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झांसी में बनेगा नया महिला अस्पताल, जमीन की तलाश शुरू
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झांसी। जिले में नया महिला अस्पताल बनेगा। इसके लिए जमीन की तलाश शुरू हो गई है। पुराने अस्पताल में जगह की कमी के चलते कई प्रस्ताव लटके पड़े हैं। ऐसे में मरीजों को कई चिकित्सीय सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है।
मौजूदा महिला अस्पताल जिला अस्पताल के पीछे बना हुआ है, जो कि काफी छोटा है। बताया गया कि इस अस्पताल के निर्माण को लगभग सौ साल हो चुके हैं। ऐसे में यहां पर डॉक्टरों के पद भी सिर्फ दस ही सृजित हैं। जबकि, मंडल के जालौन और ललितपुर जनपद में महिला अस्पताल आजादी के बाद बनाए गए, जिनकी जगह भी अधिक है और डॉक्टरों के पद भी 15-15 सृजित हैं। हाल ही में जनपद दौरे पर आए अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद के सामने भी महिला अस्पताल में जगह की कमी का मुद्दा सिफ्सा के मंडलीय प्रबंधक आनंद चौबे ने उठाया था। उन्होंने नई जगह पर अस्पताल का निर्माण कराने की मांग की थी। प्रमुख सचिव ने भी इसके लिए जमीन की खोज करने के निर्देश दिए थे। जिसकी प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। नई अस्पताल के लिए तीन से पांच एकड़ की जरूरत है। जगह मिलते ही बजट के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। इसके बाद अस्पताल का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
एमसीएच यूनिट नहीं खुल पाई, न हुए 100 बेड
महिला अस्पताल में मदर एंड चाइल्ड केयर हॉस्पिटल की स्थापना को लगभग पांच वर्ष पहले मंजूरी मिल गई थी। मगर जगह के अभाव में इसकी बिल्डिंग का निर्माण ही नहीं हो सका। यहां एसएनसीयू, एनआरसी, लेबर रूम, वार्ड, मॉड्यूलर ओटी बननी है। कई मंजिला इस बिल्डिंग में कुल 100 बेड बनने हैं। वहीं, दूसरी तरफ किले की वजह से पुरातत्व विभाग से तीन मंजिल से ऊपर इमारत बनाने की अनुमति भी नहीं मिलेगी। इसके अलावा अस्पताल में 54 की जगह 100 बेड किए जाने हैं मगर जगह की कमी के चलते बेडों का विस्तार भी नहीं हो पा रहा है।
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जिला अस्पताल में भी शुरू नहीं हुई एमआरआई जांच
सिर्फ महिला हॉस्पिटल ही नहीं जिला अस्पताल भी जगह की समस्या से जूझ रहा है। यहां पर वर्ष 2017 में प्रदेश सरकार की तरफ से एमआरआई मशीन की स्थापना की मंजूरी दी जा चुकी है। इसके लिए 1500 स्क्वॉयर फीट जगह की जरूरत है लेकिन कई सालों तक तो अस्पताल प्रशासन जगह तय ही नहीं कर पाया। अब आरडीसी सेंटर में मशीन की स्थापना का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। देखने वाली बात ये है कि इसे मंजूरी मिलती है या नहीं। वहीं, नया महिला अस्पताल बनने के बाद जिला अस्पताल का पुराने हॉस्पिटल में विस्तार भी किया जा सकता है।
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मौजूदा महिला अस्पताल जिला अस्पताल के पीछे बना हुआ है, जो कि काफी छोटा है। बताया गया कि इस अस्पताल के निर्माण को लगभग सौ साल हो चुके हैं। ऐसे में यहां पर डॉक्टरों के पद भी सिर्फ दस ही सृजित हैं। जबकि, मंडल के जालौन और ललितपुर जनपद में महिला अस्पताल आजादी के बाद बनाए गए, जिनकी जगह भी अधिक है और डॉक्टरों के पद भी 15-15 सृजित हैं। हाल ही में जनपद दौरे पर आए अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद के सामने भी महिला अस्पताल में जगह की कमी का मुद्दा सिफ्सा के मंडलीय प्रबंधक आनंद चौबे ने उठाया था। उन्होंने नई जगह पर अस्पताल का निर्माण कराने की मांग की थी। प्रमुख सचिव ने भी इसके लिए जमीन की खोज करने के निर्देश दिए थे। जिसकी प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। नई अस्पताल के लिए तीन से पांच एकड़ की जरूरत है। जगह मिलते ही बजट के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। इसके बाद अस्पताल का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
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एमसीएच यूनिट नहीं खुल पाई, न हुए 100 बेड
महिला अस्पताल में मदर एंड चाइल्ड केयर हॉस्पिटल की स्थापना को लगभग पांच वर्ष पहले मंजूरी मिल गई थी। मगर जगह के अभाव में इसकी बिल्डिंग का निर्माण ही नहीं हो सका। यहां एसएनसीयू, एनआरसी, लेबर रूम, वार्ड, मॉड्यूलर ओटी बननी है। कई मंजिला इस बिल्डिंग में कुल 100 बेड बनने हैं। वहीं, दूसरी तरफ किले की वजह से पुरातत्व विभाग से तीन मंजिल से ऊपर इमारत बनाने की अनुमति भी नहीं मिलेगी। इसके अलावा अस्पताल में 54 की जगह 100 बेड किए जाने हैं मगर जगह की कमी के चलते बेडों का विस्तार भी नहीं हो पा रहा है।
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जिला अस्पताल में भी शुरू नहीं हुई एमआरआई जांच
सिर्फ महिला हॉस्पिटल ही नहीं जिला अस्पताल भी जगह की समस्या से जूझ रहा है। यहां पर वर्ष 2017 में प्रदेश सरकार की तरफ से एमआरआई मशीन की स्थापना की मंजूरी दी जा चुकी है। इसके लिए 1500 स्क्वॉयर फीट जगह की जरूरत है लेकिन कई सालों तक तो अस्पताल प्रशासन जगह तय ही नहीं कर पाया। अब आरडीसी सेंटर में मशीन की स्थापना का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। देखने वाली बात ये है कि इसे मंजूरी मिलती है या नहीं। वहीं, नया महिला अस्पताल बनने के बाद जिला अस्पताल का पुराने हॉस्पिटल में विस्तार भी किया जा सकता है।