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Kannauj News: 3.11 लाख लाभार्थियों को नहीं मिला आयुष्मान का वरदान
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कन्नौज। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत इत्रनगरी में 3.11 लाख लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड का लाभ नहीं मिला है। जिले में कुल 7,76,281 कार्ड बनाने का लक्ष्य था। विभाग अब तक केवल 4,64,282 कार्ड ही बना पाया है। यह स्थिति सरकारी आंकड़ों और विभाग की सुस्ती को दर्शाती है।
आयुष्मान भारत योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं हुआ है। इससे ग्रामीण अंचलों में लोग जागरूक नहीं हो पा रहे हैं। कई पात्र परिवारों को कार्ड बनवाने की प्रक्रिया नहीं पता है। तकनीकी खामियां और विभाग की उदासीनता भी एक बड़ा कारण है। पोर्टल की धीमी गति और स्थानीय कर्मियों की लापरवाही देरी कर रही है।
40 फीसदी पात्र आबादी अभी भी सरकारी स्वास्थ्य सुरक्षा से बाहर है। 3,11,999 लंबित कार्ड जमीनी स्तर पर अभियान की धीमी गति दिखाते हैं। सरकार बेहतर इलाज का वादा कर रही है पर लाखों लोग कार्ड के लिए तरस रहे हैं। यह आंकड़ा उन जिंदगियों का सवाल है जो गंभीर बीमारी में निजी अस्पतालों के खर्च से जूझेंगे। शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करना दूर का सपना लग रहा है। विभाग को कागजी प्रचार छोड़कर वंचितों तक पहुंचना होगा।
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आयुष्मान भारत पोर्टल पर ऑनलाइन डेटा उपलब्ध है पर लोगों को इसे चलाना नहीं आता। ऑनलाइन डेटा में नामों की विसंगतियां भी एक समस्या है। राशन कार्ड और आधार कार्ड का डेटा मेल नहीं खाता। मोबाइल नंबर आधार से न जुड़े होने से भी परेशानी होती है। आयुष्मान मित्र भी लाभार्थियों को सही जानकारी नहीं देते।
वर्जन--
आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर शिविरों का आयोजन किया जा रहा है तो संपूर्ण समाधान दिवसों में भी कैंप लगाकर कार्ड बनाए जा रहे हैं। लक्ष्य के सापेक्ष आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए सभी आयुष्मान मित्रों को निर्देशित किया गया है। यदि कोई शिकायत मिलती है तो तत्काल कार्रवाई की जाती है।
-डॉ. सत्येंद्र कुमार, जिला प्रोग्राम कोआर्डिनेटर (पीएमजेएवाई)
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पात्र लाभार्थी आयुष्मान पोर्टल पर जाकर अपना स्टेटस चेक कर सकते हैं। इसके अलावा, नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर या सरकारी अस्पताल में आयुष्मान मित्र की मदद से कार्ड मुफ्त में बनवाया जा सकता है। 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए अब विशेष वय वंदना कार्ड की सुविधा भी शुरू की गई है।
-डॉ.स्वदेश गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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आयुष्मान भारत योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं हुआ है। इससे ग्रामीण अंचलों में लोग जागरूक नहीं हो पा रहे हैं। कई पात्र परिवारों को कार्ड बनवाने की प्रक्रिया नहीं पता है। तकनीकी खामियां और विभाग की उदासीनता भी एक बड़ा कारण है। पोर्टल की धीमी गति और स्थानीय कर्मियों की लापरवाही देरी कर रही है।
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40 फीसदी पात्र आबादी अभी भी सरकारी स्वास्थ्य सुरक्षा से बाहर है। 3,11,999 लंबित कार्ड जमीनी स्तर पर अभियान की धीमी गति दिखाते हैं। सरकार बेहतर इलाज का वादा कर रही है पर लाखों लोग कार्ड के लिए तरस रहे हैं। यह आंकड़ा उन जिंदगियों का सवाल है जो गंभीर बीमारी में निजी अस्पतालों के खर्च से जूझेंगे। शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करना दूर का सपना लग रहा है। विभाग को कागजी प्रचार छोड़कर वंचितों तक पहुंचना होगा।
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आयुष्मान भारत पोर्टल पर ऑनलाइन डेटा उपलब्ध है पर लोगों को इसे चलाना नहीं आता। ऑनलाइन डेटा में नामों की विसंगतियां भी एक समस्या है। राशन कार्ड और आधार कार्ड का डेटा मेल नहीं खाता। मोबाइल नंबर आधार से न जुड़े होने से भी परेशानी होती है। आयुष्मान मित्र भी लाभार्थियों को सही जानकारी नहीं देते।
वर्जन
आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर शिविरों का आयोजन किया जा रहा है तो संपूर्ण समाधान दिवसों में भी कैंप लगाकर कार्ड बनाए जा रहे हैं। लक्ष्य के सापेक्ष आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए सभी आयुष्मान मित्रों को निर्देशित किया गया है। यदि कोई शिकायत मिलती है तो तत्काल कार्रवाई की जाती है।
-डॉ. सत्येंद्र कुमार, जिला प्रोग्राम कोआर्डिनेटर (पीएमजेएवाई)
पात्र लाभार्थी आयुष्मान पोर्टल पर जाकर अपना स्टेटस चेक कर सकते हैं। इसके अलावा, नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर या सरकारी अस्पताल में आयुष्मान मित्र की मदद से कार्ड मुफ्त में बनवाया जा सकता है। 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए अब विशेष वय वंदना कार्ड की सुविधा भी शुरू की गई है।
-डॉ.स्वदेश गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधिकारी