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पानी ढोने में ही बीत रही जिंदगानी...एक बार सुन तो लीजिए बड़ी दर्द भरी है इनकी कहानी

Thu, 01 Jul 2021 02:09 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 01 Jul 2021 02:09 AM IST
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Water storing life waist
झांसी। आपने आपसी रंजिश या किसी मनमुटाव को लेकर होने वाले लड़ाई-झगड़ों के बारे में तो बहुत सुना और देखा होगा, लेकिन आपके अपने शहर झांसी में लोग पानी के लिए झगड़ रहे हैं, एक दूसरे के सिर फोड़ रहे है। पानी के लिए घर के बाहर बैठकर महिलाएं सुबह से चौकीदारी कर रहीं हैं। महिलाएं हों या बच्चे या फिर बुजुर्ग और पुरुष, लोग नहाना और खाना छोड़कर पानी के लिए भाग रहे हैं। इनकी दिनचर्या ही पानी के इंतजार से शुरू होती है। असल में ये नजारे शहर के अन्नपूर्णा कॉलोनी, भांडेरी गेट बाहर, इमामबाड़ा, इतवारी गंज और भैरव खिड़की सहित कई मोहल्लों में आम हैं। इन मोहल्लों में जहां लोग पानी के भीषण संकट से जूझ रहे हैं वहीं, पानी के लिए आ रहे टैंकरों पर लग रही भीड़ में जल्दी पानी भरने की होड़ में आपस में ही झगड़ रहे हैं।
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अन्नपूर्णा कॉलोनी : सुबह पांच बजे से घर के बाहर बैठ जाती हैं महिलाएं, पानी के लिए फूट चुके सिर
इस कॉलोनी में सरकारी पाइपलाइन पड़ी है, लोगों से वाटर टैक्स भी वसूला जाता है लेकिन यहां कि लाइनों में पिछले 10 साल से पानी नहीं आया है। कॉलोनी की महिलाएं सुबह पांच बजे से टैंकर की राह तकते हुए घर के बाहर बैठ जाती हैं। महिलाओं का कहना है कि घर में नहाना, खाना और सोना कब होगा, इसका कुछ पता नहीं होता। टैंकर आते ही पति-बच्चे और परिवार के सभी लोग हर काम भूलकर सिर्फ पानी भरने में जुट जाते हैं। महिलाएं बताती हैं कि दस वर्षों में सैकड़ों बार लोगों के आपस में झगड़े हो चुके, कई के सिर फूटे हैं और आपस में बोलचाल भी बंद है। बुधवार को कॉलोनी में टैंकर आने पर भीड़ जुट गई, रास्ता न होने पर लोगों ने कई राहगीरों और गाड़ियों को लेजम पाइप हटाकर निकाला लेकिन एक कार चालक लोगों से भिड़ गया, चालक ने टैंकर हटवा दिया और फर्राटा भरकर कार निकाल ले गया, पानी नहीं भर सके लोग उसे कोसते रहे।
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टैंकर आने का कोई समय नहीं है। इसलिए लोग घर के बाहर बैठे रहते हैं। सभी लोगों के अलावा मेरी बुजुर्ग मां सरला वर्मा को भी सुबह तड़के उठना पड़ता है। पानी भरने के चक्कर में मोहल्ले और राहगीरों से कई बार झगड़े होते हैं। विवेकानंद
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सुबह पांच बजे से उठकर घर के बाहर बैठ जाती हूं, नाश्ता, खाना, नहाना कब होगा, कोई समय निश्चित नहीं रहता, गर्मी में कूलर तक नहीं चल पाता। जिसको पानी नहीं मिलता वही दूसरों से झगड़ा करता है, ये तो रोज की बात है। नीतू साहू
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पानी के लिए सारा दिन टैंकर के इंतजार में चला जाता है। कोई खाना बना रहा हो या नहा रहा हो, टैंकर आते ही सारा काम छोड़ना पड़ता है। लोगों में कहासुनी होती रहती है। कई पड़ोसियों में बोलचाल नहीं है। यहां कोई किराएदार नहीं रुकता। सुनीता
