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मेडिकल कॉलेज के महिला डॉक्टर की मौत की सीबीसीआईडी जांच शुरू
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झांसी। झांसी मेडिकल कॉलेज में गोरखपुर निवासी डॉ. प्रीति मिश्रा की मौत के मामले में सीएम के आदेश के बाद सीबीसीआईडी ने जांच शुरू कर दी है। सितंबर 2016 में डॉ प्रीति का शव संदिग्ध हालात में मेडिकल कॉलेज स्थित हॉस्टल के कमरे मेें मिला था। पोस्टमार्टम व विसरा रिपोर्ट में जहरीले पदार्थ की पुष्टि नहीं हो सकी थी। जबकि परिजनों ने हत्या के आरोप लगाए थे। बृहस्पतिवार को सीबीसीआईडी के एडीजी एलवी एंटोनी देवकुमार ने झांसी आकर घटना स्थल को देखकर प्रधानाचार्य, वार्डन और कई डॉक्टरों के बयान दर्ज किए।
गोरखपुर के सहजनवां थाना अंतर्गत खानीपुरा निवासी रेलवे टेक्नीशियन देवेंद्र मिश्रा की बेटी प्रीति मिश्रा (26) रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज से एमडी (आयुर्विज्ञान चिकित्सक) की पढ़ाई कर रही थीं। वह मेडिकल कॉलेज के पीजी छात्रावास के रूम नंबर 69 में रहती थीं। सितंबर 2016 की रात 10.52 बजे भाई अंकुर मिश्रा व मां उर्मिला मिश्रा से फोन पर बात करने के दौरान उन्होेंने डायरिया होने की बात बताई थी। रात में ही मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी से इलाज कराने के बाद वह हॉस्टल पहुंच गई थीं। अगले दिन साथी छात्राएं हॉस्टल पहुंची थीं, यहां उनका कमरा नहीं खुला था। गेट तोड़कर अंदर जाकर देखा था तो वह पलंग पर मृत पड़ी थीं और मुंह से झाग आ रहा था। सूचना पर नवाबाद पुलिस ने शव को कब्जे में लिया था।
मौके से कोई भी सुसाइड नोट व संदिग्ध वस्तु नहीं मिली थी। भाई अंकुर मिश्रा व मां उर्मिला ने षड्यंत्र के तहत हत्या करने का आरोप लगाया था। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया था, लेकिन हत्या व जहरीला पदार्थ मिलने की पुष्टि नहीं हुई थी। इसके अलावा, विसरा जांच रिपोर्ट में भी जहरीला पदार्थ नहीं मिला था। कहीं से भी हत्या की पुष्टि न होने के बाद पुलिस ने फाइल को बंद कर दिया था। लेकिन, परिजन लगातार हत्या का आरोप लगा रहे थे। कुछ दिन पहले परिजनों ने मुख्यमंत्री से मिलकर पूरा मामला उनके सामने उठाकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इस पर मुख्यमंत्री ने सीबीसीआईडी को जांच करने के निर्देश दिए थे।
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गोरखपुर के सहजनवां थाना अंतर्गत खानीपुरा निवासी रेलवे टेक्नीशियन देवेंद्र मिश्रा की बेटी प्रीति मिश्रा (26) रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज से एमडी (आयुर्विज्ञान चिकित्सक) की पढ़ाई कर रही थीं। वह मेडिकल कॉलेज के पीजी छात्रावास के रूम नंबर 69 में रहती थीं। सितंबर 2016 की रात 10.52 बजे भाई अंकुर मिश्रा व मां उर्मिला मिश्रा से फोन पर बात करने के दौरान उन्होेंने डायरिया होने की बात बताई थी। रात में ही मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी से इलाज कराने के बाद वह हॉस्टल पहुंच गई थीं। अगले दिन साथी छात्राएं हॉस्टल पहुंची थीं, यहां उनका कमरा नहीं खुला था। गेट तोड़कर अंदर जाकर देखा था तो वह पलंग पर मृत पड़ी थीं और मुंह से झाग आ रहा था। सूचना पर नवाबाद पुलिस ने शव को कब्जे में लिया था।
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मौके से कोई भी सुसाइड नोट व संदिग्ध वस्तु नहीं मिली थी। भाई अंकुर मिश्रा व मां उर्मिला ने षड्यंत्र के तहत हत्या करने का आरोप लगाया था। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया था, लेकिन हत्या व जहरीला पदार्थ मिलने की पुष्टि नहीं हुई थी। इसके अलावा, विसरा जांच रिपोर्ट में भी जहरीला पदार्थ नहीं मिला था। कहीं से भी हत्या की पुष्टि न होने के बाद पुलिस ने फाइल को बंद कर दिया था। लेकिन, परिजन लगातार हत्या का आरोप लगा रहे थे। कुछ दिन पहले परिजनों ने मुख्यमंत्री से मिलकर पूरा मामला उनके सामने उठाकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इस पर मुख्यमंत्री ने सीबीसीआईडी को जांच करने के निर्देश दिए थे।
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