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वायदा अब तक अधूरा, नहीं पूरी हुई 250 करोड़ की बबीना नहर परियोजना
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बबीना। बबीना विधानसभा बुंदेलखंड के सर्वाधिक सूखाग्रस्त इलाकों में शुमार है। पानी न होने से फसलें बर्बाद हो जाती हैं। यहां पानी पहुंचाने के लिए बबीना नहर प्रणाली समेत कई योजनाओं में पिछले कई वर्षों से काम चल रहा है, लेकिन अभी तक यह पूरी नहीं हुई। सर्वाधिक महत्वपूर्ण बबीना नहर परियोजना से विधानसभा का करीब 4400 हेक्टेयर इलाका सिंचित होना था। विधानसभा चुनाव में इसे पूरा कराने के वायदे हुए, लेकिन 250 करोड़ की बबीना नहर परियोजना अब तक पूरी नहीं हो सकी। जनता का कहना है कि जो वादे विधायक ने किए थे वह पूरे नहीं हो सके हैं।
बबीना विधानसभा के बबीना ब्लॉक में सिंचाई व्यवस्था बदहाल है। इस पूरे इलाके में नहर नहीं है। जमीन ऊंची-नीची है। इस वजह से नलकूप भी सफल नहीं हैं। इन इलाकों में खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए बबीना नहर परियोजना 24 सितंबर 2014 को स्वीकृत हुई थी। इसकी मदद से बबीना ब्लॉक के बड़ौरा, बधौरा, घिसौली, बबीना, पुरा, पृथ्वीपुरा, नयाखेड़ा, सुकुवां, सिमिरिया, रसीना, मानपुर, कोठी, सेंकर समेत 15 ग्रामों तक पानी पहुंचाना था। यहां के लोगों का कहना है विधानसभा चुनाव के दौरान इस परियोजना को समय पर पूरा कराने का वायदा किया गया लेकिन, चुनाव खत्म होते ही परियोजना की रफ्तार धीमी पड़ गई। काफी दिनों तक काम बंद रहा। कुछ समय बाद काम शुरू हुआ लेकिन, अभी तक काम पूरा नहीं हो सका है। समय पर पूरी न होने से इसकी लागत बढ़कर 250 करोड़ हो चुकी है। इसकी मदद से रबी के लिए करीब 3200 हेक्टेयर एवं खरीफ के लिए 1200 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो सकेगी। इससे दलहन एवं तिलहन उत्पादन को बढ़ावा मिलता।
सिमरिया, टेकनपुर, लाहार समेत दर्जनों अन्य गांव में भी सिंचाई की ठीक व्यवस्था नहीं है। किसानों का कहना है केवल बरसात में कुओं से सिंचाई हो पाती है। उनकी शिकायत है कि चुनाव जीतने के बाद विधायक एक बार भी गांव नहीं आए जबकि चुनाव से पहले खेतों तक पानी पहुंचाने से लेकर तमाम वायदे किए गए थे। इन वायदों के पूरा होने का आज भी ग्रामीण इंतजार कर रहे हैं।
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खेतों तक पानी पहुंचाने का कोई इंतजाम नहीं है। किसानों को बड़ी परेशानी होती है। विधानसभा चुनाव के दौरान खेतों तक पानी पहुंचाने के वायदे हुए लेकिन, कुछ भी नहीं हुआ।
राम कुसुम
सिर्फ चुनाव तक ही वायदे सीमित हैं। खेतों में सिंचाई के लिए कोई साधन नहीं हैं। खेती सिर्फ बरसात और कुओं पर निर्भर है। कई बार पानी की समस्या से फसल खराब हो गई। मुआवजा भी नहीं मिलता।
कल्याण सिंह
गांव में एक बार विधायक वोट मांगने आए थे। जीतने के बाद दोबारा उन्हें देख ही नहीं पाए। कई बार समस्याएं उन तक पहुंचाई गईं। आज तक कोई हल नहीं निकला। पानी की समस्या अभी तक बनी हुई है।
