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Jhansi News: हर बार चुनाव में आग लगाता रहा पानी...
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। हर चुनाव में सियासी दलों की ओर से नए मुद्दे उछाले जाते हैं। लेकिन, झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र में पानी की समस्या चुनावों में बड़ा सियासी मुद्दा बनी हुई है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पूर्व पं. जवाहर लाल नेहरू से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक इस मुद्दे को उठा चुके हैं। सबसे ज्यादा बांध वाले इस लोकसभा क्षेत्र के कई हिस्सों में गर्मी आते ही जल संकट छा जाता है। लोगो की निर्भरता टैंकरों से आने वाले पानी पर हो जाती है। इस मुद्दे की गूंज लखनऊ और दिल्ली तक में सुनने को मिल जाती है।
प्रदेश के 80 लोकसभा क्षेत्रों में से सबसे ज्यादा 22 बांध झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र में हैं। इससे जाहिर है कि यहां अकूत जल संपदा मौजूद है। बावजूद, गर्मी की शुरुआत से ही गांवों में जल संकट छा जाता है। यहां तक कि शहरी क्षेत्र के भी कई इलाकों में पानी के लिए हाहाकार मच जाता है। लोग टैंकरों से भेजे जाने वाले पानी पर निर्भर हो जाते हैं। जल संकट का यह मुद्दा दशकों से सियासी दलों की सियासत को धार देता चला आ रहा है।
इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि सन 1952 में लोकसभा के पहले चुनाव में जनसभा को संबोधित करने पं. जवाहर लाल नेहरू झांसी आए थे। उन्होंने क्षेत्र में व्याप्त जल संकट का मुद्दा उठाया था और उसके समाधान का भी भरोसा दिया था। हालांकि, इसके बाद के सालों में झांसी और ललितपुर में कई बांधों का निर्माण किया गया, बावजूद पानी की समस्या का समाधान नहीं हो पाया। जबकि, 15 फरवरी 2019 को झांसी में सभा को संबोधित करने झांसी आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यहां के इस मुद्दे को उठाया था और बुंदेलखंड क्षेत्र को पाइप पेयजल योजना की सौगात दी थी। इस पर तेजी से काम काम जारी है। कई गांवों में पहली बार नलों के जरिये पानी पहुंचा है। लेकिन, अभी भी कई हिस्सों में लोगों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। यह तो केवल बानगी भर है।
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इसके अलावा भी लोकसभा और विधानसभा के हर चुनाव में क्षेत्र में व्याप्त पानी की समस्या विपक्षी दलों के लिए सत्ता पक्ष को घेरने के लिए बड़ा हथियार बनी रही। राजनीतिक दलों के घोषणा पत्रों में भी जल संकट का मुद्दा स्थायी रूप से अपनी जगह बनाए रहा।
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वाटर एक्सप्रेस पर खूब हुई थी राजनीति
साल 2016 में बुंदेलखंड सूखे की चपेट में था। पानी के लिए यहां हाहाकार मचा था। तब केंद्र सरकार की ओर से यहां वाटर एक्सप्रेस भेजी गई थी। इस इस ट्रेन के जरिये पानी के टैंकर यहां भेजे गए थे। लेकिन, प्रदेश की सपा सरकार ने इस पानी को लेने से इन्कार कर दिया था। ट्रेन छह दिन तक स्टेशन पर खड़ी रही थी। बाद में इसे वापस लौटा दिया गया था। इस मुद्दे पर केंद्र और प्रदेश सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोपों का लंबा दौर चला था। यह मुद्दा केंद्र और प्रदेश की सियासी सुर्खियों में छाया रहा था।
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झांसी। हर चुनाव में सियासी दलों की ओर से नए मुद्दे उछाले जाते हैं। लेकिन, झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र में पानी की समस्या चुनावों में बड़ा सियासी मुद्दा बनी हुई है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पूर्व पं. जवाहर लाल नेहरू से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक इस मुद्दे को उठा चुके हैं। सबसे ज्यादा बांध वाले इस लोकसभा क्षेत्र के कई हिस्सों में गर्मी आते ही जल संकट छा जाता है। लोगो की निर्भरता टैंकरों से आने वाले पानी पर हो जाती है। इस मुद्दे की गूंज लखनऊ और दिल्ली तक में सुनने को मिल जाती है।
प्रदेश के 80 लोकसभा क्षेत्रों में से सबसे ज्यादा 22 बांध झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र में हैं। इससे जाहिर है कि यहां अकूत जल संपदा मौजूद है। बावजूद, गर्मी की शुरुआत से ही गांवों में जल संकट छा जाता है। यहां तक कि शहरी क्षेत्र के भी कई इलाकों में पानी के लिए हाहाकार मच जाता है। लोग टैंकरों से भेजे जाने वाले पानी पर निर्भर हो जाते हैं। जल संकट का यह मुद्दा दशकों से सियासी दलों की सियासत को धार देता चला आ रहा है।
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इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि सन 1952 में लोकसभा के पहले चुनाव में जनसभा को संबोधित करने पं. जवाहर लाल नेहरू झांसी आए थे। उन्होंने क्षेत्र में व्याप्त जल संकट का मुद्दा उठाया था और उसके समाधान का भी भरोसा दिया था। हालांकि, इसके बाद के सालों में झांसी और ललितपुर में कई बांधों का निर्माण किया गया, बावजूद पानी की समस्या का समाधान नहीं हो पाया। जबकि, 15 फरवरी 2019 को झांसी में सभा को संबोधित करने झांसी आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यहां के इस मुद्दे को उठाया था और बुंदेलखंड क्षेत्र को पाइप पेयजल योजना की सौगात दी थी। इस पर तेजी से काम काम जारी है। कई गांवों में पहली बार नलों के जरिये पानी पहुंचा है। लेकिन, अभी भी कई हिस्सों में लोगों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। यह तो केवल बानगी भर है।
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इसके अलावा भी लोकसभा और विधानसभा के हर चुनाव में क्षेत्र में व्याप्त पानी की समस्या विपक्षी दलों के लिए सत्ता पक्ष को घेरने के लिए बड़ा हथियार बनी रही। राजनीतिक दलों के घोषणा पत्रों में भी जल संकट का मुद्दा स्थायी रूप से अपनी जगह बनाए रहा।
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वाटर एक्सप्रेस पर खूब हुई थी राजनीति
साल 2016 में बुंदेलखंड सूखे की चपेट में था। पानी के लिए यहां हाहाकार मचा था। तब केंद्र सरकार की ओर से यहां वाटर एक्सप्रेस भेजी गई थी। इस इस ट्रेन के जरिये पानी के टैंकर यहां भेजे गए थे। लेकिन, प्रदेश की सपा सरकार ने इस पानी को लेने से इन्कार कर दिया था। ट्रेन छह दिन तक स्टेशन पर खड़ी रही थी। बाद में इसे वापस लौटा दिया गया था। इस मुद्दे पर केंद्र और प्रदेश सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोपों का लंबा दौर चला था। यह मुद्दा केंद्र और प्रदेश की सियासी सुर्खियों में छाया रहा था।