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पानी के लिए पूरी कॉलोनी परेशान है। नोकझोंक, गाली-गलौज तो आम हो गई है। जब टैंकर आ जाता है उस वक्त गाड़ियों से निकलने वाले लोग और पानी भरने वालों में अक्सर झगड़ा होता है। गाड़ी वाले टैंकर तक भगा देते हैं। श्याम शरण नायक
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पानी के लिए कॉलोनी में कई बार बाल्टी और बाल पकड़कर खींचातानी वाली लड़ाई हो चुकी है। तंग आकर कई लोग 500 रुपये महीने पर प्राइवेट पानी ले रहे हैं। अब वहां भी दिक्कत है। टैंकर से ही पानी भरना पड़ता है। मिनी
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कुछ साल पहले की बात है पानी के लिए पड़ोसी से मारपीट में मेरा सिर फूट गया, तो तीन किमी दूर से पानी लाने लगी, प्राइवेट भी पानी लिया, अब वहां भी समस्या है तो टैंकर से पानी भरना पड़ रहा, दस साल से पानी नहीं है। सुनीता अग्रवाल
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बच्चों को भी दूर लगे हैंडपंप से पानी ढोकर लाना पड़ रहा
इतवारी गंज: क्षेत्र में पानी के लिए लोग दूर लगे हैंडपंप और टैंकर पर निर्भर हैं। यहां बच्चे हों या बड़े, पानी के लिए सभी को जुटना पड़ता है। क्षेत्रीय निवासी बालक तारिक मोपेड पर दो-तीन डिब्बे बांधकर पानी भरने हैंडपंप पर आया था। दोपहर दो बजे की भीषण गर्मी और उमस में उसने हैंडपंप से पानी भरा, फिर डिब्बों को बांधा और मोपेड चलाकर पानी ले गया। उधर, मोहल्ले के लोगों ने कहा कि टैंकर ही पानी का सहारा है। पानी को लेक र कई बार पड़ोसियों में मनमुटाव हो चुका।
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टैंकर के नीचे घुसकर बचा-कुचा पानी भरकर टालते हैं झगड़े
भांडेरी गेट बाहर : इस क्षेत्र में भी टैंकर ही लोगों का सहारा है। पानी का कोई और स्रोत नहीं है। स्थिति यह है कि टैंकर आने पर घर के बच्चों और गर्भवती महिला तक को बाकी लोगों के साथ पानी लाने के लिए लगना पड़ता है। टैंकर जिस घर के बाहर खड़ा होता है। वहां पांच-छह घर लंबी लेजम लाइन डालकर पानी भर लेते हैं। कुछ देर में टैंकर खाली हो जाता है। इसके बाद जिनको पानी नहीं मिलता वह दूसरों पर गुस्सा उतारता है। कई बार धक्का-मुक्की और मारपीट तक हो जाती है। कई बार झगड़ा बचाने के लिए लोग टैंकर में बचा-कुचा पानी भरने के लिए टैंकर के नीचे घुसकर लगे पाइप से पानी भरते हैं।
टैंकर तो दिन में कभी भी आ जाता है, लोग पूरी नींद सो नहीं पाते हैं। पानी के लिए मारपीट और झगड़ा होना आम बात है। इसी के चलते कई लोगों की आपस में बोलचाल बंद हो गई है। पानी के लिए रिश्ते खराब होने लगे हैं। अफसाना
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टैंकर आते ही भीड़ टूट पड़ती है, घर के सब लोग न लगें तो पानी नहीं भर पाता है। इस कारण से मोहल्ले में लड़ाई-झगड़ा होने लगता है। लड़के आपस में ही भिड़ जाते हैं। पानी के कारण लोगों को परेशान होना पड़ता है। परवेज

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इमामबाड़ा : यहां टैंकर से भी पानी की पूर्ति नहीं पूरी नहीं पड़ती है। ठेले पर दर्जन भर खाली डिब्बे रखकर पानी भरने जा रहे क्षेत्र में रहने वाले इरफान ने कहा कि पानी के लिए झगड़ा करने से अच्छा है कि दूर हैंडपंप से पानी भर लाएं।
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