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Jhansi News: हम किसी से नहीं कम, जीतकर ही लेंगे दम
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झांसी। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की कर्मभूमि झांसी में नौ दिसंबर से होने वाली राज्य स्तरीय महिला हॉकी प्रतियोगिता के लिए खिलाड़ी तैयार हो चुकी हैं। राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में खेल चुकीं ये महिला खिलाड़ी फिर से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने और छोटे-छोटे सपनों को पूरा करने के लिए पूरी मेहनत से जुटी हैं। कोई परिवार की तंगहाली दूर करना चाहती है, तो कोई अपने परिवार और झांसी का नाम रोशन करना चाहती है। इन दिनों ये खिलाड़ी एलवीएम क्रिकेट ग्राउंड पर पूरे दिन अभ्यास कर रही हैं।
गोल को रोकने में माहिर हैं जोया
झांसी। महानगर के अलीगोल निवासी जोया खान पांच साल से हॉकी खेल रही हैं। अब तक वे वाराणसी, गोरखपुर में हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं। मैदान पर उनकी प्लेस गोल पोस्ट से पहले होती है। वे गोलकीपर के पास गेंद पहुंचने ही नहीं देती हैं, उससे पहले ही गेंद छीनकर प्रतिद्वंदी को अचंभे में डाल देती हैं। जोया के पिता इदरीश खान ऑटो चलाते हैं। जोया बताती हैं कि उनकी बहन हिना खान भी हॉकी खेलती हैं। जोया राज्य स्तरीय प्रतियोगिता जीतकर भारतीय महिला हॉकी टीम में शामिल होना चाहती हैं।
मनीषा को गोल करने में है महारथ
झांसी। घासमंडी निवासी मनीषा कुशवाहा को गोल करने में महारथ हासिल है। वे लेफ्ट हाफ में खेलती हैं। एक बार उनकी स्टिक में गेंद आ जाए तो वह गोल पोस्ट में जाकर ही छूटती है। मनीषा के पिता राजकुमार कुशवाहा कैटरिंग का काम करते हैं। मनीषा तीन बार राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में भाग ले चुकी हैं। झांसी में हुई प्रतियोगिता में उनको वूमेन ऑफ द मैच का खिताब मिल चुका है। वे रोज पांच घंटे अभ्यास कर प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा दिखाने की तैयारी कर रही हैं।
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छह बार प्रदेश स्तर पर दिखा चुकीं प्रतिभा
झांसी। नई बस्ती की रहने वाली वैष्णवी शर्मा छह बार प्रदेश स्तर पर खेलकर अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं। पांच साल पहले वह हॉकी खेलने के लिए मैदान में उतरी थीं। एलवीएम में अन्य खिलाड़ियों को खेलता देख उन्होंने भी हॉकी खेलने की ठानी। वैष्णवी मैच के दौरान राइट हाफ प्लेस पर खेलती हैं। वैष्णवी के पापा पंकज शर्मा इलेक्ट्रिीशियन हैं। वैष्णवी के छोटे भाई यश सैफई स्पोर्ट्स कॉलेज में प्रशिक्षण ले रहे हैं। वे नेशनल भी खेल चुके हैं। जबकि एक और छोटा भाई आयुष भी हॉकी का प्रशिक्षण ले रहा है। वे रोज छह घंटे अभ्यास कर खुद को प्रतियोगिता के लिए तैयार कर रही हैं।
घर की तंगी दूर करना चाहती हैं मोहिनी
झांसी। नई बस्ती निवासी मोहिनी कुशवाहा ने चार साल पहले हॉकी मैदान में कदम रखा है। परिवार ने उनके खेलने को लेकर पहले थोड़ा आपत्ति जताई, लेकिन बिटिया की मेहनत और सफलता देख अब परिवार उनके साथ खड़ा रहता है। मोहिनी के पिता मनोज मजदूरी करते हैं और मां उमा घरों में काम करती हैं। मोहिनी बताती हैं कि हॉकी खेलने की प्रेरणा स्कूल से मिली। परिवार से कहा तो थोड़ा विरोध किया, लेकिन उन्होंने फिर भी खेलना नहीं छोड़ा। वे तीन बार स्टेट प्रतियोगिता में जा चुकी हैं। उनका सपना भारतीय महिला टीम में शामिल होकर अच्छा खेलना और जीतकर घर की तंगी दूर करना है।
रागिनी बनना चाहती हैं बेस्ट प्लेयर
झांसी। चांद दरवाजा के पास रहने वाली रागिनी तीन साल से हॉकी खेल रही हैं। वे बेस्ट प्लेयर बनकर देश और झांसी का नाम रोशन करना चाहती हैं। रागिनी के पिता रामकिशन नल सुधारने का काम करते हैं। घर में सबसे छोटी रागिनी प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए मैदान पर पांच घंटे अभ्यास कर रही हैं। उनका सपना भी भारतीय महिला हॉकी टीम में शामिल होना है।
नेशनल खेल चुकी हैं पूूनम
