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Jhansi: साल भर में मिले हेपेटाइटिस-बी के 556 व सी के 167 मरीज, जांच में सामने आया मामला

Sun, 22 Feb 2026 01:04 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Sun, 22 Feb 2026 01:04 AM IST
सार

मेडिकल कॉलेज के अनुसार, हर माह औसतन हेपेटाइटिस-बी के 46 व हेपेटाइटिस-सी के 13 रोगी मिल रहे हैं। 120 से ज्यादा लोगों में इस संक्रमण की पुष्टि रक्तदान से पूर्व की स्क्रीनिंग या ऑपरेशन से पूर्व होने वाली जांच से हुई।

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Jhansi: 556 Hepatitis B and 167 C patients found in a year, the matter came to light during investigation.
मेडिकल कॉलेज, झांसी - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

चिंता का विषय है कि बुंदेलखंड में हेपेटाइटिस-बी और सी के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। मेडिकल कॉलेज के अनुसार, हर माह औसतन हेपेटाइटिस-बी के 46 व हेपेटाइटिस-सी के 13 रोगी मिल रहे हैं। 120 से ज्यादा लोगों में इस संक्रमण की पुष्टि रक्तदान से पूर्व की स्क्रीनिंग या ऑपरेशन से पूर्व होने वाली जांच से हुई। डॉक्टरों का कहना है कि स्क्रीनिंग बढ़ने की वजह से यह आंकड़ा बढ़ा है।
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मेडिकल कॉलेज में हेपेटाइटिस यूनिट 2021 में शुरू हुई, जहां रोगियों की नियमित जांच व दवाएं दी जाती हैं। इस यूनिट में शुरुआत से अब तक हेपेटाइटिस-बी के 1695 व सी के 489 रोगी मिले हैं। वहीं, जनवरी 2025 से दिसंबर तक हेपेटाइटिस बी के 554 और सी के 167 नए रोगी मिले हैं, जो चिंता का विषय है। डॉक्टरों का कहना है कि कई स्वस्थ लोगों में इस संक्रमण का पता रक्तदान से पूर्व अथवा ऑपरेशन से पूर्व हुई जांच में चला। हालांकि इनमें वायरल लोड (प्रभाव) कम मिला है। इस वजह से इन लोगों में इसका असर नहीं हुआ।
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चिकित्सक ने बताया कि हेपेटाइटिस-बी और सी खानपान से नहीं बल्कि संक्रामक खून अथवा सिरिंज से होता है। जिनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है, उनमें वायरस हावी नहीं होता है। जैसे ही प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, वायरस अपना असर दिखना शुरू कर देता है। इसकी नियमित दवा करने से रोगी सामान्य जिंदगी जीते हैं। खानपान में विशेष परहेज करना होता है।
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वायरल लोड के हिसाब से शुरू होती है दवा
डॉक्टर ने बताया कि हेपेटाइटिस-बी अथवा सी होने की पुष्टि होने का मतलब यह नहीं है कि तुरंत उपचार शुरू कर दिया जाए। इसका उपचार शुरू करने से पहले रोगी की सीएफटी व सीबीसी के साथ वायरस लोड की जांच कराई जाती है। यदि जांच सामान्य और वायरस लोड कम मिलता है तो उपचार शुरू नहीं किया जाता है। वायरस के प्रभाव पर निगरानी के लिए हर माह जांच कराई जाती है।



0- यह है हेपेटाइटिस-बी या सी के लक्षण
डॉक्टर के अनुसार, रोगी को पीलिया बार-बार होने के साथ पाचन क्रिया प्रभावित रहती है। इसके साथ ही सेहत में गिरावट होने लगती है। ज्यादा तबीयत बिगड़ने पर रोगी के पेट में पानी भर जाता है और हाथ-पैर पतले होने लगते हैं।



0-वर्जन
जनवरी से 31 दिसंबर 2025 तक हेपेटाइटिस-बी के 554 और हेपेटाइटिस-सी के 167 रोगी मिले हैं। सघन स्क्रीनिंग और जांच होने की वजह से ये मामले सामने आए हैं। 120 से ज्यादा रोगियों में रक्तदान के बाद अथवा ऑपरेशन से पूर्व होने वाली जांचों से इसकी पुष्टि हुई है। - डॉ. विवेक रिछारिया, मेडिकल कॉलेज
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