फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   What happened if there is no land under the feet... We have won our share of the sky...

Jhansi News: पैरों तले जमीन नहीं तो क्या हुआ...अपने हिस्से का आसमां जीता है हमने...

Fri, 02 Dec 2022 09:51 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 02 Dec 2022 09:51 PM IST
विज्ञापन
What happened if there is no land under the feet... We have won our share of the sky...
झांसी। खुशनुमा सपनों से भरी जिंदगी में एक दिन अचानक कोई ऐसा हादसा हो जाए कि आंख खुले तब पैरों तले जमीन ही न हो...तो कोई भी जिंदगी की जंग हार बैठेगा। लेकिन रानी लक्ष्मीबाई की नगरी में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जिनकी आंखें खुली रहीं और उन्होंने अपने पैर गंवा दिए। उनकी आंखों से आंसू बहते रहे, उम्र के कई साल उन्होंने जमीन पर घिसट-घिसटकर गुजारे, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। इनके मन में एक ही जज्बा था कि पैरों के नीचे जमीन नहीं है तो क्या हुआ, अपने हिस्से का आसमां एक दिन जरूर हासिल करेंगे...।
विज्ञापन

घिसट-घिसटकर चलता था, हौसले ने खड़ा किया
झांसी। सीपी मिशन में रहने वाले मो. उमर को एक साल की उम्र में पोलियो हो गया था। वह 8-10 साल की उम्र तक जमीन पर घिसटकर चलते रहे। लेकिन मन में हौसला था कि अपने पैरों पर चल कर दिखाएंगे। 1989 में इलाहाबाद में एक कैंप में डॉक्टरों ने दोनों पैरों में कैलीपर्स लगा दिए। वह बैसाखी के सहारे चलने लगे। इसके बाद बॉडी बिल्डिंग क्षेत्र में अपनी किस्मत अजमाई। रेलवे इंस्टीट्यूट की तरफ से कई गेम्स खेले और पुरस्कार जीते। पुराने टायरों का बिजनेस शुरू किया। लेकिन 2001 में एक एक्सीडेंट में एक पैर फिर से टूट गया। ठीक हुए तो बुंदेलखंड विकलांग विकास समिति बनाई और विकलांगों को इससे जोड़कर उन्हें सरकारी सुविधाएं व पेंशन दिलाने की तरफ कदम बढ़ाए। मो. उमर को मुंबई में सुपर आइडियल अवॉर्ड के अलावा शहर में कई पुरस्कार मिल चुके हैं। प्रॉपर्टी के बिजनेस के जरिए वह कई लोगों को रोजगार दे रहे हैं। परिवार में, पत्नी व तीन बेटियां और एक बेटा है। वह हर साल व्हीलचेयर क्रिकेट प्रतियोगिता कराते हैं।
विज्ञापन

लोगों की बातें डॉक्टर बनने की हिम्मत देती थीं
झांसी। अयोध्यापुरी में रहने वाले डॉ. विजय कुमार मिश्रा दूसरों के लिए बड़ी प्रेरणा हैं। डॉ. विजय बताते हैं कि दो-ढाई साल की उम्र में उन्हें पोलियो हो गया था। घुटनों और हाथों की मदद से किसी तरह चलकर स्कूल जाने लगे। प्रारंभिक शिक्षा जिला मऊ में हुई थी। शुरू से ही वह डॉक्टर बनना चाहते थे। उन्हें देखकर लोग तरस खाते थे। लेकिन ये बातें उन्हें हौसला देती थीं। पढ़ाई करते-करते परिवार के साथ झांसी में रहने लगे। उन्होंने झांसी आयुर्वेद कॉलेज से बीएमएस की पढ़ाई की। डॉ. विजय अपनी क्लीनिक में आने वाले वृद्धों, असहायों दिव्यांग-विकलांग या अन्य किसी भी जरूरतमंद से फीस नहीं लेते हैं, उसे दवाइयां भी फ्री देते हैं। इनके परिवार में पत्नी और एक आठ साल का बेटा है। वह बताते हैं कि वर्ष 2001 में विशाखापट्टनम में ऑपरेशन के बाद वह कैलीपर्स व बैसाखी के बिना धीरे-धीरे चलने लगे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

हादसे में गंवा दिए दोनों पैर, सेवा भाव नहीं भूले
झांसी। सराय के रहने वाले 33 साल के पवन कुमार खटीक मोहल्ले में लोगों की सेवा करने के लिए जाने जाते हैं। किसी को ब्लड देना हो या किसी असहाय की मदद करनी हो। किसी की बेटी की शादी हो या माता का जगराता...। आठ फरवरी 2022 में इनकी किस्मत इनसे खेल गई। ड्राइवरी का काम करने वाले पवन अपने छोटे भाई की शादी के कार्ड बांटने ट्रेन से बाहर जा रहे थे। उसी ट्रेन से हुए हादसे में अपने दोनों पैर गंवा बैठे। लेकिन तीन बच्चों और पत्नी के साथ रह रहे पवन ने हिम्मत नहीं हारी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बाद भी ये असहायों की सेवा करने नहीं भूलते। तीन-चार बार ब्लड भी डोनेट कर चुके हैं। पवन ने हाल ही में कृत्रिम पैर लगवाए हैं, वह हर रोज चलने की प्रैक्टिस कर रहे हैं।

व्हीलचेयर पर चलती हैं, संवारती हैं दूसरों की राह
झांसी। जीवन में बड़े संकट से जूझकर आगे कैसे बढ़ते हैं, ये कोई शहर के खातीबाबा क्षेत्र में रहने वाली सीमा तिवारी से सीखे। सीमा बताती हैं कि 30 मई 1996 को उनकी शादी होनी थी। लेकिन इससे पहले 18 फरवरी को घर में डकैती पड़ गई। सीमा डकैतों से भिड़ गईं। पुलिस को बुलाने के लिए उन्होंने छत से नीचे छलांग लगा दी। घिसटती हुई पुलिस के पास पहुंचीं, पुलिस ने सात डकैतों को पकड़ा। लेकिन इस हादसे में रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आने से सीमा चलने-फिरने में लाचार हो गईं। बाद में संविदा पर पढ़ाना भी शुरू किया लेकिन छोड़ दिया। इसके बाद ‘उड़ान’ संस्था खोली और महिलाओं को सॉफ्ट ट्वायज आदि का प्रशिक्षण देने लगीं। इनकी सिखाई कई महिलाएं अपना रोजगार कर रही हैं। इन्हें मुख्यमंत्री के अलावा स्थानीय स्तर पर भी दर्जनों पुरस्कार मिल चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed