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मिलने लगा काम, बुंदेलखंड के कलाकारों के चेहरों पर लौटी चमक
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झांसी। कोरोना के कारण पिछले साल रामलीला नहीं हो पाई थी। ऐसे में बुंदेलखंड के 550 से भी अधिक कलाकार खाली बैठे हुए थे, लेकिन इस साल मंचन की अनुमति मिलने से कलाकारों के चेहरों की खोई चमक दोबारा लौट आई है। अधिकांश कलाकारों को काम मिलने लगा है।
बुंदेलखंड के यह कलाकार यूपी और एमपी के ग्वालियर, शिवपुरी, मैनपुरी, एटा, लखनऊ, मुरादाबाद आदि शहरों में रामलीलाओं का मंचन करने जाते हैं। कलाकारों का कहना है कि बुंदेलखंड के 7 जिलों में 100 से ज्यादा मंडलियां सक्रिय हैं। मंडलियों से जुड़े कलाकार रामलीला मंचन में संगीत, लोक नृत्य, साज-सज्जा आदि में काम करते हैं। इसके अलावा कई भूमिकाएं भी निभाते हैं। इनका कहना है कि सरकार की ओर से उन्हें कोई मदद नहीं है। कोरोना काल में काम न मिलने पर कलाकारों ने काफी आर्थिक संकट झेला। इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित ग्रामीण अंचलों के कलाकार रहे। अब मंचन के लिए अनुमति मिलने लगी है। ऐसे में कई कलाकारों को भूमिका निभाने के लिए बुलाया जाने लगा है।
बुंदेलखंड में 550 से भी अधिक कलाकार हैं। जो ल्लिी, मैनपुरी, मेरठ, मवाना आदि शहरों एवं ग्रामीण अंचलों में होने वाली रामलीला में काम करते हैं।
सोबरन सिंह, अध्यक्ष-श्री रामलीला संघ बुंदेलखंड
रामलीला मंचन को लेकर अभी भी कई लोग असमंजस में हैं। जिनका जीवन रामलीला पर आधारित है। उन कलाकारों के आर्थिक मदद मिलनी चाहिए।
उदयभान शर्मा, वरिष्ठ कलाकार भसनेह
अयोध्या, चित्रकूट, मुरादाबाद और रायबरेली सहित कई स्थानों पर हम बुंदेलखंड के कलाकार मंचन कर चुके हैं। इस साल काम मिलना शुरू हो गया है।
नरेंद्र दुबे, वरिष्ठ कलाकार
रामलीला के मंचन की तैयारियां शुरू हो गई है। ऐसे में रामलीला से जुड़े हुए कलाकारों को मंचन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से बुलावा आना शुरू हो गया है।
शीलू पंडित, वरिष्ठ कलाकार
इस बार जालौन की रामलीला में काम करेंगे। वहीं अभी कई कलाकार काम मिलने के इंतजार में हैं। उम्मीद है इन्हें जल्दी काम मिलेगा।
प्रयाग नारायण, वरिष्ठ कलाकार जालौन
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बुंदेलखंड के यह कलाकार यूपी और एमपी के ग्वालियर, शिवपुरी, मैनपुरी, एटा, लखनऊ, मुरादाबाद आदि शहरों में रामलीलाओं का मंचन करने जाते हैं। कलाकारों का कहना है कि बुंदेलखंड के 7 जिलों में 100 से ज्यादा मंडलियां सक्रिय हैं। मंडलियों से जुड़े कलाकार रामलीला मंचन में संगीत, लोक नृत्य, साज-सज्जा आदि में काम करते हैं। इसके अलावा कई भूमिकाएं भी निभाते हैं। इनका कहना है कि सरकार की ओर से उन्हें कोई मदद नहीं है। कोरोना काल में काम न मिलने पर कलाकारों ने काफी आर्थिक संकट झेला। इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित ग्रामीण अंचलों के कलाकार रहे। अब मंचन के लिए अनुमति मिलने लगी है। ऐसे में कई कलाकारों को भूमिका निभाने के लिए बुलाया जाने लगा है।
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बुंदेलखंड में 550 से भी अधिक कलाकार हैं। जो ल्लिी, मैनपुरी, मेरठ, मवाना आदि शहरों एवं ग्रामीण अंचलों में होने वाली रामलीला में काम करते हैं।
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रामलीला मंचन को लेकर अभी भी कई लोग असमंजस में हैं। जिनका जीवन रामलीला पर आधारित है। उन कलाकारों के आर्थिक मदद मिलनी चाहिए।
उदयभान शर्मा, वरिष्ठ कलाकार भसनेह
अयोध्या, चित्रकूट, मुरादाबाद और रायबरेली सहित कई स्थानों पर हम बुंदेलखंड के कलाकार मंचन कर चुके हैं। इस साल काम मिलना शुरू हो गया है।
नरेंद्र दुबे, वरिष्ठ कलाकार
रामलीला के मंचन की तैयारियां शुरू हो गई है। ऐसे में रामलीला से जुड़े हुए कलाकारों को मंचन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से बुलावा आना शुरू हो गया है।
शीलू पंडित, वरिष्ठ कलाकार
इस बार जालौन की रामलीला में काम करेंगे। वहीं अभी कई कलाकार काम मिलने के इंतजार में हैं। उम्मीद है इन्हें जल्दी काम मिलेगा।
प्रयाग नारायण, वरिष्ठ कलाकार जालौन
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