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योगी जी, जरा शहर के अंदर भी झांक लीजिए

Sun, 08 Dec 2019 01:39 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 08 Dec 2019 01:39 AM IST
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yogi in jhansi
झांसी। शनिवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे के दौरान नगर की दो तस्वीरें सामने आईं। जिन सड़कों से सीएम के काफिले को गुजरना था, वहां सभी व्यवस्थाएं चौकस रहीं। जिन स्थानों पर मुख्यमंत्री के जाने की संभावना थी, वहां भी सब दुरुस्त मिला। जबकि, शहर के अंदरूनी हिस्सों में लोग रोजाना की तरह समस्याओं से जूझते रहे। मुख्यमंत्री रात्रि विश्राम के बाद रविवार को भी नगर में समय बिताएंगे। ऐसे में लोगों का उनसे अनुरोध है कि एक बार वे नगर के अंदरूनी हिस्सों का भी जायजा ले लें, ताकि वे भी हकीकत से रूबरू हो सकें।
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इलाइट से मेडिकल कॉलेज रोड रोजाना की तरह शनिवार को न तो अतिक्रमण था और न वाहनों की रेलमपेल, इस सड़क का अतिक्रमण तो एक दिन पहले ही साफ कर दिया गया था और शनिवार को सुबह से ही जगह - जगह पुलिस कर्मचारी मुस्तैदी से तैनात नजर आए, जो यातायात व्यवस्था संभाले हुए थे। सड़क पर छुट्टा पशु न पहुंच पाएं, इसका भी पूरा ख्याल रखा जा रहा था। वहीं, दूसरी ओर शहर का बड़ा बाजार हो या सुभाष गंज, यहां हालात रोजाना की तरह ही थे। वाहन सवार जाम से जूझते हुए आगे बढ़ रहे थे। पैदल निकलने वालों को भी रास्ता तलाश करना पड़ रहा था। छुट्टा पशु भी विचरण कर रहे थे। हालांकि, आम दिनों में तो यदा - कदा पुलिस नजर ही जाती थी, परंतु शनिवार को वीआईपी ड्यूटी होने की वजह से पुलिस भी दिखाई नहीं दी।
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महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में शनिवार को व्यवस्थाएं किसी बड़े निजी अस्पताल से कम नहीं नजर आ रहीं थीं। डाक्टर हों या नर्स सभी यूनिफार्म में थे। अस्पताल का फर्श चमक रहा था, तो बिस्तरों पर बिछे चादर भी साफ-सुथरे थे। स्टाफ हर मरीज का दौड़-दौड़ कर ख्याल रख रहा था। बात-बात पर मरीजों और तीमारदारों पर तमतमा जाने वाले जूनियर डाक्टर भी शालीनता के साथ पेश आ रहे थे। वहीं, दूसरी ओर कोतवाली के पास स्थित बेसिक शिक्षा परिषद के जीर्णशीर्ण रानी लक्ष्मीबाई जूनियर हाईस्कूल में बदहाली छाई हुई थी। छत के लगातार दरकते प्लास्टर की वजह से बच्चे खुले मैदान में थे। वे डरे हुए थे कि कहीं छत उन पर न गिर पड़े। कमोबेश शिक्षिकाओं का भी यही हाल था।
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ऐसे तो बढ़ने से रहा पर्यटन
झांसी दौरे के दौरान मुख्यमंत्री का बुंदेलखंड के पर्यटन विकास पर जोर रहा। लेकिन, धरातल पर हालात एकदम इतर हैं। इसका अंदाजा इतिहास की अनूठी विरासत किले के परकोटे को देखकर लगाया जा सकता है। तीन शताब्दी पुरानी ये दीवार पुराने शहर को चारों ओर से घेरे हुए है। बावजूद, इसका संरक्षण नहीं किया जा रहा है। लगातार इसे क्षतिग्रस्त किया जा रहा है, इसमें सरकारी तंत्र भी पीछे नहीं है। पिछले साल नाला निकासी के लिए नगर निगम ने भांडेरी के गेट के पास इसके एक हिस्से को ढहा दिया था। फिर दुबारा इसे नहीं बनाया गया। अनदेखी के चलते महत्वपूर्ण पुरा धरोहर रानी महल की सूरत भी बिगड़ती जा रही है। जबकि, रघुनाथ राव महल अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
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