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देश का बंटवारा हुआ तो तीन दिन तक जहाज में छुपकर कराची से पहुंचे थे मुंबई

Sun, 14 Aug 2022 01:21 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 14 Aug 2022 01:21 AM IST
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When the country was partitioned, he had reached Mumbai from Karachi by hiding in a ship for three days.
झांसी। जब देश का बंटवारा हुआ तो मुहल्ले के कई लोग एक-एक करके हिंदुस्तान लौटने लगे। मुहल्ले में पसरे सन्नाटे ने हमारे अंदर भी डर पैदा कर दिया। फिर माता-पिता, भाई-बहन और बच्चों के साथ पाकिस्तान से भारत के लिए रवाना हुए। तीन दिन तक जहाज में छुपकर तमाम कष्ट झेलते हुए कराची से मुंबई (तब बंबई) पहुंचे। बंटवारे के समय का ये दर्द याद करके मसीहागंज के चंडीराम (92) आज भी दुखी हो जाते हैं।
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चंडीराम ने बताया कि वे सिंध (वर्तमान में पाकिस्तान का हिस्सा) के रहने वाले हैं। जिला लरकाना में वे परिवार के साथ हंसी खुशी रहते थे। वहां उनकी खेती-बाड़ी थी। जिस मोहल्ले में रहते थे, वहां कई मुस्लिम और हिंदू परिवार मिल जुलकर रहते थे। आजादी की लड़ाई के दौरान कई बार अंग्रेजों ने उनको और उनके दोस्तों को उठाकर जेल में डाल दिया। 13 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई। शादी के तीन साल बाद देश आजाद हुआ। जब देश के बंटवारे की खबर सुनी तो मुहल्ले के लोगों में कोई मनमुटाव नहीं था। मगर धीरे-धीरे जब मोहल्ले खाली होने लगा तब उनके परिवार ने भी भारत आने का मन बना लिया। दादा-दादी वहां से आने को तैयार नहीं हुए। वे कहने लगे कि अगर मरना है तो यहीं मरेंगे। अब इस उम्र में कहीं और नहीं जाएंगे। जब 72 घंटे का सफर करने के बाद कराची से मुंबई लौटे तो दो सालों तक बैरक में रहे। सरकार ने खाने-पीने का इंतजाम किया। मगर मुंबई की हवा पानी सहन न कर पाने से दो भाई और एक बहन की मौत हो गई। उसके बाद मजदूरी कर पैसे जोड़े और फिर अपना कारोबार शुरू किया।
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पसंदीदा चीजें वहीं छोड़ आए थे
झांसी। 85 साल के खियल दास खियानी बताते हैं कि बंटवारे के समय उनकी उम्र 10 साल थी। पाकिस्तान में जहां रहते थे, वहां डर या खौफ का मंजर नहीं था। लेकिन माहौल खराब होने की आशंका से माता-पिता ने भारत आने का निर्णय लिया। वहां कक्षा 4 तक पढ़ाई की थी। यहां आकर कल्याण में रहे थे। फिर हरिद्वार और वहां से मथुरा आ गए। आखिर में आगरा में जाकर अपनी पढ़ाई पूरी की। रेलवे में नौकरी लग गई। बंटवारे के समय भारत लौटते समय अपने दोस्त, अपना घर, कई पसंदीदा चीजें वहीं छोड़कर आ गए थे।
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