संचारी रोग नियंत्रण के नाम पर लाखों रुपये खर्च कर देता है।
मतौली गांव निवासी 22 वर्षीय नित्या पांडेय की एक अक्तूबर और 41 वर्षीय राजपाल की 30 सितंबर की रात मौत हो गई। दो अक्तूबर को गौरियापुर गांव निवासी रामसुखी (90) की मौत हुई। इसके ठीक पहले छिबरामऊ के नौगाई गांव निवासी सुनीता (25) , हरिहरपुर गांव निवासी मंजू (45), अमोलर गांव निवासी रविंद्र सिंह (40), इंदरगढ़ के घनापुरवा गांव निवासी गुड्डी (40), सुल्तानपुर गांव निवासी पतिराम (60) और संजू (20) समेत करीब 30 से ज्यादा लोगों की बुखार की चपेट में आने से मौत हो चुकी है।