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पुस्तकों से प्रेम करना भूल गए हम

Sat, 23 Apr 2016 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 23 Apr 2016 01:16 AM IST
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We have forgotten to love books
pustkaly, jhansi news - फोटो : amar ujala
झांसी। नगर में 17वीं एवं 18वीं सदी के दौर में मराठा शासन में पुस्तकालय संस्कृति को खूब प्रोत्साहन दिया गया। कहते हैं कि रानी महल में पुस्तकों का इतना संग्रह हो गया कि इन्हें रखवाने के लिए मराठा शासन को रानी महल में नई मंजिल बनवानी पड़ गई थी। लेकिन वर्तमान में इंटरनेट एवं नई-नई टेक्नोलॉजी के दौर में यह पुस्तकें  एवं उनसे प्रेम करना जैसे अब लोग भूल रहे हैं। वर्तमान में हालात यह हैं कि सरकारी संरक्षण में होने के बाद भी कई अमूल्य पुस्तकें नष्ट होने की कगार पर हैं। जिनको सहेजना अति आवश्यक है।   
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दीमक की गिरफ्त में हैं कीमती पुस्तकें
पुस्तकों की हालत से रूबरू होना है, तो आइए गांधी भवन स्थित नगर निगम के वाचनालय में। जिसमें अंग्रेजी शासन काल की लगभग 20 हजार पुरानी अमूल्य पुस्तकों एवं पांडुलिपियों का संग्रह मात्र दो सीमित कमरों में संग्रहित है। जो संरक्षण के अभाव में दीमक की चपेट में है।
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वाचनालय की पुस्तकों एवं अन्य सामग्रियों की हालत देख प्रतीत होता है कि जैसे इनके संरक्षण एवं रखरखाव के लिए कभी कोई कदम नहीं उठाया गया हो। वर्तमान में यहां आने वाले पाठकों की गिनती नाम मात्र है। जो आते भी हैं वह गांधी भवन के मुख्य हाल में अखबार एवं मासिक तथा पाक्षिक पुस्तकें पढ़कर चले जाते हैं। कभी-कभी राजनीतिक दलों की बैठक ों एवं सरकारी कार्यक्रमों के चलते यह भी बाधित हो जाता है।   
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उक्त वाचनालय के इतिहास पर नजर डाले तो 1858 की क्रांति में मराठा शासन द्वारा संरक्षित रानी महल के पुस्तकालय को अंग्रेजों ने नष्ट कर दिया था। तत्पश्चात अंग्रेजों ने मुहल्ला टकसाल में अपना पुस्तकालय स्थापित किया, जो वर्ष 1913 में नगर पालिका के गठन के पश्चात कोतवाली के समीप (वर्तमान के पत्रकार भवन परिसर में) एक नवीन भवन में स्थानांतरित कर दिया गया, जिसे आजादी के बाद मोती लाल नेहरू पुस्तकालय नाम दिया गया। समाज सेवी मुकुंद महरौत्रा के मुताबिक यह पुस्तकालय 1970 में वर्तमान गांधी भवन में स्थानांतरित कर दिया गया।

पुस्तकों से जोड़ने की योजना को लगा बट्टा
 ग्रामीणों एवं विद्यार्थियों को पुस्तकों एवं साहित्य से जोड़ने क ी योजना को बट्टा लग रहा है। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों के लगभग डेढ़ दर्जन राजकीय इंटर कॉलेजों में बनी लाइब्रेरियों की प्रगति, सदस्यों की संख्या आदि बिंदुओं पर मांगी गई रिपोर्ट माध्यमिक शिक्षा विभाग एवं विशेष कार्याधिकारी पुस्तकालय को अभी तक प्राप्त नहीं हो पाई है।

गौरतलब हो कि बीते दो वर्ष पूर्व ग्रामीण क्षेत्रों में आम नागरिक एवं विद्यार्थियों को साहित्य, पुस्तक ों एवं देश दुनिया की खबरों से जोड़ने के लिए जनपद के आठ ब्लॉकों में मौजूूद लगभग 18 राजकीय इंटर कॉलेज एवं राजकीय बालिका इंटर कॉलेजों में पुस्तकालय बनाए गए थे। जिन्हें शासन द्वारा पुस्तकें खरीद कर दी गई थी। इस वर्ष भी हाल ही में इन पुस्तकालयों को लगभग 450-450 पुस्तकें  भेजी गई थीं। सूत्रों के मुताबिक वर्तमान में इन पुस्तकालयों के स्थिति क्या है।


यह खुलते हैं कि  नहीं, पुस्तकालय में पाठकों की संख्या कितनी है आदि संबंधी जानकारियां किसी को पता नहीं है। क्योंकि विशेष कार्याधिकारी पुस्तकालय द्वारा मांगी गई इन पुस्तकालयों की प्रगति एवं स्थिति की रिपोर्ट अभी तक इन विद्यालयों की ओर से नहीं दी जा सकी है। यह बात शिक्षा विभाग भी स्वीकारता है।
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