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Kannauj News: यूरिया के अधिक इस्तेमाल से पौध में लगा अगिया रोग
Tue, 30 May 2023 12:15 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
Updated Tue, 30 May 2023 12:15 AM IST
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तालग्राम। इलाके में कई सालों से धान की फसल में अगिया (हरदिया) रोग का प्रकोप अधिक देखने को मिल रहा है। इससे फसल के बचाव के लिए कृषि विभाग ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। विभाग ने एडवाइजरी जारी कर किसानों को बचाव के तरीके सुझाए हैं।
यूरिया और नाइट्रोजन उर्वरकों के अधिक इस्तेमाल से इस रोग का प्रकोप हो रहा है। इससे किसान जैविक कार्बनिक खादों का ज्यादा प्रयोग करे। कृषि तकनीकी सहायक प्रबंधक शिवपाल सिंह बताते हैं कि नाइट्रोजन युक्त उर्वरक के अधिक प्रयोग से अगिया रोग तेजी से फैलता है। इसे पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है। फसल को बचाने के लिए इसका पहले से प्रबंधन किया जा सकता है।
वायुमंडल का तापमान 25 से 30 प्रतिशत और आर्द्रता 90 फीसदी से अधिक होना अगिया रोग के लिए अनुकूल माना जाता है। यह धान की फसल में पुष्पावस्था के दौरान लगता है। हवाओं के साथ इसका प्रभाव तेजी से बढ़ता है। चपेट में आई धान की बालियां पीले और काले रंग के स्पोरबॉल से ढक जाती हैं। इस रोग से ग्रसित फसल की सरकारी क्रय केंद्रों व व्यापारी खरीदते नहीं है। जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इससे नाइट्रोजन वाले उर्वरकों का किसान कम प्रयोग करे और कंपोस्ट व कार्बनिक खादों को बढ़ा दें।
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कृषि रक्षा विशेषज्ञों ने किसानों को दिए सुझाव
-खेत के मेड़ों और सिंचाई नालियों को खर
-खेत को पतवार से मुक्त रखें।
- खेतों में नीम की खली की बुआई करें, य फिर नीम गुठली का चूरा डालें
- गर्मी में गहरी जुताई से अगिया रोग के स्पोर मृदा से नष्ट हो जाते हैं।
- धान की नर्सरी के बीजों को स्यूडोमोनास फ्लोरिसेंस या ट्राईकोडर्मा से शोधन जरूर करें।
- पौध की रोपाई के समय भी संशोधन कराना अति आवश्यक है।
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यूरिया और नाइट्रोजन उर्वरकों के अधिक इस्तेमाल से इस रोग का प्रकोप हो रहा है। इससे किसान जैविक कार्बनिक खादों का ज्यादा प्रयोग करे। कृषि तकनीकी सहायक प्रबंधक शिवपाल सिंह बताते हैं कि नाइट्रोजन युक्त उर्वरक के अधिक प्रयोग से अगिया रोग तेजी से फैलता है। इसे पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है। फसल को बचाने के लिए इसका पहले से प्रबंधन किया जा सकता है।
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वायुमंडल का तापमान 25 से 30 प्रतिशत और आर्द्रता 90 फीसदी से अधिक होना अगिया रोग के लिए अनुकूल माना जाता है। यह धान की फसल में पुष्पावस्था के दौरान लगता है। हवाओं के साथ इसका प्रभाव तेजी से बढ़ता है। चपेट में आई धान की बालियां पीले और काले रंग के स्पोरबॉल से ढक जाती हैं। इस रोग से ग्रसित फसल की सरकारी क्रय केंद्रों व व्यापारी खरीदते नहीं है। जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इससे नाइट्रोजन वाले उर्वरकों का किसान कम प्रयोग करे और कंपोस्ट व कार्बनिक खादों को बढ़ा दें।
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कृषि रक्षा विशेषज्ञों ने किसानों को दिए सुझाव
-खेत के मेड़ों और सिंचाई नालियों को खर
-खेत को पतवार से मुक्त रखें।
- खेतों में नीम की खली की बुआई करें, य फिर नीम गुठली का चूरा डालें
- गर्मी में गहरी जुताई से अगिया रोग के स्पोर मृदा से नष्ट हो जाते हैं।
- धान की नर्सरी के बीजों को स्यूडोमोनास फ्लोरिसेंस या ट्राईकोडर्मा से शोधन जरूर करें।
- पौध की रोपाई के समय भी संशोधन कराना अति आवश्यक है।