{"_id":"35-204725","slug":"Kannauj-204725-35","type":"story","status":"publish","title_hn":"समिति पर खाद नहीं, किसानों का हंगामा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
समिति पर खाद नहीं, किसानों का हंगामा
Kannauj
Updated Thu, 06 Nov 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सचिव बोले, चेक लगाई, खाद कब तक आएगी नहीं है पता
रोजाना सैकड़ों किसान मायूस होकर बैरंग लौटने को मजबूर
अमर उजाला ब्यूरो
जलालाबाद (कन्नौज)। साधन सहकारी समिति जलालाबाद में इन दिनों डीएपी, एनपीके और यूरिया में से कोई भी खाद नहीं है। जिम्मेदार अफसरों के समस्या से गुहार लगाने के बाद भी समस्या जस की तस है। मंगलवार को गुस्साए किसानों समिति पर हंगामा किया और शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर भड़ास निकाली।
सहकारिता विभाग और कृषि विभाग के दावे एक बार फिर हवा हवाई साबित हुए। पुख्ता तैयारी न होने के कारण इन दिनों सरकारी समितियों पर खाद की किल्लत पैदा हो गई है। रोजाना सैकड़ों किसान सुबह होते ही समिति पर खाद लेने के लिए पहुंच जाते हैं। कई घंटे तक इंतजार में बैठे रहते हैं। अंत में बगैर खाद के ही उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ता है। किसानों का कहना है कि जल्द ही खाद की व्यवस्था न कराई गई तो तहसील व कलेक्ट्रेट में धरना देंगे। समिति के प्रभारी सचिव इंद्रपाल यादव ने बताया कि समिति पर डीएपी की 600 बोरी मंगाई गई है। भुगतान की चेक 25 अक्तूबर को जमा की जा चुकी है। एनपीके की 500 बोरी खाद मंगाने के लिए करीब एक पखवारे पहले चेक भेजी जा चुकी है। यूरिया की 500 बोरी मुहैया कराने की डिमांड विभाग के उच्चाधिकारियों से की गई है, जिसके लिए चेक 1 नवंबर को भेज चुके हैं। जानकारी मिली है कि रैक प्वाइंट पर एनपीके खाद आ गई है, जो जल्द ही समिति पर आ जाएगी। यूरिया और डीएपी आने की जानकारी वह नही दे सके।
फसल की बुवाई हो रही लेट
जमला गांव निवासी किसान महताब सिंह कुशवाहा का कहना है कि यूरिया खाद के लिए 10-12 दिन से समिति पर जा रहे हैं पर कोरे आश्वासन ही मिल रहे। खाद के अभाव में बुवाई लेट हो रही है। इसका असर पैदावार पर भी पड़ेगा। जानबूझकर समितियों पर खाद संकट पैदा किया गया है।
विज्ञापन
समिति ने खाद देने पल्ला झाड़ा
जमला गांव के किसान अखिलेश कुमार का कहना है कि उन्हें यूरिया और डीएपी खाद चाहिए पर समिति ने हाथ खड़े कर लिए हैं। ऐसी समिति होने का क्या फायदा जो समय पर किसानों को खाद न मुहैया करा सके। निजी खाद विक्रेता महंगे दाम वसूलकर कमाई करने में जुटे हैं।
निजी दुकानदार ले अधिक दाम
भवानीपुर अनौगी निवासी अजय प्रताप का कहना है कि यूरिया खाद का संकट एक पखवारे बाद भी हल नहीं हो सका है। निजी विक्रेताओं के यहां नकली खाद होने के साथ ही मिलावट व अधिक दाम वसूले जाते हैं। समिति पर खाद न मिलने से किसानों की खेत खाली पड़े हैं।
खाद संकट की जांच कराई जाए