सोनी यादव
नहर शुरू हो जाए तक किसानों को फायदा है। अभी सिर्फ बारिश ही सहारा है। उड़द की फसल खराब हो गई। विधायक को इसके बारे में बताया गया। उन्होंने सुध नहीं ली। चुनाव के दौरान ही सिर्फ वायदे किए गए।
टीकाराम
गांव तक नहर आ जाए, तब खेती-किसानी बेहतर हो लेकिन, कोई सुनवाई को राजी नहीं हालांकि चुनाव के दौरान तमाम वायदे किए गए। खेत तक पानी लाने की बात की गई। आज तक पानी यहां नहीं पहुंचा।
अमृत पाल
न खेतों में पानी है न घरों में। कुछ माह पूर्व पाइपलाइन के माध्यम से दो स्टैंड पोस्ट बनाए गए। इन स्टैंड पोस्ट के नलों में तब से पानी नहीं आया। शिकायत के बाद भी कोई इसे दुरुस्त करने नहीं आया।
अंगद सिंह
गर्मियों में कुएं सूख जाते हैं। नहर से पानी मिले तब सुविधा हो जाए। गांव की सड़क भी उखड़ी हुई है। बिजली के तार बल्लियों पर लटके हैं।
नीरज अहिरवार
पूरे मजरे के लिए दो हैंडपंप हैं। एक काफी समय से खराब पड़ा है। एक हैंडपंप पर पानी भरने को महिलाओं की भीड़ रहती है। चुनाव के दौरान गांव की समस्याओं को दूर करने का हर कोई वायदा करता है लेकिन, काम कोई नहीं कराता।
नरेश
खेतों तक नहर का काफी समय से इंतजार कर रहे हैं। पिछले चुनाव में इसे पूरा कराने का भरोसा दिलाया गया था लेकिन, आज तक पानी नहीं मिला।
राघवेंद्र
गांव में न बिजली मिलती है न खेतों को पानी। बिजली के तारों के लिए भी खंभे नहीं हैं। तीन जगह नल लगे हैं, उनमें पानी ही नहीं आता।
नाथूराम
अभी पिछले माह ही विधायक ने पेयजल व्यवस्था दुरुस्त कराने का वायदा किया था लेकिन, समस्या अभी भी जस की तस है। कोई अधिकारी इस ओर झांकने नहीं आता।
छत्रपाल
गांव के तालाब से जानवरों को पीने के पानी के साथ लोगों के नहाने की व्यवस्था हो जाती थी। अब तालाब को जलकुंभी ने नष्ट कर दिया। शिकायत के बाद भी ध्यान नहीं दिया गया।
आजाद सिंह
विधायक बोले
खेतों के साथ घरों तक पहुंचाया पानी
- 1130 करोड़ की लागत से बबीना में चल रही जल परियोजना
-2.39 करोड़ से तैयार कराए चेकडैम
बबीना विधायक राजीव सिंह पारीछा का कहना है कि सर्वाधिक जल परियोजनाएं उनके समय में ही आरंभ हुईं। विधायक के मुताबिक पूरे विधानसभा इलाके में 2.39 करोड़ की लागत से चिरगांव, बड़ागांव एवं बबीना ब्लॉक में चेकडैम बनवाए गए। इसी तरह इन्हीं ब्लॉकों में 335 ब्लास्ट कूपों का निर्माण कराया। 1130 करोड़ की लागत से हर घर जल, हर घर नल योजना स्वीकृत कराई। इसके माध्यम से चिरगांव के गुलारा, बड़ागांव ब्लॉक के तिलैथा, बचावली एवं बबीना ब्लॉक के बुढ़पुरा इलाके में पेयजल योजना स्वीकृत हो गई। दिसंबर महीने से पहले आपूर्ति करने का लक्ष्य भी तय है। किसानों को सिंचाई की सहूलियत के लिए निजी नलकूप लगाने में छूट दिलाई गई है। इससे जिन इलाकों में लोग सिंचाई नहीं कर पाते उनको मदद हो रही है। पहले निजी नलकूप पर मिलने वाली 68 हजार की छूट सिर्फ 7.5 एचपी के विद्युत भार पर ही मिल रही थी लेकिन, अब इससे कम क्षमता के नलकूप पर भी यह छूट दिलाई जा रही है। अप्रैल 2012 से मार्च 2017 तक सिर्फ 86 निजी नलकूप स्वीकृत हुए थे जबकि अब अप्रैल 2017 से जून 2021 तक 179 निजी नलकूप स्वीकृत हो गए हैं। सिंचाई में किसानों को परेशानी न हो इसके लिए अब निजी नलकूप सरकारी खर्च पर कार्यशाला तक भिजवाए जा रहे हैं। विधायक का कहना है कि जो भी परियोजनाएं अधूरी हैं, वह भी जल्द पूरी हो जाएंगी।
