चौंकाने वाला मामला: पीरियड रुका तो डेढ़ साल तक खुद को गर्भवती मानती रही महिला, कई टेस्ट के बाद पता चला PCOD है
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कानपुर में हाल ही में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें डेढ़ साल तक आयकर अधिकारी की लाश के साथ परिवार रहता रहा। झांसी में कानपुर जैसा तो नहीं, मगर इससे मिलते-जुलते कई मामले सामने आ चुके हैं। मनोचिकित्सक डॉ. अर्जित गौरव ने बताया कि उनके पास सीपरी बाजार की रहने वाली एक पैंतीस वर्षीय महिला को स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ ने रेफर किया था। महिला को जब पीरियड आने बंद हो गए तो वो खुद को गर्भवती समझने लगी। पति के साथ महिला चिकित्सक के पास पहुंची तो उन्होंने अल्ट्रासाउंड कराने को कहा। जब उसमें प्रेगनेंसी नहीं आई तो फिर यूरिन और ब्लड टेस्ट कराया। तब डॉक्टर ने महिला से कहा कि वह गर्भवती नहीं है।
दरअसल, उसे पीसीओडी की बीमारी है। महिला ने एक के बाद एक कई डॉक्टर बदले। ऐसा करते-करते करीब डेढ़ साल हो गए। बाद में एक चिकित्सक ने उसके पति से महिला को मनोचिकित्सक के पास ले जाने की सलाह दी।
डॉ. अर्जित के मुताबिक वह महिला परसिस्टेंट डिल्यूशनल डिसऑर्डर का शिकार थी। चार महीने तक इलाज चलने के बाद महिला ठीक होने लगी। उन्होंने बताया कि इस बीमारी में मरीज एक भ्रम का जीवन जीने लगता है। कानपुर का जो ताजा मामला सामने आया है, उसमें भी किसी परिजन को ये बीमारी हो सकती है। हर महीने 10 से 15 मरीज इस बीमारी के आते हैं। ज्यादातर केस 18 से 65 साल के होते हैं। शुरूआती स्टेज होने पर बीमारी ठीक होने में तीन से पांच साल लग जाते हैं। कुछ मामलों में जीवन भर दवाएं चलती हैं।
पीसीओडी में गड़बड़ा जाते हैं हार्मोन
वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. संजया शर्मा ने बताया कि पीसीओडी बीमारी में हार्मोन गड़बड़ा जाते हैं। प्रोलेक्टिन हार्मोन बहुत अधिक बढ़ जाने की वजह से डेढ़ साल या इससे अधिक समय तक भी महिला को पीरियड नहीं होते हैं। इलाज कराने पर ही बीमारी ठीक होती है।
200 से 300 व्यक्तियों में से एक को हो सकती बीमारी
मनोचिकित्सक डॉ. अमन किशोर ने बताया कि 200 से 300 व्यक्तियों में से किसी एक व्यक्ति को परसिस्टेंट डिल्यूशनल डिसऑर्डर की बीमारी हो सकती है। वहीं, जब कोई व्यक्ति इस बीमारी का शिकार होता है और वो अपनी बातों से परिजनों में भ्रम पैदा कर देता है तो इसे शेयर डिल्यूजन कहते हैं। कानपुर में जो मामला सामने आया है, उसमें शेयर डिल्यूजन भी हो सकता है।
ये हैं लक्षण
- भ्रम को सच मानने लगना
- नींद न आने की समस्या होना
- चिड़चिड़ापन शुरू हो जाना
- व्यवहार में उग्रता होना
- बेवजह गालीगलौज, मारपीट करना
ये हैं मामले
केस-1
शादी के 30 साल बाद महिला बोली-ये मेरा पति नहीं है
परसिस्टेंट डिल्यूशनल डिसऑर्डर का शिकार 55 वर्षीय महिला ने शादी के 30 साल बाद अपने पति को बाहरी व्यक्ति कहना शुरू कर दिया। वो परिजनों से बोलने लगी कि ये मेरे पति नहीं हैं। महिला के दो बेटे हैं और दोनों की शादी हो चुकी है। पति और छोटा बेटा इलाज कराने के लिए महिला को मनोचिकित्सक के पास लेकर आया। पति ने डॉक्टर को बताया कि एक साल से महिला ने उससे दूरी बनानी शुरू कर दी थी और वह अलग कमरे में रहने लगी थी। तीन-चार महीनों से बातचीत ही बंद कर दी।
केस-2
25 साल के युवक ने काट लिया था खुद का प्राइवेट पार्ट
झांसी के रहने वाले 25 वर्षीय युवक ने करीब एक साल पहले खुद का प्राइवेट पार्ट काट लिया था। बाद में किसी दूसरे शहर में उसकी सर्जरी कराई गई। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद परिजन उसे मनोचिकित्सक के पास लेकर आए। डॉक्टर ने बताया कि वो 10 साल से परसिस्टेंट डिल्यूशनल डिसऑर्डर का शिकार था। पूछताछ के दौरान डॉक्टर को युवक ने बताया कि उसे लगता है कि प्राइवेट पार्ट उसके विनाश का कारण है।