{"_id":"6a97116af615d4733e0f4e82","slug":"accused-acquitted-in-14-year-old-assault-case-kannauj-news-c-214-1-knj1008-155345-2026-09-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kannauj News: 14 साल पुराने मारपीट के मामले में आरोपी बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kannauj News: 14 साल पुराने मारपीट के मामले में आरोपी बरी
विज्ञापन
कन्नौज। कानून की चौखट पर 14 साल तक चली लंबी कानूनी लड़ाई का अंत आखिरकार साक्ष्य के अभाव में मंगलवार को हो गया। तालग्राम थाना क्षेत्र के बमरौली गांव में 14 वर्ष पहले हुए लाठी-डंडों से मारपीट के एक चर्चित मामले में एसीजेएम (अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) की अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया है।
घटना आठ फरवरी 2012 की है। बमरौली गांव निवासी रतीराम ने गांव के ही कन्हैयालाल, राजेश, उमनेश, श्रवण कुमार और मुन्नालाल के खिलाफ रंजिशन लाठी-डंडों से हमला करने और मारपीट का आरोप लगाते हुए तालग्राम थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की गहन जांच-पड़ताल के बाद कन्हैयालाल, राजेश और उमनेश के खिलाफ अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की थी।
मामले की सुनवाई लंबे समय से एसीजेएम कोर्ट में चल रही थी। सुनवाई के दौरान केस में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब खुद शिकायतकर्ता (वादी) और मुख्य गवाह अदालत में अपने ही दिए बयानों से मुकर गए। बयानों में आए इस विरोधाभास के कारण अभियोजन पक्ष आरोपियों पर लगे आरोपों को साबित करने में नाकाम रहा। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और पेश किए गए सबूतों का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है। पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त घोषित करते हुए बरी करने का आदेश जारी कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
घटना आठ फरवरी 2012 की है। बमरौली गांव निवासी रतीराम ने गांव के ही कन्हैयालाल, राजेश, उमनेश, श्रवण कुमार और मुन्नालाल के खिलाफ रंजिशन लाठी-डंडों से हमला करने और मारपीट का आरोप लगाते हुए तालग्राम थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की गहन जांच-पड़ताल के बाद कन्हैयालाल, राजेश और उमनेश के खिलाफ अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की थी।
विज्ञापन
मामले की सुनवाई लंबे समय से एसीजेएम कोर्ट में चल रही थी। सुनवाई के दौरान केस में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब खुद शिकायतकर्ता (वादी) और मुख्य गवाह अदालत में अपने ही दिए बयानों से मुकर गए। बयानों में आए इस विरोधाभास के कारण अभियोजन पक्ष आरोपियों पर लगे आरोपों को साबित करने में नाकाम रहा। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और पेश किए गए सबूतों का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है। पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त घोषित करते हुए बरी करने का आदेश जारी कर दिया।
विज्ञापन