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Jhansi News: दो साल से नहीं हो रहे एक्स-रे, विशेषज्ञ चिकित्सक की भी कमी
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बंगरा। (भास्कर बबेले)
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बंगरा की स्थापना नवंबर 1971 में की गई थी। विकासखंड बंगरा अंतर्गत 59 ग्राम पंचायतें हैं। आसपास मध्य प्रदेश की कई सीमाओं के चलते लगभग 150 से अधिक गांवों का जुड़ाव यहां से है। इस वजह से प्रतिदिन सैकड़ों मरीज सीएचसी में आते हैं। यहां एक्स-रे मशीन होने के बाद भी मरीजों को उसका लाभ नहीं मिल रहा है। अल्ट्रासाउंड मशीन है नहीं, साथ ही सीएचसी में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से भी मरीज अक्सर निराश होकर लौट जाते हैं।
सीएचसी बंगरा में एक्स-रे मशीन तो है, लेकिन दो वर्षों से इसका उपयोग नहीं हो रहा है। वजह है ऑपरेटर का समय से न मिलना और मशीन चलाने के लिए उपकरणों की कमी होना। बताया गया कि एक्स-रे मशीन के लिए ऑपरेटर की तैनाती तो है, लेकिन वह झांसी संबंद्ध है। इसी तरह सीएचसी में आने वाले मरीजों को परेशानी उस समय होती है जब यहां मशीन न होने से अल्ट्रासाउंड हो नहीं पाता और हड्डी रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ और महिला चिकित्सक की तैनाती न होने से उन्हें झांसी या कहीं ओर इलाज के लिए जाना पड़ता है।
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झांसी-खजुराहो हाईवे किनारे स्थित होने के कारण प्रतिदिन दुर्घटनाओं के शिकार व्यक्ति अस्पताल आते हैं। सुविधाओं की कमी की वजह से उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया जाता है। झांसी की दूरी बंगरा से 50 किमी है। गंभीर मरीज को झांसी ले जाने के दौरान अनहोनी की आशंका बनी रहती है। इसका सबसे ज्यादा असर निर्धन वर्ग के लोगों पर पड़ता है। गौरतलब है कि सीएचसी बंगरा अंतर्गत 43 उप स्वास्थ्य केंद्र, चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। सीएचसी में भी सात चिकित्सकों सहित 60 से अधिक कर्मचारियों का स्टाफ है। एएनएम एवं संविदा कर्मी भी 60 से अधिक हैं। आशा बहुओं की संख्या भी 156 हैं।
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हेल्थ एटीएम का मिल रहा लाभ
सीएचसी में हेल्थ एटीएम से लोगों को भरपूर लाभ मिल रहा है। 24 घंटे इमरजेंसी सुविधा भी बेहतर है। सुविधाओं के तौर पर 20 फायर सिलेंडर भी पूरी तरह से दुरुस्त हैं।
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वर्जन
सीएचसी में एक्स-रे मशीन के लिए कुछ तकनीकी सामान की आवश्यकता है। उसके लिए दो वर्षों से मांग की जा रही है। इसके बाद भी सामान मुहैया नहीं कराया गया है। सीएचसी में आधुनिक मशीनरी उपकरणों सहित विषय विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम की भी आवश्यकता है। अल्ट्रासाउंड मशीन की भी जरूरत है। - डॉ. केके राजपूत, चिकित्साधीक्षक