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बबीना विधानसभा के बबीना ब्लॉक में सिंचाई व्यवस्था बदहाल है। इस पूरे इलाके में नहर नहीं है। जमीन ऊंची-नीची है। इस वजह से नलकूप भी सफल नहीं हैं। इन इलाकों में खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए बबीना नहर परियोजना 24 सितंबर 2014 को स्वीकृत हुई थी। इसकी मदद से बबीना ब्लॉक के बड़ौरा, बधौरा, घिसौली, बबीना, पुरा, पृथ्वीपुरा, नयाखेड़ा, सुकुवां, सिमिरिया, रसीना, मानपुर, कोठी, सेंकर समेत 15 ग्रामों तक पानी पहुंचाना था। यहां के लोगों का कहना है विधानसभा चुनाव के दौरान इस परियोजना को समय पर पूरा कराने का वायदा किया गया लेकिन, चुनाव खत्म होते ही परियोजना की रफ्तार धीमी पड़ गई। काफी दिनों तक काम बंद रहा। कुछ समय बाद काम शुरू हुआ लेकिन, अभी तक काम पूरा नहीं हो सका है। समय पर पूरी न होने से इसकी लागत बढ़कर 250 करोड़ हो चुकी है। इसकी मदद से रबी के लिए करीब 3200 हेक्टेयर एवं खरीफ के लिए 1200 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो सकेगी। इससे दलहन एवं तिलहन उत्पादन को बढ़ावा मिलता।
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सिमरिया, टेकनपुर, लाहार समेत दर्जनों अन्य गांव में भी सिंचाई की ठीक व्यवस्था नहीं है। किसानों का कहना है केवल बरसात में कुओं से सिंचाई हो पाती है। उनकी शिकायत है कि चुनाव जीतने के बाद विधायक एक बार भी गांव नहीं आए जबकि चुनाव से पहले खेतों तक पानी पहुंचाने से लेकर तमाम वायदे किए गए थे। इन वायदों के पूरा होने का आज भी ग्रामीण इंतजार कर रहे हैं।
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खेतों तक पानी पहुंचाने का कोई इंतजाम नहीं है। किसानों को बड़ी परेशानी होती है। विधानसभा चुनाव के दौरान खेतों तक पानी पहुंचाने के वायदे हुए लेकिन, कुछ भी नहीं हुआ।
राम कुसुम
सिर्फ चुनाव तक ही वायदे सीमित हैं। खेतों में सिंचाई के लिए कोई साधन नहीं हैं। खेती सिर्फ बरसात और कुओं पर निर्भर है। कई बार पानी की समस्या से फसल खराब हो गई। मुआवजा भी नहीं मिलता।
कल्याण सिंह
गांव में एक बार विधायक वोट मांगने आए थे। जीतने के बाद दोबारा उन्हें देख ही नहीं पाए। कई बार समस्याएं उन तक पहुंचाई गईं। आज तक कोई हल नहीं निकला। पानी की समस्या अभी तक बनी हुई है।
सोनी यादव
नहर शुरू हो जाए तक किसानों को फायदा है। अभी सिर्फ बारिश ही सहारा है। उड़द की फसल खराब हो गई। विधायक को इसके बारे में बताया गया। उन्होंने सुध नहीं ली। चुनाव के दौरान ही सिर्फ वायदे किए गए।
टीकाराम
