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‘बेटा क्या दिक्कत थी, एक बार बता तो देता’
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झांसी। विकास के आत्महत्या करने के बाद पूरा परिवार सदमे में हैं। दिन में कई दफा मां व बहनें अमित को याद कर बेसुध हो गईं। मां बार-बार यही कहती रही कि बेटा तुझे दूल्हा बनते देखने का ख्याब मेरा अधूरा रह गया। तुझे क्या दिक्कत थी, एक बार बता तो देता। आखिर तूने इतना बड़ा कदम क्यों उठा लिया? मां की दर्द भरी आवाज सुनकर परिवार के साथ मेहमान व पड़ोसियों की आंखें भी नम हो जातीं। रिश्तेदार व पड़ोसी दिनभर मां को समझाने में लगे।
शनिवार को घटना से पहले शुक्रवार की देर रात तक घर में नाच-गाना चला। मेहमान भी शुक्रवार को घर पहुंच गए थे। विकास ने घर पहुंचने वाले सभी मेहमानों की खुद अगवानी की। मेहंदी से लेकर हल्दी का कार्यक्रम देर रात तक चला। विकास ने भी खूब आनंद किया। कार्यक्रम के बाद रात में सभी लोग कमरों में जाकर सो गए थे। लेकिन, शनिवार की सुबह विकास के आत्महत्या करने के बाद घर में मातम फैल गया। घर से लेकर मोहल्ले में सन्नाटा छा गया। जहां शुक्रवार रात नाच गाने की आवाजें सुनाईं दे रही थी, वहां शनिवार सुबह से पूरे घर से रोने की आवाजें आती रहीं। मां दिन में कई दफा विकास को याद करते-करते बेसुध हो गई। रोते-रोते वह बेटे को दूल्हा बनने की बात करती रहीं।
रिश्तेदारों ने बताया कि शादी को लेकर विकास काफी खुश था। शादी को लेकर उसने खुद तैयारियां की थीं। अपनी होने वाली पत्नी के लिए भी खुद शॉपिंग की थी। लेकिन, शादी से पहले शनिवार की सुबह हुई घटना ने खुशियों को मातम में बदल दिया। शाम को पोस्टमार्टम होने के बाद पुलिस ने शव को परिजनों के सुपुर्द किया। शव घर पहुंचते ही फिर से परिजन बेसुध हो गए।
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इकलौता पुत्र था विकास
विकास के पिता रमेश चंद्र लिखधारी विपिन बिहारी इंटर कॉलेज में टीचर थे। इसी साल मार्च में वह रिटायर्ड हुए हैं। दो बहनों में विकास इकलौता भाई था। बड़ी बहन पारूल की शादी हो चुकी है, जबकि छोटी बहन अविवाहित है। कुछ समय पहले ही विकास की शादी महोबा में तय हुई थी। अब अचानक हुई घटना के बाद दोनों परिवार बिखर गए हैं।
घर की जगह पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे रिश्तेदार
घटना के बाद झांसी पहुंचने से पहले मेहमानों को हादसे की खबर मिल चुकी थी। ऐसे में कुछ मेहमान घर न पहुंचने के बजाय सीधे पोस्टमार्टम पहुंच गए थे।
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शनिवार को घटना से पहले शुक्रवार की देर रात तक घर में नाच-गाना चला। मेहमान भी शुक्रवार को घर पहुंच गए थे। विकास ने घर पहुंचने वाले सभी मेहमानों की खुद अगवानी की। मेहंदी से लेकर हल्दी का कार्यक्रम देर रात तक चला। विकास ने भी खूब आनंद किया। कार्यक्रम के बाद रात में सभी लोग कमरों में जाकर सो गए थे। लेकिन, शनिवार की सुबह विकास के आत्महत्या करने के बाद घर में मातम फैल गया। घर से लेकर मोहल्ले में सन्नाटा छा गया। जहां शुक्रवार रात नाच गाने की आवाजें सुनाईं दे रही थी, वहां शनिवार सुबह से पूरे घर से रोने की आवाजें आती रहीं। मां दिन में कई दफा विकास को याद करते-करते बेसुध हो गई। रोते-रोते वह बेटे को दूल्हा बनने की बात करती रहीं।
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रिश्तेदारों ने बताया कि शादी को लेकर विकास काफी खुश था। शादी को लेकर उसने खुद तैयारियां की थीं। अपनी होने वाली पत्नी के लिए भी खुद शॉपिंग की थी। लेकिन, शादी से पहले शनिवार की सुबह हुई घटना ने खुशियों को मातम में बदल दिया। शाम को पोस्टमार्टम होने के बाद पुलिस ने शव को परिजनों के सुपुर्द किया। शव घर पहुंचते ही फिर से परिजन बेसुध हो गए।
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इकलौता पुत्र था विकास
विकास के पिता रमेश चंद्र लिखधारी विपिन बिहारी इंटर कॉलेज में टीचर थे। इसी साल मार्च में वह रिटायर्ड हुए हैं। दो बहनों में विकास इकलौता भाई था। बड़ी बहन पारूल की शादी हो चुकी है, जबकि छोटी बहन अविवाहित है। कुछ समय पहले ही विकास की शादी महोबा में तय हुई थी। अब अचानक हुई घटना के बाद दोनों परिवार बिखर गए हैं।
घर की जगह पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे रिश्तेदार
घटना के बाद झांसी पहुंचने से पहले मेहमानों को हादसे की खबर मिल चुकी थी। ऐसे में कुछ मेहमान घर न पहुंचने के बजाय सीधे पोस्टमार्टम पहुंच गए थे।