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आचार संहिता से लटके काम बन न जाएं नासूर

Mon, 13 May 2019 12:40 AM IST
jhansi Published by: देवेंद्र कुमार Updated Mon, 13 May 2019 12:40 AM IST
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work started after loksabha election
nagar nigam jhansi - फोटो : demo
झांसी। आचार संहिता के  कारण महानगर के विकास कार्य अधर में लटके हुए हैं। कहीं पानी की समस्या है तो कहीं बरसात को लेकर चिंता। लेकिन, नगर निगम के जिम्मेदारों को इसकी कोई टेंशन नहीं है। उनका एक ही राग है जो भी काम हैं अब आचार संहिता के बाद होंगे। दूसरी ओर नगर निगम के कर्मचारी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उंगली उठा रहे हैं।
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गर्मियों में पानी का संकट दूर करने के लिए नगर निगम कोई न कोई कदम हर साल उठाता है। प्यास बुझाने के लिए प्रत्येक समस्याग्रस्त वार्डों में हैंडपंप तो दूसरी ओर राहगीरों के लिए प्याऊ की व्यवस्था की जाती है। लेकिन, आचार संहिता ने सब पर पानी फेर दिया। दूसरी ओर बरसात में पानी लोगों के लिए मुसीबत बन जाएगा। क्योंकि, आचार संहिता के फेर में नालों की सफाई फंसी है। नगर निगम के अधिकारियों की मानें तो वह अब भी बरसात के पहले नाला साफ करने का दावा करने से पीछे नहीं हट रहे हैं।  
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इधर, पार्षदों की मानें तो वार्डों में विकास कार्य पूर्ण रूप से ठप हैं। इसका कारण सदन की बैठक न होना है। पार्षदों की मानें तो दिसंबर में हुई बैठक में कुछ प्रस्ताव पास हुए थे। उनमें से कुछ ही काम शुरू हुए बाकी अधर में लटके हुए हैं, जो संभवत: आचार संहिता पूरा होने के बाद ही शुरू होंगे।
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ये हैं प्रमुख कार्य
- नए हैंडपंप लगाने व पुराने को सुधारने
- जर्जर सड़कों की मरम्मत
- नालियों का निर्माण
- नालों की सफाई
- प्वाइंटों पर प्याऊ
- समस्याग्रस्त इलाकों में टैंकर व्यवस्था

 
नालों की सफाई पर सवाल
नालों की सफाई रामभरोसे है। महापौर रामतीर्थ सिंघल की मानें तो नालों की सफाई का काम आचार संहिता खत्म होने के बाद टेंडर प्रक्रिया के जरिये ही पूरा होगा, जिसमें समय लगेगा। इससे स्पष्ट है कि मई माह के माह के अंत में आचार संहिता हटेगी। मानसून आने में पंद्रह दिन लगेंगे और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने में भी लगभग इतना ही समय लगेगा। इससे नालों की सफाई पर संकट है।


सफाई कर्मचारी संघ ने उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश सफाई कर्मचारी संघ के महानगर अध्यक्ष केशव बाल्मीकि ने बताया कि नगर निगम सीमा में 227 नाले हैं, जिनकी सफाई का कार्य अब तक शुरू नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि आचार संहिता की आड़ में नगर निगम में खेल हो रहा है। जबकि, हाल में 323 सफाई मजदूर आउटसोर्स पर रखे गए हैं। इनमें अधिकांश वह मजदूर हैं जिन्हें नालों की सफाई व्यवस्था में प्राथमिकता दी जाती है पर इस बार ऐसा नहीं है। पूर्व में दस-दस मजदूरों को बांट कर सफाई निरीक्षकों को नाला गैंग बनाने का आदेश दिया था। उस आदेश पर कुछ नाला गैंग तैयार की गईं थीं जो मौजूदा समय में नहीं हैं। आरोप है कि नाला गैंग को साढ़े सात हजार रुपये देकर कार्य कराया जाता है। जबकि, फाइलों में उन्हें मिलने वाला पारिश्रमिक 12,500 है। इस पर संघ ने निर्णय लिया है कि आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन बढ़ने, नाला गैंग को सही वेतन मिलने तक वह कार्य नहीं करेंगे।


 प्याऊ लगवाए
हिंदु जागरण मंच के महानगर महामंत्री नरेश कश्यप ने भीषण गर्मी को देखते हुए नगर में जगह-जगह प्याऊ की व्यवस्था की है। उन्होंने बताया कि कई ऐसे स्थानों को चिह्नित किया गया जहां राहगीरों की आवाजाही ज्यादा है और पानी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। इस मौके पर विनोद अवस्थी, जितेंद्र थापक, मानवेंद्र पचौरी, विकास अवस्थी मौजूद रहे।



सदन की बैठक, हैंडपंप और नालों की सफाई आचार संहिता के बाद ही संभव है। जबकि, प्याऊ के लिए व्यवस्था की जा रही है। यदि प्रयास सफल रहे तो जल्द ही प्वाइंटों पर प्याऊ लगवाए जाएंगे। - रामतीर्थ सिंघल, महापौर
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