गांव तक नहर आ जाए, तब खेती-किसानी बेहतर हो लेकिन, कोई सुनवाई को राजी नहीं हालांकि चुनाव के दौरान तमाम वायदे किए गए। खेत तक पानी लाने की बात की गई। आज तक पानी यहां नहीं पहुंचा।
अमृत पाल
न खेतों में पानी है न घरों में। कुछ माह पूर्व पाइपलाइन के माध्यम से दो स्टैंड पोस्ट बनाए गए। इन स्टैंड पोस्ट के नलों में तब से पानी नहीं आया। शिकायत के बाद भी कोई इसे दुरुस्त करने नहीं आया।
अंगद सिंह
गर्मियों में कुएं सूख जाते हैं। नहर से पानी मिले तब सुविधा हो जाए। गांव की सड़क भी उखड़ी हुई है। बिजली के तार बल्लियों पर लटके हैं।
नीरज अहिरवार
पूरे मजरे के लिए दो हैंडपंप हैं। एक काफी समय से खराब पड़ा है। एक हैंडपंप पर पानी भरने को महिलाओं की भीड़ रहती है। चुनाव के दौरान गांव की समस्याओं को दूर करने का हर कोई वायदा करता है लेकिन, काम कोई नहीं कराता।
नरेश
खेतों तक नहर का काफी समय से इंतजार कर रहे हैं। पिछले चुनाव में इसे पूरा कराने का भरोसा दिलाया गया था लेकिन, आज तक पानी नहीं मिला।
राघवेंद्र
गांव में न बिजली मिलती है न खेतों को पानी। बिजली के तारों के लिए भी खंभे नहीं हैं। तीन जगह नल लगे हैं, उनमें पानी ही नहीं आता।
नाथूराम
अभी पिछले माह ही विधायक ने पेयजल व्यवस्था दुरुस्त कराने का वायदा किया था लेकिन, समस्या अभी भी जस की तस है। कोई अधिकारी इस ओर झांकने नहीं आता।
छत्रपाल
गांव के तालाब से जानवरों को पीने के पानी के साथ लोगों के नहाने की व्यवस्था हो जाती थी। अब तालाब को जलकुंभी ने नष्ट कर दिया। शिकायत के बाद भी ध्यान नहीं दिया गया।
आजाद सिंह
विधायक बोले
खेतों के साथ घरों तक पहुंचाया पानी
- 1130 करोड़ की लागत से बबीना में चल रही जल परियोजना
-2.39 करोड़ से तैयार कराए चेकडैम
बबीना विधायक राजीव सिंह पारीछा का कहना है कि सर्वाधिक जल परियोजनाएं उनके समय में ही आरंभ हुईं। विधायक के मुताबिक पूरे विधानसभा इलाके में 2.39 करोड़ की लागत से चिरगांव, बड़ागांव एवं बबीना ब्लॉक में चेकडैम बनवाए गए। इसी तरह इन्हीं ब्लॉकों में 335 ब्लास्ट कूपों का निर्माण कराया। 1130 करोड़ की लागत से हर घर जल, हर घर नल योजना स्वीकृत कराई। इसके माध्यम से चिरगांव के गुलारा, बड़ागांव ब्लॉक के तिलैथा, बचावली एवं बबीना ब्लॉक के बुढ़पुरा इलाके में पेयजल योजना स्वीकृत हो गई। दिसंबर महीने से पहले आपूर्ति करने का लक्ष्य भी तय है। किसानों को सिंचाई की सहूलियत के लिए निजी नलकूप लगाने में छूट दिलाई गई है। इससे जिन इलाकों में लोग सिंचाई नहीं कर पाते उनको मदद हो रही है। पहले निजी नलकूप पर मिलने वाली 68 हजार की छूट सिर्फ 7.5 एचपी के विद्युत भार पर ही मिल रही थी लेकिन, अब इससे कम क्षमता के नलकूप पर भी यह छूट दिलाई जा रही है। अप्रैल 2012 से मार्च 2017 तक सिर्फ 86 निजी नलकूप स्वीकृत हुए थे जबकि अब अप्रैल 2017 से जून 2021 तक 179 निजी नलकूप स्वीकृत हो गए हैं। सिंचाई में किसानों को परेशानी न हो इसके लिए अब निजी नलकूप सरकारी खर्च पर कार्यशाला तक भिजवाए जा रहे हैं। विधायक का कहना है कि जो भी परियोजनाएं अधूरी हैं, वह भी जल्द पूरी हो जाएंगी।