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अब छोटे मवेशियों की पहचान के लिए कान में पड़ेंगे छल्ले
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तिर्वा(कन्नौज)। पशुपालन विभाग अब छोटे मवेशियों की ईयर टैगिंग (कान में छल्ले की व्यवस्था) कराएगा। इससे पशुपालक का आसानी से पता चल सकेगा। ईयर टैगिंग के बाद पशुपालक सरकारी योजनाओं का लाभ भी ले सकेंगे।
कस्बा समेत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले पशुपालक बिना दूध देने वाले पशुओं को सड़कों पर छोड़ देते हैं। इससे किसानों की फसलों में नुकसान के साथ दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। सरकार ने पशुपालक के पशु की पहचान के लिए यूनिक कोड जारी करने के निर्देश दिए हैं। इस कोड से पशु के मालिक का आसानी से पता लगाया जा सकेगा। पहले चरण में बड़े पशुओं की ईयर टैगिंग की गई। दूसरे चरण में छोटे पशुओं( भेड़, बकरी आदि )की ईयर टैगिंग होगी। उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संजय शाल्या ने बताया कि पशु की आसानी से पहचान के लिए ईयर टैगिंग की जा रही है। प्रत्येक पशु को 12 अंकों का यूनिक नंबर दिया जाएगा। छोटे पशुओं में ईयर टैगिंग का कार्य जल्द शुरू कर दिया जाएगा।
ईयर टैगिंग से होने वाले लाभ
पशुओं की सुरक्षा होगी। पहचान करना आसान होगा।
ईयर टैगिंग में पडे़ नंबर से पशु मालिक का पता लग सकेगा।
ईयर टैगिंग के बाद निशुल्क गर्भाधान होगा।
ईयर टैगिंग होने के बाद बैंक से अनुदान भी मिलेगा।
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कस्बा समेत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले पशुपालक बिना दूध देने वाले पशुओं को सड़कों पर छोड़ देते हैं। इससे किसानों की फसलों में नुकसान के साथ दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। सरकार ने पशुपालक के पशु की पहचान के लिए यूनिक कोड जारी करने के निर्देश दिए हैं। इस कोड से पशु के मालिक का आसानी से पता लगाया जा सकेगा। पहले चरण में बड़े पशुओं की ईयर टैगिंग की गई। दूसरे चरण में छोटे पशुओं( भेड़, बकरी आदि )की ईयर टैगिंग होगी। उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संजय शाल्या ने बताया कि पशु की आसानी से पहचान के लिए ईयर टैगिंग की जा रही है। प्रत्येक पशु को 12 अंकों का यूनिक नंबर दिया जाएगा। छोटे पशुओं में ईयर टैगिंग का कार्य जल्द शुरू कर दिया जाएगा।
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ईयर टैगिंग से होने वाले लाभ
पशुओं की सुरक्षा होगी। पहचान करना आसान होगा।
ईयर टैगिंग में पडे़ नंबर से पशु मालिक का पता लग सकेगा।
ईयर टैगिंग के बाद निशुल्क गर्भाधान होगा।
ईयर टैगिंग होने के बाद बैंक से अनुदान भी मिलेगा।