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लेखपालों की हड़ताल से जनता हलाकान
Kannauj
Updated Thu, 06 Nov 2014 05:30 AM IST
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अधिवक्ताओं ने जिला प्रशासन पर लगाया उपेक्षा का आरोप
इंतखाब और सत्यापन के अभाव में न्यायिक कार्य प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
कन्नौज। करीब एक माह से लेखपालों के चल रहे आंदोलन से तमाम कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इससे वादकारी व छात्र-छात्राएं परेशान हैं। लेखपालों की रिपोर्ट के अभाव में प्रमाणपत्र जारी होने का काम बाधित है। सदर तहसील के अधिवक्ताओं का कहना है कि लेखपाल तो वैतनिक हैं। काम ठप होने से उनकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वहीं औपचारिक व अनौपचारिक रूप से न्यायिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। पीड़ित न्याय के लिए भटक रहे हैं। पत्रावलियों के अभाव में न्यायालय में वाद भी दाखिल नहीं हो पा रहे हैं। इसके चलते आम जनता खुद को ठगा सा महसूस कर रही है। प्रशासन ने अभी तक कोई पहल नहीं की है।
वैकल्पिक व्यवस्था प्रशासन की जिम्मेदारी
अधिवक्ता राजीव कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि अगस्त माह से लेखपालों की हड़ताल चल रही है। 14 अक्तूबर से लेखपालों ने इंतखाब, तहसील दिवस की शिकायतों, आय, जाति व निवास प्रमाणपत्रों के लिए रिपोर्ट लगाना भी बंद कर दिया है। प्रशासन की उपेक्षा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इतने दिनों से काम ठप है। यदि मामला प्रदेश स्तर का है तो वैकल्पिक व्यवस्था करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
न्यायिक कार्य प्रभावित, पीड़ित कहां जाएं
अधिवक्ता रामबाबू राठौर का कहना है कि लेखपालों के काम ठप होने से इंतखाब नहीं मिल पा रहे हैं। इससे नए वाद नहीं दायर हो पा रहे हैं। फौजदारी न्यायालयों में जमानत के लिए लगने वाला सत्यापन भी लेखपाल की रिपोर्ट के अभाव में नहीं हो पा रहा है। आखिर पीड़ित न्याय मांगने कहा जाए? प्रशासन की उपेक्षा से न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वादकारी जनता, छात्र-छात्राओं को हो रही दिक्कतों पर प्रशासन मूकदर्शक बना है।
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अफसर बताएं, जनता का क्या कुसूर
अधिवक्ता राकेश कुमार द्विवेदी का कहना है कि लेखपालों से प्रशासन अपना पूरा काम ले रहा है। वेतन भी लेखपालों को मिल रहा है। कोई भी प्रशासनिक अधिकारी यह नहीं बता रहा कि जनता का क्या कुसूर है? लेखपालों को यह ध्यान देना होगा कि उनकी मांगों को पूरा होने में जो बाधक हो उसी को सजा मिले। बेकसूर जनता व पीड़ित फरियादी को परेशानी उठानी पड़ रही है। प्रशासन को मामले में पहल करनी चाहिए।
स्टूडेंट का भविष्य हो रहा चौपट
अधिवक्ता रत्नदीप शर्मा का कहना है कि आय, जाति व निवास प्रमाणपत्र न जारी होने से छात्र-छात्राएं तहसील के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। तहसील प्रशासन भी प्रदेश स्तर पर लेखपालों की हड़ताल का हवाला देकर स्टूडेंट को चलता कर देता है। जबकि एक्सप्रेसवे, खसरा आदि के काम नहीं रुके हैं। देश के कर्णधारों के भविष्य की किसी अफसर को चिंता नहीं है। हड़ताल की बात कहकर जनता को गुमराह किया जा रहा है।
प्रशासन ने नहीं दिखाई रुचि -जिलाध्यक्ष
कन्नौज। लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष इंद्रपाल सिंह का कहना है कि रिक्त चल रहे पदों का अतिरिक्त चार्ज, कंप्यूटर अभिलेख कक्षों में तैनाती सहित तमाम ऐसे कार्य लेखपालों से लिए जा रहे हैं। जिसका उनसे कोई लेना-देना नहीं है। कई बार शासन स्तर पर मांगे उठाई गयीं। लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसी के चलते आंदोलन शुरू किया गया। प्रशासन ने अपनी ओर से लेखपालों को वार्ता के लिए नहीं बुलाया है।
विकल्पों का किया जा सकता है विचार-डीएम
कन्नौज। डीएम अनुज कुमार झा का कहना है कि लेखपालों का आंदोलन प्रदेश स्तर का है। इसमें प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप गलत है। जनपद में विकास कार्यों को निर्बाध रूप से कराना भी बड़ी चुनौती है। इसे सफलता पूर्वक अंजाम दिया जा रहा है। प्रशासन का यह निजी काम नहीं है। इसका लाभ भी जनता को मिलेगा। जनता को राहत दिलाने के लिए प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।