झांसी। चांद दरवाजा निवासी पूनम परिहार राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी हैं। वे तीन साल से हॉकी खेल रही हैं। पूनम बताती हैं कि उनके भाई गौरव परिहार नेशनल प्लेयर रहे हैं। भाई ने बाद में खेलना छोड़ दिया तो वे मैदान में खेलने उतरीं। परिवार ने खूब सहयोग किया। पूनम के पिता कैटरिंग का काम करते हैं। जबकि मां आशा परिहार घरों में काम करती हैं। पूनम बताती हैं कि जब वे नेशनल खेलने के लिए गोरखपुर गईं थीं तो उनके फाइनल मैच में उनके सिर में गेंद लग गई थी। सिर फटने से उन्हें बीच में मैच छोड़ना पड़ा। अब पूनम छह घंटे मेहनत करती हैं।
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गोल को रोकने में माहिर हैं जोया
झांसी। महानगर के अलीगोल निवासी जोया खान पांच साल से हॉकी खेल रही हैं। अब तक वे वाराणसी, गोरखपुर में हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं। मैदान पर उनकी प्लेस गोल पोस्ट से पहले होती है। वे गोलकीपर के पास गेंद पहुंचने ही नहीं देती हैं, उससे पहले ही गेंद छीनकर प्रतिद्वंदी को अचंभे में डाल देती हैं। जोया के पिता इदरीश खान ऑटो चलाते हैं। जोया बताती हैं कि उनकी बहन हिना खान भी हॉकी खेलती हैं। जोया राज्य स्तरीय प्रतियोगिता जीतकर भारतीय महिला हॉकी टीम में शामिल होना चाहती हैं।
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मनीषा को गोल करने में है महारथ
झांसी। घासमंडी निवासी मनीषा कुशवाहा को गोल करने में महारथ हासिल है। वे लेफ्ट हाफ में खेलती हैं। एक बार उनकी स्टिक में गेंद आ जाए तो वह गोल पोस्ट में जाकर ही छूटती है। मनीषा के पिता राजकुमार कुशवाहा कैटरिंग का काम करते हैं। मनीषा तीन बार राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में भाग ले चुकी हैं। झांसी में हुई प्रतियोगिता में उनको वूमेन ऑफ द मैच का खिताब मिल चुका है। वे रोज पांच घंटे अभ्यास कर प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा दिखाने की तैयारी कर रही हैं।
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छह बार प्रदेश स्तर पर दिखा चुकीं प्रतिभा
झांसी। नई बस्ती की रहने वाली वैष्णवी शर्मा छह बार प्रदेश स्तर पर खेलकर अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं। पांच साल पहले वह हॉकी खेलने के लिए मैदान में उतरी थीं। एलवीएम में अन्य खिलाड़ियों को खेलता देख उन्होंने भी हॉकी खेलने की ठानी। वैष्णवी मैच के दौरान राइट हाफ प्लेस पर खेलती हैं। वैष्णवी के पापा पंकज शर्मा इलेक्ट्रिीशियन हैं। वैष्णवी के छोटे भाई यश सैफई स्पोर्ट्स कॉलेज में प्रशिक्षण ले रहे हैं। वे नेशनल भी खेल चुके हैं। जबकि एक और छोटा भाई आयुष भी हॉकी का प्रशिक्षण ले रहा है। वे रोज छह घंटे अभ्यास कर खुद को प्रतियोगिता के लिए तैयार कर रही हैं।
घर की तंगी दूर करना चाहती हैं मोहिनी
झांसी। नई बस्ती निवासी मोहिनी कुशवाहा ने चार साल पहले हॉकी मैदान में कदम रखा है। परिवार ने उनके खेलने को लेकर पहले थोड़ा आपत्ति जताई, लेकिन बिटिया की मेहनत और सफलता देख अब परिवार उनके साथ खड़ा रहता है। मोहिनी के पिता मनोज मजदूरी करते हैं और मां उमा घरों में काम करती हैं। मोहिनी बताती हैं कि हॉकी खेलने की प्रेरणा स्कूल से मिली। परिवार से कहा तो थोड़ा विरोध किया, लेकिन उन्होंने फिर भी खेलना नहीं छोड़ा। वे तीन बार स्टेट प्रतियोगिता में जा चुकी हैं। उनका सपना भारतीय महिला टीम में शामिल होकर अच्छा खेलना और जीतकर घर की तंगी दूर करना है।
रागिनी बनना चाहती हैं बेस्ट प्लेयर
झांसी। चांद दरवाजा के पास रहने वाली रागिनी तीन साल से हॉकी खेल रही हैं। वे बेस्ट प्लेयर बनकर देश और झांसी का नाम रोशन करना चाहती हैं। रागिनी के पिता रामकिशन नल सुधारने का काम करते हैं। घर में सबसे छोटी रागिनी प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए मैदान पर पांच घंटे अभ्यास कर रही हैं। उनका सपना भी भारतीय महिला हॉकी टीम में शामिल होना है।
नेशनल खेल चुकी हैं पूूनम
झांसी। चांद दरवाजा निवासी पूनम परिहार राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी हैं। वे तीन साल से हॉकी खेल रही हैं। पूनम बताती हैं कि उनके भाई गौरव परिहार नेशनल प्लेयर रहे हैं। भाई ने बाद में खेलना छोड़ दिया तो वे मैदान में खेलने उतरीं। परिवार ने खूब सहयोग किया। पूनम के पिता कैटरिंग का काम करते हैं। जबकि मां आशा परिहार घरों में काम करती हैं। पूनम बताती हैं कि जब वे नेशनल खेलने के लिए गोरखपुर गईं थीं तो उनके फाइनल मैच में उनके सिर में गेंद लग गई थी। सिर फटने से उन्हें बीच में मैच छोड़ना पड़ा। अब पूनम छह घंटे मेहनत करती हैं।