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नालियों के बेकार पानी को फिर इस्तेमाल योग्य बनाएंगे

Thu, 22 Dec 2016 12:47 AM IST
jhansi
jhansi Updated Thu, 22 Dec 2016 12:47 AM IST
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water management
प्रशासन - फोटो : demo pic
महानगर में रोज नालियों में बेकार बह रहा कोई 60 एमएलडी (छह करोड़ लीटर पानी प्रतिदिन) पानी को ट्रीट( शोधन) करके इसे फिर से इस्तेमाल योग्य बनाया जाएगा। इसके लिए 21 जनवरी को दिल्ली में प्रस्तावित नीति आयोग की बैठक में खाका रखा जाएगा।
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पानी के अंधाधुंध उपयोग के कारण भूजल स्तर दिनोंदिन कम होता जा रहा है। इसलिए पानी बचाने और इसकी बर्बादी रोकने की कार्ययोजना पर होमवर्क शुरू हो गया है। झांसी में पानी की बहुत कमी है। पानी की कमी को पूरा करने के लिए 50 किलोमीटर दूर माताटीला बांध से पानी शहर तक लाया जाता है। दिनोदिन बढ़ते महानगर के दायरे के कारण स्वच्छ पानी की समस्या गंभीर होती जा रही है।
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महानगर की नालियों के जरिए तीन करोड़ लीटर लक्ष्मी तालाब, तीन करोड़ लीटर बड़ागांव गेट बाहर स्थित मानव तालाब, एक करोड़ लीटर पहूंज नदी, एक करोड़ लीटर पानी पहूंज नदी के आल्हा घाट पर जाता है। बाकी बेकार हो जाता है। यही पानी लक्ष्मी तालाब और मानव तालाब से होकर गढ़मऊ झील में जा रहा है।
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नीति आयोग की टीम ने तीन दिन पहले लक्ष्मी ताल, मानव ताल और पहूंज नदी का निरीक्षण किया था। अब नई नीति बनाई जाएगी, जिससे बेकार पानी का फिर से इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके लिए तीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लक्ष्मी ताल, मानव ताल और आल्हा घाट पर लगाए जाएंगे। इनके जरिए पानी साफ करने के बाद उसे शहर के आसपास खेतों तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए टैंकर के माध्यम से गैराज में पानी भिजवाया जाएगा, ताकि गाड़ियों की धुलाई में जो साफ पानी बरबाद होता है, उसे बचाया जा सके। इससे धुलाई सेंटर पर स्वच्छ पानी के दुरुपयोग पर लगाम लगेगी। इसके अलावा होटल में बर्तन साफ करने, भेल, माईसेम सीमेंट, पाइप फैक्ट्री आदि उद्योगों में स्वच्छ पानी के स्थान पर सीवरेज प्लांट से फिल्टर किया हुआ पानी भिजवाया जाएगा, ताकि स्वच्छ पानी की खपत को रोका जा सकेगा।
 
मथुरा और झांसी में पानी की कमी
उत्तर प्रदेश में दो जिले ऐसे हैं, जहां भूजल स्तर बहुत कम है। इसमें से एक मथुरा और दूसरा झांसी है। मथुरा में 60 प्रतिशत क्षेत्र में सीवर लाइन पड़ी है, लेकिन झांसी में पथरीली जमीन होने के कारण यहां पर सीवर लाइन नहीं डाली जा सकती है। इसलिए एसटीपी प्लांट लगाकर ही पानी का शोधन किया जाएगा और पानी के संकट को कम किया जाएगा।

बड़ागांव गेट बाहर पानी नहीं
अभी बड़ागांव गेट बाहर क्षेत्र में पानी के लिए गर्मियों में त्राहि- त्राहि मचती है। इसके अलावा महानगर के कोछाभांवर, करगुवां, लहरगिर्द, भगवंतपुरा, भट्टागांव ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पानी नहीं है। गर्मियों में इन क्षेत्रों के निवासी टैंकरों के भरोसे रहते हैं। लेकिन, इन क्षेत्रों से भी नालियों के माध्यम से पानी बेकार बह जाता है।

इस टीम ने किया निरीक्षण
नीति आयोग की टीम में लखनऊ के क्षेत्रीय पर्यावरण अध्ययन केंद्र के अपर निदेशक ए के गुप्ता, नीति आयोग की कंसलटेंट सोनिका बढ़ेरा व सीवरेज वाटर पर काम करने वाली अमेरिकन कंपनी सीएचटूएल के कंसलटेंट कुमुद ने शहर का निरीक्षण कर गंदे पानी का आकलन किया।

 
टीम ने पानी का सैंपल लिया
नीति आयोग की टीम निरीक्षण करने आई थी। वह पानी के सैंपल ले गई है। अब 21 जनवरी को दिल्ली में होने वाली बैठक में इस पानी के सैंपलों की रिपोर्ट बताई जाएगी तथा उसी के अनुरूप कार्ययोजना पर मुहर लगेगी।
- अरुण प्रकाश
नगर आयुक्त
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