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इंतखाब और सत्यापन के अभाव में न्यायिक कार्य प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
कन्नौज। करीब एक माह से लेखपालों के चल रहे आंदोलन से तमाम कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इससे वादकारी व छात्र-छात्राएं परेशान हैं। लेखपालों की रिपोर्ट के अभाव में प्रमाणपत्र जारी होने का काम बाधित है। सदर तहसील के अधिवक्ताओं का कहना है कि लेखपाल तो वैतनिक हैं। काम ठप होने से उनकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वहीं औपचारिक व अनौपचारिक रूप से न्यायिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। पीड़ित न्याय के लिए भटक रहे हैं। पत्रावलियों के अभाव में न्यायालय में वाद भी दाखिल नहीं हो पा रहे हैं। इसके चलते आम जनता खुद को ठगा सा महसूस कर रही है। प्रशासन ने अभी तक कोई पहल नहीं की है।
वैकल्पिक व्यवस्था प्रशासन की जिम्मेदारी
अधिवक्ता राजीव कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि अगस्त माह से लेखपालों की हड़ताल चल रही है। 14 अक्तूबर से लेखपालों ने इंतखाब, तहसील दिवस की शिकायतों, आय, जाति व निवास प्रमाणपत्रों के लिए रिपोर्ट लगाना भी बंद कर दिया है। प्रशासन की उपेक्षा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इतने दिनों से काम ठप है। यदि मामला प्रदेश स्तर का है तो वैकल्पिक व्यवस्था करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
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न्यायिक कार्य प्रभावित, पीड़ित कहां जाएं
अधिवक्ता रामबाबू राठौर का कहना है कि लेखपालों के काम ठप होने से इंतखाब नहीं मिल पा रहे हैं। इससे नए वाद नहीं दायर हो पा रहे हैं। फौजदारी न्यायालयों में जमानत के लिए लगने वाला सत्यापन भी लेखपाल की रिपोर्ट के अभाव में नहीं हो पा रहा है। आखिर पीड़ित न्याय मांगने कहा जाए? प्रशासन की उपेक्षा से न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वादकारी जनता, छात्र-छात्राओं को हो रही दिक्कतों पर प्रशासन मूकदर्शक बना है।
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अफसर बताएं, जनता का क्या कुसूर
अधिवक्ता राकेश कुमार द्विवेदी का कहना है कि लेखपालों से प्रशासन अपना पूरा काम ले रहा है। वेतन भी लेखपालों को मिल रहा है। कोई भी प्रशासनिक अधिकारी यह नहीं बता रहा कि जनता का क्या कुसूर है? लेखपालों को यह ध्यान देना होगा कि उनकी मांगों को पूरा होने में जो बाधक हो उसी को सजा मिले। बेकसूर जनता व पीड़ित फरियादी को परेशानी उठानी पड़ रही है। प्रशासन को मामले में पहल करनी चाहिए।
स्टूडेंट का भविष्य हो रहा चौपट
अधिवक्ता रत्नदीप शर्मा का कहना है कि आय, जाति व निवास प्रमाणपत्र न जारी होने से छात्र-छात्राएं तहसील के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। तहसील प्रशासन भी प्रदेश स्तर पर लेखपालों की हड़ताल का हवाला देकर स्टूडेंट को चलता कर देता है। जबकि एक्सप्रेसवे, खसरा आदि के काम नहीं रुके हैं। देश के कर्णधारों के भविष्य की किसी अफसर को चिंता नहीं है। हड़ताल की बात कहकर जनता को गुमराह किया जा रहा है।
प्रशासन ने नहीं दिखाई रुचि -जिलाध्यक्ष
कन्नौज। लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष इंद्रपाल सिंह का कहना है कि रिक्त चल रहे पदों का अतिरिक्त चार्ज, कंप्यूटर अभिलेख कक्षों में तैनाती सहित तमाम ऐसे कार्य लेखपालों से लिए जा रहे हैं। जिसका उनसे कोई लेना-देना नहीं है। कई बार शासन स्तर पर मांगे उठाई गयीं। लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसी के चलते आंदोलन शुरू किया गया। प्रशासन ने अपनी ओर से लेखपालों को वार्ता के लिए नहीं बुलाया है।
विकल्पों का किया जा सकता है विचार-डीएम
कन्नौज। डीएम अनुज कुमार झा का कहना है कि लेखपालों का आंदोलन प्रदेश स्तर का है। इसमें प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप गलत है। जनपद में विकास कार्यों को निर्बाध रूप से कराना भी बड़ी चुनौती है। इसे सफलता पूर्वक अंजाम दिया जा रहा है। प्रशासन का यह निजी काम नहीं है। इसका लाभ भी जनता को मिलेगा। जनता को राहत दिलाने के लिए प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।