जलालाबाद निवासी किसान सुशील पाठक का कहना है कि 15 दिन से वह यूरिया और डीएपी खाद लेने के लिए दौड़ रहे हैं। रोजाना आज-कल में खाद आने का भरोसा दिलाकर लौटा दिया जाता है। उन्होंने मांग की कि खाद समस्या की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
विज्ञापन
रोजाना सैकड़ों किसान मायूस होकर बैरंग लौटने को मजबूर
अमर उजाला ब्यूरो
जलालाबाद (कन्नौज)। साधन सहकारी समिति जलालाबाद में इन दिनों डीएपी, एनपीके और यूरिया में से कोई भी खाद नहीं है। जिम्मेदार अफसरों के समस्या से गुहार लगाने के बाद भी समस्या जस की तस है। मंगलवार को गुस्साए किसानों समिति पर हंगामा किया और शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर भड़ास निकाली।
सहकारिता विभाग और कृषि विभाग के दावे एक बार फिर हवा हवाई साबित हुए। पुख्ता तैयारी न होने के कारण इन दिनों सरकारी समितियों पर खाद की किल्लत पैदा हो गई है। रोजाना सैकड़ों किसान सुबह होते ही समिति पर खाद लेने के लिए पहुंच जाते हैं। कई घंटे तक इंतजार में बैठे रहते हैं। अंत में बगैर खाद के ही उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ता है। किसानों का कहना है कि जल्द ही खाद की व्यवस्था न कराई गई तो तहसील व कलेक्ट्रेट में धरना देंगे। समिति के प्रभारी सचिव इंद्रपाल यादव ने बताया कि समिति पर डीएपी की 600 बोरी मंगाई गई है। भुगतान की चेक 25 अक्तूबर को जमा की जा चुकी है। एनपीके की 500 बोरी खाद मंगाने के लिए करीब एक पखवारे पहले चेक भेजी जा चुकी है। यूरिया की 500 बोरी मुहैया कराने की डिमांड विभाग के उच्चाधिकारियों से की गई है, जिसके लिए चेक 1 नवंबर को भेज चुके हैं। जानकारी मिली है कि रैक प्वाइंट पर एनपीके खाद आ गई है, जो जल्द ही समिति पर आ जाएगी। यूरिया और डीएपी आने की जानकारी वह नही दे सके।
विज्ञापन
फसल की बुवाई हो रही लेट
जमला गांव निवासी किसान महताब सिंह कुशवाहा का कहना है कि यूरिया खाद के लिए 10-12 दिन से समिति पर जा रहे हैं पर कोरे आश्वासन ही मिल रहे। खाद के अभाव में बुवाई लेट हो रही है। इसका असर पैदावार पर भी पड़ेगा। जानबूझकर समितियों पर खाद संकट पैदा किया गया है।
विज्ञापन
समिति ने खाद देने पल्ला झाड़ा
जमला गांव के किसान अखिलेश कुमार का कहना है कि उन्हें यूरिया और डीएपी खाद चाहिए पर समिति ने हाथ खड़े कर लिए हैं। ऐसी समिति होने का क्या फायदा जो समय पर किसानों को खाद न मुहैया करा सके। निजी खाद विक्रेता महंगे दाम वसूलकर कमाई करने में जुटे हैं।
निजी दुकानदार ले अधिक दाम
भवानीपुर अनौगी निवासी अजय प्रताप का कहना है कि यूरिया खाद का संकट एक पखवारे बाद भी हल नहीं हो सका है। निजी विक्रेताओं के यहां नकली खाद होने के साथ ही मिलावट व अधिक दाम वसूले जाते हैं। समिति पर खाद न मिलने से किसानों की खेत खाली पड़े हैं।
खाद संकट की जांच कराई जाए
जलालाबाद निवासी किसान सुशील पाठक का कहना है कि 15 दिन से वह यूरिया और डीएपी खाद लेने के लिए दौड़ रहे हैं। रोजाना आज-कल में खाद आने का भरोसा दिलाकर लौटा दिया जाता है। उन्होंने मांग की कि खाद समस्या की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।