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Kannauj News: डिजिटल क्रांति से सशक्त होंगे जिले के 2.93 लाख किसान

Mon, 02 Feb 2026 12:05 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 02 Feb 2026 12:05 AM IST
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2.93 lakh farmers of the district will be empowered by digital revolution
कन्नौज। बजट में खेती को हाई-टेक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इसके अंतर्गत किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) को पूर्णतः डिजिटल करने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल से 2.93 लाख किसानों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा, जिससे उनकी ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और तेज हो जाएगी। अब किसानों को लोन के लिए बैंकों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि आधार और भूमि रिकॉर्ड (भूलेख) के माध्यम से ऑनलाइन सत्यापन की व्यवस्था लागू की गई है।
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डिजिटल केसीसी से होगी समय की बचत

पहले जहां केसीसी बनवाने में हफ्तों का समय लगता था, वहीं अब इस डिजिटल प्रक्रिया से यह कार्य कुछ ही घंटों में पूरा हो जाएगा। लोन की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में आएगी, जिससे भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाएगी। इस पूरी व्यवस्था को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ा गया है, जहां किसान अपनी फसल का बीमा, खाद की सब्सिडी और लोन से संबंधित सभी जानकारी एक ही स्थान पर प्राप्त कर सकेंगे। भूलेखों को भी डिजिटल कर दिया गया है, जो इस पूरी प्रक्रिया को सुगम बनाएगा।
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फोटो :24: गंगा के किनारे खड़े बांस के पौधे। स्रोत : सोशल मीडिया
गंगा किनारे मिलेगा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
बजट में गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिले में गंगा नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में 10 किलोमीटर के दायरे में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष क्लस्टर बनाए जाएंगे। नमामि गंगे योजना के तहत इस पहल का उद्देश्य खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग को पूरी तरह समाप्त करना है, ताकि हानिकारक रसायनों का रिसाव गंगा में न हो सके। प्रत्येक क्लस्टर 50 हेक्टेयर भूमि को कवर करेगा। क्लस्टर में शामिल किसानों को सरकार की ओर से प्रशिक्षण की सुविधा भी मिलेगी। इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, बल्कि कृषि उत्पादों को एक नई वैश्विक पहचान भी मिलेगी। मिट्टी का कटान रोकने को बांस की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।
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इनसेट---
एआई टूल्स से मिलेगी खेती की सटीक जानकारी
पारंपरिक खेती का स्वरूप बदलने वाला है, क्योंकि बजट में अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स लॉन्च किए जाएंगे। एआई के माध्यम से किसानों को अपनी फसलों के लिए सटीक, डेटा-आधारित सलाह मिल सकेगी। सरकार द्वारा घोषित एआई प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों को उनकी अपनी भाषा में मौसम के पूर्वानुमान, मिट्टी की सेहत और कीटों के हमले की रियल-टाइम जानकारी सीधे उनके मोबाइल पर उपलब्ध होगी। एआई टूल्स उपग्रह चित्रों और सेंसर डेटा का उपयोग करके फसल की वृद्धि और बीमारी का पहले ही अनुमान लगा लेंगे।

केंद्रीय बजट में डिजिटल कृषि अर्थव्यवस्था का प्रधानता दी गई है, इससे समय की बचत होगी और लाभार्थी किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम रहेगी।

-संतोष कुमार, उपनिदेशक कृषि
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केंद्रीय बजट में बागवानी व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलने से जिले के हजारों किसानों को लाभ मिलेगा। गंगा के किनारे क्लस्टर बनने से प्राकृतिक संरक्षण होगा और कटान भी कम होगा।
-चंद्रप्रकाश अवस्थी, जिला उद्यान अधिकारी
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