{"_id":"6a8b5fd507fdd29d72049653","slug":"when-companies-backed-out-e-jagriti-secured-the-insurance-claim-jhansi-news-c-11-jhs1019-861039-2026-08-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhansi News: -कंपनियां मुकरीं, तो ई-जागृति ने दिलाया बीमा क्लेम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhansi News: -कंपनियां मुकरीं, तो ई-जागृति ने दिलाया बीमा क्लेम
Mon, 24 Aug 2026 02:32 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Mon, 24 Aug 2026 02:32 AM IST
विज्ञापन
झांसी। तमाम बीमा कंपनियां पहले तो उपभोक्ताओं को लुभावनी योजनाएं बताकर बीमा करती हैं। क्षतिपूर्ति राशि देने का वक्त आता है, तो मुकर जाती हैं। ऐसे में ई-जागृति, उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का रास्ता दिखाता है। हादसे के बाद बीमा नहीं मिलने पर पिछले तीन साल में ढाई सौ से ज्यादा पीड़ितों ने ई-जागृति पोर्टल के जरिये पंजीयन कराया। वहीं, सौ से ज्यादा मामलों का निराकरण भी हुआ है।
बीमा कंपनी की जिम्मेदारी होती है कि अगर बीमित वाहन या प्रतिष्ठान के साथ कोई हादसा होता है, तो क्लेम की राशि मांगे जाने पर तत्काल दे, लेकिन ज्यादातर मामलों में कंपनियां क्लेम देने से मुकर जाती हैं। इसके बाद उपभोक्ताओं को न्यायालय या जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण लेनी पड़ती है। पिछले तीन साल की बात करें तो एक सैकड़ा से ज्यादा ऐसे मामले आए, जिनमें आयोग ने क्षतिपूर्ति राशि दिलाकर उपभोक्ताओं को राहत दी।
गलत तरीके निकालती हैं कंपनियां
जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष अमरपाल सिंह के मुताबिक, बीमा कंपनियां पीड़ित उपभोक्ताओं के क्लेम न देने के लिए तमाम तरह के गलत तरीके निकालती हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिलती। आयोग उनसे क्षतिपूर्ति राशि दिलाता है। पिछले 3 साल में जो मामले आए, उनमें से 100 से ज्यादा मामलों में पीड़ित उपभोक्ताओं को राहत दिलाते हुए करोड़ों रुपये की क्षतिपूर्ति राशि दिलाई।
विज्ञापन
केस 1
आरएस जानकी प्रसाद एंड संस के प्रोपराइटर जलज कुमार का ट्रक 2023 में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उपभोक्ता ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी में बीमा कर रखा था। बावजूद इसके जब ट्रक की मरम्मत की राशि मांगी गई, तो देने से इनकार कर दिया था। ई-जागृति पोर्टल के माध्यम से आयोग शिकायत की गई। आयोग ने बीमा कंपनी को 12.50 लाख मय ब्याज के देने का आदेश दिया था।
केस 2
ललितपुर जिला निवासी दयाराम की कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। कार का बीमा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा किया गया था। जब क्लेम की राशि मांगी गई तो कंपनी ने इन्कार कर दिया था। पीड़ित उपभोक्ता ने ई जागृति के माध्यम से पंजीकरण कराया था। आयोग ने सुनवाई करते हुए 96 हजार रुपये क्लेम देने का आदेश दिया था।
विज्ञापन
बीमा कंपनी की जिम्मेदारी होती है कि अगर बीमित वाहन या प्रतिष्ठान के साथ कोई हादसा होता है, तो क्लेम की राशि मांगे जाने पर तत्काल दे, लेकिन ज्यादातर मामलों में कंपनियां क्लेम देने से मुकर जाती हैं। इसके बाद उपभोक्ताओं को न्यायालय या जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण लेनी पड़ती है। पिछले तीन साल की बात करें तो एक सैकड़ा से ज्यादा ऐसे मामले आए, जिनमें आयोग ने क्षतिपूर्ति राशि दिलाकर उपभोक्ताओं को राहत दी।
विज्ञापन
गलत तरीके निकालती हैं कंपनियां
जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष अमरपाल सिंह के मुताबिक, बीमा कंपनियां पीड़ित उपभोक्ताओं के क्लेम न देने के लिए तमाम तरह के गलत तरीके निकालती हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिलती। आयोग उनसे क्षतिपूर्ति राशि दिलाता है। पिछले 3 साल में जो मामले आए, उनमें से 100 से ज्यादा मामलों में पीड़ित उपभोक्ताओं को राहत दिलाते हुए करोड़ों रुपये की क्षतिपूर्ति राशि दिलाई।
विज्ञापन
केस 1
आरएस जानकी प्रसाद एंड संस के प्रोपराइटर जलज कुमार का ट्रक 2023 में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उपभोक्ता ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी में बीमा कर रखा था। बावजूद इसके जब ट्रक की मरम्मत की राशि मांगी गई, तो देने से इनकार कर दिया था। ई-जागृति पोर्टल के माध्यम से आयोग शिकायत की गई। आयोग ने बीमा कंपनी को 12.50 लाख मय ब्याज के देने का आदेश दिया था।
केस 2
ललितपुर जिला निवासी दयाराम की कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। कार का बीमा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा किया गया था। जब क्लेम की राशि मांगी गई तो कंपनी ने इन्कार कर दिया था। पीड़ित उपभोक्ता ने ई जागृति के माध्यम से पंजीकरण कराया था। आयोग ने सुनवाई करते हुए 96 हजार रुपये क्लेम देने का आदेश दिया था।