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Jhansi News: तपाक से गले मिले तो किसी की आंखें हुईं नम
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में शनिवार को रोमांचित करने वाले नजारे दिखे। 50 वर्ष बाद दोस्त आमने-सामने हुए तो तपाक से गले लगाया। कुछ ही देर में दुनिया छोड़ चुके साथियों की याद में आंखें नम हो गईं। यही नहीं, कोई शरारतें याद कर ठहाके लगाने लगा तो कोई शिक्षकों की सीख से बड़ा सबक मिलने की बात करने लगा।
यह मौका था मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में एमएलबीयन्स-75 के आयोजन का। वर्ष 1975 में एमबीबीएस, एमएस व एमडी करने वाले पुरातन मेडिकल विद्यार्थियों ने गोल्डन जुबली मनाया। सबसे पहले पुरातन मेडिकल विद्यार्थी अपने विभागों में गए और कक्षाओं को देख पुरानी यादें ताजा कीं। इसके बाद हॉस्टल के कमरों में पहुंचे और फिर अपनी यादों और शरारतों को याद कर खूब ठहाके लगाए। इसके बाद सभी ऑडिटोरियम में पहुंचे तो 50 साल पहले दूर हुए साथियों को देख चेहरे पर मुस्कुराहट लौटी और गले मिले। कुछ पुरातन मेडिकल छात्रों की आंखें दुनिया छोड़ चुके साथियों की याद में नम हो गईं। प्रधानाचार्य प्रो. शिव कुमार ने सभी पुरातन छात्रों को शॉल ओढ़ाकर उनका सम्मान किया।
- ये बोले पुरातन छात्र
आज का दिन मेरे जीवन का सबसे ज्यादा भावुक करने वाला है। मुझे बेहद खुशी है कि 50 वर्ष बाद फिर अपने कॉलेज की जमीन पर खड़ी हूं। जो लोग दिख नहीं रहे हैं, उनको लेकर एक अकुलाहट है।
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डॉ. इंदु कुमार, स्त्री रोग विशेषज्ञ, मेरठ
जब मैं अपनी क्लास देखने गई तो बैठने की जगह देख उत्साहित करने वाले विचार दिमाग पर छा गए। एक पल को तो यह भूल गई कि मैं 50 साल पहले छात्रा थी, इसलिए उसी जगह पर बैठ गई।
डॉ. अमिता गुप्ता, स्त्री रोग विशेषज्ञ, पलवल
अपने साथियों को स्वस्थ देखकर बेहद खुशी हो रही हूं। जो साथी दिख नहीं रहे हैं, उनको लेकर मन में व्याकुलता है। 50 साल बाद यह दिन देखने को मिला है, इसलिए सदैव दिमाग पर छाया रहेगा।
डॉ. शमिता, कोलंबिया, यूएसए
50 साल बाद बहुत उत्साहित होकर कॉलेज आया हूं। विकास होने की वजह से कॉलेज का नजारा बदल गया है। दोस्तों से मिलने से पुरानी यादें ताजा हो गईं। कुछ जिगरी दोस्त नहीं दिखे, जिनकी याद आ रही है।
डॉ. एचएस भसीन, सर्जन, जयपुर
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झांसी। मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में शनिवार को रोमांचित करने वाले नजारे दिखे। 50 वर्ष बाद दोस्त आमने-सामने हुए तो तपाक से गले लगाया। कुछ ही देर में दुनिया छोड़ चुके साथियों की याद में आंखें नम हो गईं। यही नहीं, कोई शरारतें याद कर ठहाके लगाने लगा तो कोई शिक्षकों की सीख से बड़ा सबक मिलने की बात करने लगा।
यह मौका था मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में एमएलबीयन्स-75 के आयोजन का। वर्ष 1975 में एमबीबीएस, एमएस व एमडी करने वाले पुरातन मेडिकल विद्यार्थियों ने गोल्डन जुबली मनाया। सबसे पहले पुरातन मेडिकल विद्यार्थी अपने विभागों में गए और कक्षाओं को देख पुरानी यादें ताजा कीं। इसके बाद हॉस्टल के कमरों में पहुंचे और फिर अपनी यादों और शरारतों को याद कर खूब ठहाके लगाए। इसके बाद सभी ऑडिटोरियम में पहुंचे तो 50 साल पहले दूर हुए साथियों को देख चेहरे पर मुस्कुराहट लौटी और गले मिले। कुछ पुरातन मेडिकल छात्रों की आंखें दुनिया छोड़ चुके साथियों की याद में नम हो गईं। प्रधानाचार्य प्रो. शिव कुमार ने सभी पुरातन छात्रों को शॉल ओढ़ाकर उनका सम्मान किया।
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- ये बोले पुरातन छात्र
आज का दिन मेरे जीवन का सबसे ज्यादा भावुक करने वाला है। मुझे बेहद खुशी है कि 50 वर्ष बाद फिर अपने कॉलेज की जमीन पर खड़ी हूं। जो लोग दिख नहीं रहे हैं, उनको लेकर एक अकुलाहट है।
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डॉ. इंदु कुमार, स्त्री रोग विशेषज्ञ, मेरठ
जब मैं अपनी क्लास देखने गई तो बैठने की जगह देख उत्साहित करने वाले विचार दिमाग पर छा गए। एक पल को तो यह भूल गई कि मैं 50 साल पहले छात्रा थी, इसलिए उसी जगह पर बैठ गई।
डॉ. अमिता गुप्ता, स्त्री रोग विशेषज्ञ, पलवल
अपने साथियों को स्वस्थ देखकर बेहद खुशी हो रही हूं। जो साथी दिख नहीं रहे हैं, उनको लेकर मन में व्याकुलता है। 50 साल बाद यह दिन देखने को मिला है, इसलिए सदैव दिमाग पर छाया रहेगा।
डॉ. शमिता, कोलंबिया, यूएसए
50 साल बाद बहुत उत्साहित होकर कॉलेज आया हूं। विकास होने की वजह से कॉलेज का नजारा बदल गया है। दोस्तों से मिलने से पुरानी यादें ताजा हो गईं। कुछ जिगरी दोस्त नहीं दिखे, जिनकी याद आ रही है।
डॉ. एचएस भसीन, सर्जन, जयपुर