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सलामत रहे दोस्ताना हमारा

Fri, 08 Jul 2016 01:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 08 Jul 2016 01:03 AM IST
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We survived Friendly
id fasitebil, jhansi news - फोटो : amar ujala, jhansi news
झांसी। छनियापुरा के चचा इब्राहीम ने पीयूष को सेंवई खिलाई और इसके बाद ही उन्होंने अपने मुंह में निवाला डाला। दोनों गले मिले, ईद की बधाई दी और फिर जश्न शुरू हो गया। ईद पर ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। इन दोनों के परिवारों के बीच यह परंपरा पिछले 50 साल से कायम है। इस नफरत के दौर में इब्राहीम और पीयूष एकता की अद्भुत मिसाल हैं। एक दूसरे से दोनों की पहचान है।
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सराफा बाजार निवासी पीयूष ने भी कल ईद की तैयारी बिल्कुल चचा इब्राहीम की तरह की थी। वह बाजार गए, अपने और अपने दोनों बेटों के लिए नए कपड़े (चूड़ीदार पायजामा, शेरवानी और टोपी) खरीदे। पकवान खरीदे। ईद के चांद की तस्दीक होते ही चचा इब्राहीम को मुबारकबाद दी। वृहस्पतिवार को सुबह जल्दी उठे, तैयार हुए और ईद की नमाज के बाद अपने दोनों बेटों सहित इब्राहीम के घर पहुंच गए।
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चचा और उनका परिवार तो उनके इंतजार में ही था। गले मिले, बधाई और अपने हाथ से पीयूष को सेंवई खिलाई। इसके बाद खुद खाई और फिर उनके परिवार ने स्वाद लिया। इन्हें देख कोई यह नहीं कह सकता था कि ये दोनों एक ही परिवार के नहीं हैं। 
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साठ वर्षीय इब्राहीम किसी जमाने में पीयूष (35 वर्ष) के बाबा रामदास रावत के पत्थर टाल पर काम करते थे। तब से दोनों परिवारों के बीच दोस्ताना रिश्ता कायम है। पीयूष की अब मोटर साइकिल की एजेंसी है और इब्राहीम अभी भी उनके साथ हैं। दोनों परिवार एक साथ त्यौहार मनाते हैं। इब्राहीम और उनका परिवार ईद पर तब तक कुछ नहीं खाता, जब तक पीयूष को नहीं खिला लेते। पीयूष जहां कहीं हों, ईद का दिन चचा इब्राहीम के साथ ही बिताते हैं।


पीयूष कहते हैं कि मुझे तो चचा हमेशा बच्चे की तरह प्यार दिया और सच्चाई पर चलने की राह दिखाई। हर धर्म भाईचारा और सच्चाई के रास्ते पर चलने की शिक्षा देता है लेकिन यह इंसान ही है जो उसे अपनी तरह इस्तेमाल करने की कोशिश करता है। पीयूष कहते हैं कि उनके लिए ईद, होली और दीवाली जैसा ही महत्व रखती है। दिलों की दूरियां मिटाते हैं ये त्यौहार। इब्राहीम ने कहा पीयूष और उनका परिवार ईद की खुशी में चार चांद लगा देता है।

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